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Spurious Liquor : बिहार में शराबबंदी! कहां हो रही सुशासन बाबू से चूक

Spurious Liquor : बिहार में शराबबंदी! कहां हो रही सुशासन बाबू से चूक

न्यूज़ डेस्क/ समाचार प्लस/ झारखंड- बिहार

Spurious Liquor : बिहार में शराबबंदी कानून लागू है. कानून के तहत शराब पीना,  पिलाना, बेचना, रखना या सप्लाई करना जुर्म की श्रेणी में आता है. ऐसा करने वालों को शराबबंदी कानून के तहत दंडित करने का प्रावधान है. लेकिन बिहार में इन कानूनों को धता बताते हुए धड़ल्ले से शराब का कारोबार जारी है. नतीजतन बिहार में जहरीली शराब से मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है.

बिहार में 5 अप्रैल 2016 को शराबबंदी हुई। तब से अब तक 125 लोगों की मौत शराब पीने से हो चुकी है। यह जहरीली शराब बताई जा रही है। इनमें 2016 से 2020 तक 35 लोगों की मौत हुई। अब बीते 48 घंटों में 23 लोगों की मौत हो चुकी है। गोपालगंज में 13 लोगों की मौत हो गई।

पंचायत चुनाव से ठीक पहले राज्‍य में शराब की खपत बढ़ी 

बिहार में लंबे अरसे से शराबबंदी है, लेकिन राज्‍य के हर हिस्‍से में शराब उपलब्‍ध है. पंचायत चुनाव से ठीक पहले राज्‍य में शराब की खपत बढ़ गई . इसका नतीजा है कि शराब की तस्करी भी बढ़ गई. जिन जिलों में पहले चुनाव पड़े, वहां अधिक मात्रा में शराब पकड़ी गई. इस साल अब तक 90 लोगों की मौत हो चुकी है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि शराबबंदी की सूबे में क्या स्थिति है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पंचायत चुनाव के नाम पर डिमांड बढ़ी। कलर और स्प्रिट इसकी मात्रा बढ़ा दी गई। विदेशी शराब बताकर पिलाने के कारण ये हादसे हो रहे हैं।

स्प्रिट से तैयार हो रही बिहार में जहरीली शराब!

अस्पताल और नर्सिंग होम में उपयोग होने वाले सर्जिकल स्प्रिट से जहरीली शराब बनाई जा सकती है। आमतौर पर अस्पतालों में उपयोग होने वाले सर्जिकल स्प्रिट में 95% इथेनॉल होता है। इस स्प्रिट में मिलाया महज 5 फीसदी डी-नेचर्ड (अप्राकृतिक) अल्कोहल जीवन के लिए जहर है। देसी शराब में दरअसल इथाइल अल्कोहल का इस्तेमाल होता है। इसका रासायनिक फॉर्मूला C2 H50H है। सर्जिकल स्प्रिट जिसमें इथेनॉल का उपयोग होता है। इसका भी रासायनिक फॉर्मूला C2 H50H ही है। रसायन का एक ही फॉर्मूला होने के बावजूद सर्जिकल स्प्रिट में 5% डी-नेचर्ड स्प्रिट जहर है। मानव के लिए यह बाहरी उपयोग में आ सकता है, लेकिन इसका प्रयोग पीने के लिए नहीं किया जा सकता है।

छठ पर्व के बाद विस्तृत समीक्षा बैठक करेंगे- CM नीतीश कुमार

वहीं शुक्रवार को CM नीतीश कुमार ने पटना में कहा कि जहरीली शराब पीने वाले मौत के लिए खुद जिम्मेदार हैं। गलत काम कीजिएगा तो यह नौबत आएगी ही। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इसको लेकर पूरी तरह से गंभीर है। छठ पर्व के बाद समीक्षा बैठक की जाएगी।

“एक बड़े अभियान की रूपरेखा तैयार करेंगे”

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी भी लोगों की जागरूकता के लिए एक बड़ा कैंपेन चलाने की जरूरत है, ताकि लोग यह समझ सकें कि शराब गंदी चीज है। इसका कोई फायदा नहीं है, इसका नुकसान ही नुकसान है। नीतीश कुमार ने बताया कि छठ पर्व के बाद विस्तृत समीक्षा बैठक करेंगे और राज्य में एक बड़े अभियान की रूपरेखा तैयार करेंगे।

जहरीली शराब का ऐसे पता लगाया जा सकता है

डि-नेचर्ड स्प्रिट की जांच के लिए नई तकनीक का उपयोग होता है। नई तकनीक में कोमोट्राफी एसिड मेथड से मिथाइल अलकोहल की जांच हो सकेगी। दूसरा मेथड डाइनाइट्रो फिनाइल हाईड्रोजन सॉल्यूशन है, जिससे डिनेचर्ड स्प्रिट का पता चलेगा।

