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Sologamy: ‘बिन तेरे होंगे फेरे…’ ये लड़की रचाने जा रही खुद से शादी! मंडप सजेगा, फेरे भी होंगे; लेकिन नहीं होगा दूल्हा

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Sologamy: वैसे तो प्राचीन हिन्दू धर्म शास्त्रों में आठ प्रकार के विवाह का जिक्र आया है. विवाह के ये प्रकार ब्रह्म, दैव, आर्य, प्राजापत्य, असुर, गन्धर्व, राक्षस और पिशाच बताए गए हैं. हालांकि इन आठ विवाहों में से सिर्फ ब्रह्म विवाह को ही मान्यता दी गई है, बाकी अन्य को धर्मसम्मत नहीं माना गया है. अगर वर्तमान समय की बात करें तो बहुविवाह, अंतर धार्मिक विवाह, समलैंगिक विवाह के मामले देश में आम हो गए हैं, लेकिन इसी बीच गुजरात की एक लड़की के खुद से विवाह करने की बात ने स्व विवाह या एकल विवाह (sologamy) को चर्चा में ला दिया है, जिस  शादी में सभी रस्में तो होंगी, लेकिन किसी भी विवाह की सबसे अहम कड़ी माने जाने वाला दूल्हा नहीं होगा.

11 जून को है शादी 

निजी कंपनी में काम करने वाली 24 वर्षीय क्षमा बिंदु 11 जून को ब्याह रचाने जा रही है। वह अपनी शादी की तैयारी में धूमधाम से जुटी है। एक अंग्रेजी अखबार से चर्चा में क्षमा बिंदु ने अपनी एकल शादी (Sologamy) के फैसले, उसकी तैयारियों से लेकर हनीमून तक सब बिंदुओं पर खुलासा किया। वह बाकायदा अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेगी और अपनी मांग में खुद सिंदूर भरेगी। देश में एकल शादी का यह संभवत: पहला मामला है।

पूरे रीति रिवाज से होगी शादी

दरअसल, गुजरात के वड़ोदरा में रहने वाली 24 साल की क्षमा बिंदू नाम की लड़की ये अजीबोगरीब शादी करेगी. क्षमा किसी दूल्हे के साथ नहीं बल्कि खुद के साथ शादी करने जा रही हैं. इस शादी में सभी पारंपरिक अनुष्ठान होंगे. क्षमा सिंदूर तक लगाएंगी. लेकिन पूरी शादी में न कोई दूल्हा होगा और न ही कोई बारात. ऐसा कहा जा रहा है कि ये गुजरात का पहला आत्म-विवाह या एकल विवाह होगा.

क्यों लिया निर्णय

क्षमा बिंदु का कहना है कि वह कभी भी शादी नहीं करना चाहती थी, मगर दुल्हन बनने का सपना था, इसलिए उसने खुद से शादी का फैसला किया। जब निर्णय किया तो सवाल आया कि क्या देश में ऐसी शादी पहले कभी हुई है? इस पर बिंदु ने ऑनलाइन सर्च किया। खूब तलाश करने पर भी बिंदु को ऐसा कोई केस नहीं मिला। क्षमा का मानना है कि वह सोलो या एकल विवाह करने वाली देश की संभवत: पहली लड़की होगी।

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‘देश में मिसाल बनेगी शादी’

क्षमा ने कहा है कि यह शादी देश में मिसाल बनेगी। क्षमा ने शादी के लिए उसने महंगा लहंगा भी खरीद लिया है और पार्लर से लेकर ज्वेलरी तक सब का इंतजाम कर लिया है। क्षमा का कहना है कि खुद से खुद की शादी करना स्वयं से बिना शर्त प्यार होने का संदेश है। यह आत्म-स्वीकृति है। आमतौर पर लोग जिससे प्यार करते हैं, उससे शादी करते हैं, लेकिन वह खुद से प्यार करती है, इसलिए खुद से शादी करने जा रही है। इसे समाज के कुछ लोग अप्रासंगिक मान सकते हैं, लेकिन मैं यह संदेश देना चाहती हूं कि महिला होना मायने रखता है।

 मंदिर से होगा विवाह

क्षमा के माता-पिता खुले विचारों के हैं। उन्होंने शादी के लिए आशीर्वाद दिया। क्षमा की शादी गोत्र के एक मंदिर से होगी। खुद के लिए क्षमा ने पांच कसमें भी लिखी हैं। क्षमा ने हनीमून के लिए गोवा जाने का फैसला किया है।

क्या सोलोगैमी विवाह कानूनी तौर पर मान्य है ?

विशेषज्ञों के मुताबिक सोलोगैमी शादी एक प्रतीकात्मक विवाह समारोह है, जो कानून के दायरे में नहीं बंधा है। ऐसी शादी करने वालों को अपने मूल दस्तावेजों में किसी तरह के बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है। यदि आज आप सोलोगैमी करते हैं और भविष्य में किसी दूसरे से (महिला को पुरुष से और पुरुष को महिला से) पारंपरिक विवाह करने की इच्छा हो जाती है, तो आप किसी तरह से कानूनी लफड़े में नहीं फंसेंगे। क्योंकि, कानून की नजर में आपकी पहली शादी (स्व-विवाह) की कोई मान्यता नहीं होगी।

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