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Subhadra Kumari Chauhan: साहित्य की तलवार से अंग्रेजों से खूब लड़ी ‘झांसी की रानी’

Subhadra Kumari Chauhan

Subhadra Kumari Chauhan: एक कवयित्री होने के साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थीं। वह देश की पहली महिला सत्याग्रही थीं। वह राष्ट्रीय चेतना की एक सजग कवयित्री रही हैं, किन्तु इन्होंने स्वाधीनता संग्राम में अनेक बार जेल की यातनाएं सहने के पश्चात अपनी अनुभूतियों को कहानी में भी व्यक्त किया। वातावरण चित्रण-प्रधान शैली की भाषा सरल तथा काव्यात्मक है, इस कारण इनकी रचना की सादगी हृदयग्राही है।

सिर्फ 9 साल में प्रकाशित हुई थी पहली कविता
Subhadra Kumari Chauhan का जन्म 16 अगस्त, 1904 को निहालपुर गांव में हुआ था। वह घोड़ा गाड़ी में बैठकर रोज स्कूल जाती थीं और इस दौरान भी लगातार कविताएं लिखती रहती थीं। यही वजह थी कि उनकी पहली कविता सिर्फ 9 साल की उम्र में प्रकाशित हुई थी। भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन में भागीदारी के दौरान उन्होंने अपनी कविता के जरिए दूसरों को अपने देश की संप्रभुता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया। सुभद्रा के परिवार में चार बहनें और दो भाई थे। उन्होंने स्‍वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया और कई बार जेल भी गईं।

117वीं जयंती के मौके पर गूगल ने डूडल बनाकर दी श्रद्धांजलि
Google ने आज एक लेखिका और स्वतंत्रता सेनानी सुभद्रा कुमारी चौहान के जीवन और उपलब्धियों का सम्मान करने के लिए एक Doodle बनाया है। इस इंडियन एक्टिविस्ट और लेखक के लिए Doodle ने एक साड़ी में कलम और कागज के साथ बैठीं सुभद्रा कुमारी चौहान को दिखाया है। यह Doodle न्यूजीलैंड की गेस्ट आर्टिस्ट प्रभा माल्या ने बनाया है।

कथा-साहित्य
सुभद्रा कुमारी चौहान ने कई कहानी-संग्रह, कविता-संग्रह और बाल-साहित्य लिखे। ‘बिखरे मोती’ सुभद्रा कुमारी चौहान का पहला कहानी-संग्रह है। इसमें भग्नावशेष, होली, पापीपेट, मछलीरानी, परिवर्तन, दृष्टिकोण, कदम्ब के फूल, किस्मत, मछुए की बेटी, एकादशी, आहुति, थाती, अमराई, अनुरोध, व ग्रामीणा कुल 15 कहानियां हैं! इन कहानियों की भाषा सरल बोलचाल की भाषा है! अधिकांश कहानियां नारी-विमर्श पर केंद्रित हैं! उन्मादिनी शीर्षक से उनका दूसरा कथा संग्रह 1934 में छपा। इसमें उन्मादिनी, असमंजस, अभियुक्त, सोने की कंठी, नारी हृदय, पवित्र ईर्ष्या, अंगूठी की खोज, चढ़ा दिमाग, व वेश्या की लड़की कुल 9 कहानियां हैं। ‘सीधे साधे चित्र’ सुभद्रा कुमारी चौहान का तीसरा व अंतिम कथा-संग्रह है। इसमें कुल 14 कहानियां हैं। रूपा, कैलाशी नानी, बिआल्हा, कल्याणी, दो साथी, प्रोफेसर मित्रा, दुराचारी व मंगला – ८ कहानियों की कथावस्तु नारी प्रधान पारिवारिक सामाजिक समस्याएं हैं। हींगवाला, राही, तांगे वाला, एवं गुलाबसिंह कहानियां राष्ट्रीय विषयों पर आधारित हैं।

सुभद्रा कुमारी चौहान ने कुल 46 कहानियां लिखीं।
सम्मान
– सेकसरिया पारितोषिक (1931) ‘मुकुल’ (कविता-संग्रह) के लिए
– सेकसरिया पारितोषिक (1932) ‘बिखरे मोती’ (कहानी-संग्रह) के लिए (दूसरी बार)
– भारतीय डाकतार विभाग ने 6 अगस्त 1976 को सुभद्रा कुमारी चौहान के सम्मान में 25 पैसे का एक डाक-टिकट जारी           किया।
– भारतीय तटरक्षक सेना ने 28 अप्रैल, 2006 को सुभद्राकुमारी चौहान की राष्ट्रप्रेम की भावना को सम्मानित करने के लिए नये     नियुक्त एक तटरक्षक जहाज को सुभद्रा कुमारी चौहान का नाम दिया है।
कहानी-संग्रह
– बिखरे मोती
– उन्मादिनी
– सीधे-साधे चित्र
– सीधे-साधे चित्र (संशोधन सहित पुनर्प्रकाशित)
कविता-संग्रह
– मुकुल
– त्रिधारा
– वीरों का बसंत
बाल-साहित्य
– झांसी की रानी
– कदम्ब का पेड़
– सभा का खेल

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