शराब तस्करी के बाजार में हरियाणा का दबदबा 

अक्टूबर में सिर्फ मद्य निषेध विभाग की टीम ने एक लाख 80 हजार लीटर शराब पकड़ी है। इसी तरह मद्य निषेध पुलिस ने पिछले दो-तीन दिनों में 20 हजार लीटर से अधिक शराब पकड़ी है। इसमें पटना, मुजफ्फरपुर, अररिया, मोतिहारी, दरभंगा व कटिहार में सबसे बड़ी रिकवरी हुई है। शराब तस्करी के बाजार में एक बार फिर हरियाणा का दबदबा दिख रहा है। हाल में पकड़ी गई शराब की बड़ी खेप में 50 से 60 फीसद आवक हरियाणा से रही है।

इन राज्यों से होती है शराब की तस्करी

पिछले छह माह में हरियाणा के आधा दर्जन बड़े शराब तस्करों को पकड़े जाने के बाद वहां से शराब तस्करी में कमी आई थी, मगर अब फिर से हरियाणा गैंग सक्रिय होता दिख रहा है। कुछ दिन पहले ही सुगौली में हरियाणा की 4428 लीटर, मुजफ्फरपुर के सकरा में हरियाणा की 2703 लीटर और पटना के गर्दनीबाग में करीब 8800 लीटर हरियाणा की शराब पकड़ी गई। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली व राजस्थान से आने वाली शराब की खेप भी पकड़ी गई है।

इन सीमावर्ती राज्यों से भी होती है तस्करी

बिहार के उत्तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश और दक्षिण में झारखण्ड स्थित है। इन सीमावर्ती राज्यों और बिहार के उत्तर में स्थित देश नेपाल से भी शराब की तस्करी यहां अक्सर की जाती है, ऐसा नहीं है कि शराब तस्करी का यह खेल चोरी छिपे जारी है, बल्कि पुलिस प्रशासन- आबकारी विभाग के अधिकारी कर्मियों की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता। अवैध तरीके से शराब बनाए जा रहे हैं जिसे सर्जिकल स्प्रिट से तैयार किया जा रहा है परिणामस्वरूप इसे पीकर मरने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

पैसे का खेल बढ़ा, आपूर्तिकर्ताओं को वर्ग विशेष का संरक्षण

बिहार में जहरीली शराब पीने से हो रही मौत की घटनाओं से स्पष्ट है कि राज्य में शराबबंदी कानून को क्रियान्वित करने के लिए या शराबबंदी के मामले में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि शराबबंदी के बाद से इसमें पैसे का खेल बढ़ गया है। इसमें कुछ बड़े लोग भी शामिल हैं। कार्रवाई निचले स्तर पर की जाती है। बड़े लोगों पर न तो कोई कार्रवाई हो पाती है और न ही उनकी गिरफ्तारी, क्योंकि उन्हें वर्ग विशेष का संरक्षण प्राप्त रहता है। कुछ लोगों का कहना है कि इसके क्रियान्वयन में चूक हुई है। जो लोग गिरफ्तार होते हैं, वह इसको ढोने वाले होते हैं न कि आपूर्तिकर्ताओं पर कार्रवाई की जाती है।

क्या संभव है पूर्ण शराबबंदी ?

प्रश्न उठता है कि क्या पूर्णतः शराबबंदी संभव हैं? व्यावहारिक तौर पर यह पूरी तरह संभव नहीं है। इसके कई कारण हैं। पहला शराबबंदी हमारे सामाजिक जीवन का आदिकाल से अभिन्न अंग रही है अतः इसे पूरी तरह से समाज से अलग नहीं किया जा सकता है। हां, उसकी उपलब्धता को विनियमित किया जा सकता है। अगर शराबबंदी पूर्णतः की जाती है तो, जो लोग शराब के आदी हैं वह इसे अन्य अवैध स्रोतों से प्राप्त करने का प्रयास करेंगे।अवैध स्रोतों से शराब प्राप्त करने पर संभव है कि घटिया किस्म की हो, जिससे लोगों की जान-माल की हानि और इस कारण सरकार की छवि भी ख़राब हो सकती है। सरकार के राजस्व में भी कमी हो सकती है। सरकार को न केवल उसकी निगरानी करने में चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं, बल्कि निगरानी करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों को भी जुटाने पर भी अधिक ख़र्च करना होगा। अवैध शराब की बिक्री होने के कारण राज्य में भ्रष्टाचार में भी वृद्धि हो सकती है। दूसरी तरफ यदि लोगों को नियंत्रित तरीके से शराब पीने की अनुमति दी जाती है, तो शराब की गुणवत्ता की निगरानी की जा सकती है। उपलब्धता के कारण लोग घटिया किस्म की शराब पीने से बचेंगे जिससे उनके जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव की दर अपेक्षाकृत कम होगी। शराब बिक्री की अनुमति दिए जाने से सरकार के राजस्व पर भी वृद्धि होगी। हां दूसरी तरफ शराबबंदी के कुछ सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं जहां घरेलू हिंसा में कमी आई है वहीं घरों की आर्थिक स्थितियों में सुधार भी आया है और बिहार में दूध की बिक्री भी बढ़ी है। सड़क दुर्घटनाओं में कमी आई है।

ये भी पढ़ें : उपचुनाव के डैमेज कंट्रोल पर क्या करेगी भाजपा, कल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में तय होगी रणनीति

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