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Sri Lanka PM Resigns: श्रीलंका में आर्थिक संकट और भीषण हिंसा के बीच PM Mahinda Rajapaksa ने दिया इस्तीफा

श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे (Sri Lanka PM Mahinda Rajapaksa) ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. ये जानकारी समाचार एजेंसी एएनआई ने स्थानीय मीडिया के हवाले से दी है. इससे थोड़ी देर पहले खबर आई थी कि महिंदा राजपक्षे (Sri Lanka PM Resigns) के समर्थकों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला किया है, जिसमें 20 से अधिक लोग घायल हो गए हैं. प्रदर्शनकारी उनके आधिकारिक आवास के बाहर जुटे थे और इस्तीफे की मांग कर रहे थे. स्थिति को काबू में करने के लिए सेना की तैनाती की गई. सरकार पर आर्थिक संकट से निपटने के लिए अंतरिम प्रशासन बनाने का दबाव है.

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भीषण विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बीच महिंदा राजपक्षे ने ट्वीट कर कहा, ‘भावनाएं उबाल पर हैं. मैं आम लोगों से संयम बरतने और यह याद रखने का आग्रह करता हूं कि हिंसा से केवल हिंसा उत्पन्न होती है. जिस आर्थिक संकट से हम जूझ रहे हैं, उसे एक ऐसे आर्थिक समाधान की जरूरत है जिसे हल करने के लिए यह प्रशासन प्रतिबद्ध है.’ उन्होंने अपने घर के बाहर इकट्ठा हुए समर्थकों से ये भी कहा कि उन्हें कोई नहीं रोक सकता. महिंदा ने कहा, ‘मुझे विरोध और आंदोलन देखने की इतनी आदत हो गई है कि मुझे कोई भी नहीं रोक सकता. मैं किसी भी स्थिति का सामना करने का काफी अनुभव रखता हूं.’

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एक महीने के भीतर दो बार लगा आपातकाल

इससे पहले शुक्रवार को एक विशेष कैबिनेट बैठक में राष्ट्रपति राजपक्षे ने शुक्रवार मध्य रात्रि से आपातकाल की घोषणा कर दी थी. यह दूसरी बार है जब श्रीलंका में लगभग एक महीने की अवधि में आपातकाल घोषित किया गया. साल 1948 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद श्रीलंका अब तक के सबसे गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है. यह संकट मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा की कमी के कारण पैदा हुआ है, जिसका मतलब है कि देश मुख्य खाद्य पदार्थों और ईंधन के आयात के लिए भुगतान नहीं कर पा रहा है.

सरकार के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शनकारी

नौ अप्रैल से पूरे श्रीलंका में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं, क्योंकि सरकार के पास आयात के लिए धनराशि खत्म हो गई है. आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं. लोगों को इसकी वजह से तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इन्हें घंटों बिजली कटौती से भी जूझना पड़ रहा है. उन्होंने इस संकट के लिए परिवारवाद को जिम्मेदार ठहराया है. यहां सरकार पर राजपक्षे परिवार का दबदबा रहा है. बढ़ते दबाव के बावजूद राष्ट्रपति राजपक्षे और उनके भाई एवं प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया था. फिलहाल महिंदा राजपक्षे के इस्तीफा देने की खबर आई है.

इसे भी पढ़ें: Jharkhand के राजनीतिक आसमान में ‘तूफान‘ आने से पहले की खामोशी?

 

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