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मोदी हैं तो मुमकिन हुआ: पीएम के संकल्प का नतीजा श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर, काशी बनी ‘नव्य काशी, भव्य काशी’

Kashi Visswanath Coridoor

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

श्रीकाशी विश्वनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में एक है। इस महत्व को कोई कम नहीं कर सकता। लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज इसकी भव्यता को चार चांद लगा दिया है।  1 दिसम्बर, 1955 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों से पुनर्निर्मित सोमनाथ धाम देश को लोकार्पित हुआ था। आज यानी 13 दिसम्बर, 2021 को काशीविश्वनाथ का कायाकल्प हुआ है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों का परिणाम है कि इतने कम समय में काशी विश्वनाथ धाम का स्वरूप पूरी तरह बदल गया। काशीविश्वनाथ कॉरिडोर का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही 8 मार्च 2019 को किया था। यानी दो वर्ष 9 माह 9 दिन में उनका संकल्प पूरा भी हो गया।

कॉरिडोर निर्माण में 320 इमारतों के अधिग्रहण, 390 करोड़ का भुगतान

कॉरिडोर को बनाने के लिए 320 से अधिक इमारतों को खरीदा गया था। फिर उन्हें ध्वस्त कर नये कॉरिडोर का निर्माण किया गया है। भारत में शायद ही ऐसा कोई बड़ा प्रोजेक्ट होगा है, जो बिना किसी कानून पेंच में फंसे पूरा हो गया। इस प्राचीन-ऐतिहासिक स्थल से जुड़े कुछ विवाद कई सालों से चले आ रहे हैं। फिर भी कॉरिडोर निर्माण से जुड़ा एक भी कानूनी मामला भारत के किसी भी कोर्ट में पेंडिंग नहीं है। बता दें, यह प्रोजेक्ट 5000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। इस प्रोजेक्ट को बनाने के दौरान प्राचीन मंदिर और उसके परिसर में कोई संरचनात्मक परिवर्तन नहीं किया गया।

100 साल पुराना गांधी का सपना हुआ साकार

शायद पीएम मोदी का विजन महात्मा गांधी के सपने को साकार करना था। 1916 में गांधीजी वाराणसी गये थे। उस दौरान उन्होंने मंदिरों के संकरे रास्तों और साफ-सफाई की कमी को लेकर नाराज हुए थे। बीएचयू में अपने भाषण में महात्मा गांधी ने सवाल भी खड़ा किया था कि अगर हमारे मंदिरों की हालत ऐसी होगी तो भविष्य में हमारे देश का क्या होगा?

एक बार में 75 हजार लोग प्रवेश कर सकेंगे

कॉरिडोर परियोजना पूरी होने के बाद अब मंदिर परिसर पांच लाख वर्ग फीट में फैल गया है, जो पहले की तुलना में करीब 200 गुना बड़ा है। इससे पहले मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं को महज तीन हजार वर्ग फुट की जगह मिलती थी। मंदिर कॉरिडोर में जगह बढ़ने से अब पूरे परिसर में एक समय में लगभग 50 से 75 हजार श्रद्धालु एक बार में प्रवेश कर सकेंगे, जबकि पहले सैकड़ों की संख्या में ही श्रद्धालु आ पाते थे।

परिसर में कुल 23 इमारतें

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में अब आधुनिक सुविधाओं के साथ कुल 23 इमारतें हैं, जिनमें मंदिर चौक, पर्यटक सूचना केंद्र, मोक्ष गृह, छोटा अतिथि गृह, संग्रहालय, सिटी गैलरी, फूड कोर्ट, मल्टीपर्पस हॉल, लॉकर रूम और शौचालय शामिल हैं. पटेल के मुताबिक, परियोजना के 5.50 लाख वर्ग फुट क्षेत्र का लगभग 70 फीसदी हिस्सा ग्रीनरी के लिए रखा गया है।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से श्रद्धालुओं को मिलेंगी ढेरों सहूलियतें
  • काशी विश्वनाथ का मंदिर अब गंगा से सीधे जुड़ गया है। जलासेन घाट, मणिकर्णिका और ललिता घाट पर श्रद्धालु सीधे बाबा धाम में प्रवेश कर सकेंगे।
  • श्रद्धालुओं को अपना सामान सुरक्षित रखने, बैठने और आराम करने के लिए 3 यात्री सुविधा केंद्रों में सुविधा मिलेगी।
  • सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन के लिए दो मंजिला इमारत बनायी गयी है।
  • श्रद्धालुओं के लिए योग और ध्यान केंद्र के रूप में वैदिक केंद्र की स्थापना भी यहां की गयी है।
  • धाम क्षेत्र में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओें के लिए स्प्रिचुअल बुक सेंटर धार्मिक पुस्तकों का नया केंद्र होगा।
  • भोगशाला में एक साथ 150 श्रद्धालु बैठकर बाबा विश्वनाथ का प्रसाद ग्रहण कर सकेंगे।
  • विश्वनाथ धाम में मुमुक्षु भवन बनाया गया है। इसके 100 कदम पर महाश्मशान मणिकर्णिका है।
  • विश्वनाथ धाम में प्रवेश के लिए 4 विशालकाय द्वार बनाए गए हैं। पहले यहां सिर्फ सकरी गलियां थीं।
  • सुरक्षा के लिए हाईटेक कंट्रोल रूम बनाया गया है। पूरे धाम क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
  • यहां आपातकालीन चिकित्सा सुविधा से लेकर एंबुलेंस तक की व्यवस्था रहेगी।

यह भी पढ़ें: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘आंखों’ से पूरी दुनिया को देखी ‘नव्य काशी, भव्य काशी, दिव्य काशी’

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