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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की मांग करने वाले किसान आंदोलकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ा, अब क्या करेगा टिकैत?

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की मांग पर किसान आंदोलकारियों को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

कृषि कानूनों को असंवैधानिक बता कर सड़कों के अतिक्रमण का असंवैधानिक कृत्य करने वाले किसान आन्दोलनकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ आईना दिखाया है, बल्कि उन्हें जमकर लताड़ भी लगायी है। दरअसल, दिल्ली सीमा की सड़कों पर अनैतिक अतिक्रमण किये बैठे किसान जंतर-मंतर पर ‘अतिक्रमण’ की मांग सुप्रीम कोर्ट से कर बैठे थे। इसी पर सुप्रीम कोर्ट किसान महापंचायत पर बिफर उठा था।

शहर का दम घोंट कर भीतर प्रदर्शन करना चाहते हैं – सुप्रीम कोर्ट

नाराजगी जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लंबे समय से विरोध के नाम पर किसानों ने पूरे शहर का गला घोंट दिया है और अब शहर के अंदर आकर उत्पात मचाना चाहते हैं। क्या शहर के लोग अपना कारोबार बंद कर दें या आपके प्रदर्शन से लोग खुश होंगे?

व्यवस्था और अदालतों पर विश्वास करने की नसीहत

न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एक बार कानूनों को अदालतों में चुनौती देने के बाद विरोध करने वाले किसानों को विरोध जारी रखने के बजाय व्यवस्था और अदालतों पर विश्वास करना चाहिए। पीठ ने कहा, ‘आपको प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन राजमार्गों को ब्लॉक कर लोगों को परेशानी में नहीं डाल सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘ पहले आपने शहर के बाहर सड़कों को अवरुद्ध किया और अब आप शहर के भीतर आना चाहते हैं। जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है।

प्रदर्शन करने की इजाजत कैसे दी जा सकती है- सुप्रीम कोर्ट

पीठ ने यह भी कहा कि प्रदर्शन कर रहे किसान यातायात बाधित कर रहे हैं, ट्रेनों और राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध कर रहे हैं। सुरक्षा कर्मियों को निशाना बना रहे हैं, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, ऊपर से प्रदर्शन करने की मांग के लिए याचिका भी दायर कर रहे हैं। ऐसे में प्रदर्शन करने की इजाजत कैसे दी जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

महापंचायत संगठन से हलफनामा दायर करने को कहा

याचिकाकर्ता किसान महापंचायत संगठन को लताड़ लगाने के साथ सुप्रीम कोर्ट ने उससे कहा, पहले आप हलफनामा दायर कर बतायें कि फिलहाल सीमाओं पर बैठे प्रदर्शकारियों से आपका कोई संबंध तो नहीं है। सर्वोच्च अदालत ने याचिका की प्रति केंद्रीय एजेंसी और अटॉर्नी जनरल को देने का भी आदेश जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों से प्रदर्शन हटाने के प्रयास पर केन्द्र से किया सवाल

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि वह राष्ट्रीय राजधानी में तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों द्वारा सड़क की ‘नाकेबंदी’ को हटाने के लिए क्या कर रही है? शीर्ष अदालत ने एक बार फिर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कि सड़कों को हमेशा के लिए कब्जा नहीं किया जा सकता।

अब तो सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया आन्दोलनकारियों का कृत्य अनैतिक

किसान आन्दोलकारियों के जिस प्रदर्शन से दिल्ली के आसपास की जनता हलकान है। जिन आन्दोलनकारियों को यह पता नहीं कि जिस तरह वे आन्दोलन कर रहे हैं, वह संवैधानिक है या नहीं, उन्हें कैसे पता कि कृषि कानून संवैधानिक हैं या नहीं। पूरा देश इन आन्दोलनकारियों की हरकतें देख रहा है। इन आन्दोलनकारियों के आन्दोलन करने के तरीकों की आलोचना कर रहा है, ऐसा नहीं कि आलोचना करने वाला हर व्यक्ति गलत हो। किसान या कहें तथाकथित किसान कृषि कानूनों में क्या गलत है बताये बिना आन्दोलन किये जा रहे हैं, उनके आन्दोलन का समर्थन कैसे किया जा सकता है? अब तो सुप्रीम कोर्ट ने उनके आन्दोलन करने के तरीकों पर सवाल उठा दिये हैं, जो यह बताने के लिए काफी है कि इन आन्दोलनकारियों का समर्थन नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट का बयान उन लोगों के लिए भी सबक है जो बिना समझे और अपने स्वार्थ के लिए इन किसानों के आन्दोलन का समर्थन कर रहे हैं। अब तो किसानों को बरगलाकर उनका नेता बने राकेश टिकैत को भी सोचना होगा- वह जो कर रहा है, क्या वह सही है?

यह भी पढ़ें: 68 साल बाद टाटा समूह में एयर इंडिया की ‘घर वापसी’, टाटा संस ने लगायी सबसे बड़ी बोली

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