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जीवन-प्रत्याशा पर पॉपुलेशन एंड डेवलपमेंट रिव्यू जर्नल का चौंकाने वाला सर्वे:  दलितों, मुस्लिमों से ज्यादा जीते हैं सवर्ण

Survey on life expectancy: Savarnas live more than Dalits, Muslims

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

भारत विभिन्न समुदायों-जातियों का देश है। देश हर नागरिक को समान रूप से जीने का अधिकार दिया है, लेकिन जीवन-प्रत्याशा (Life Expectancy) सभी को समान रूप से जीने नहीं देती। कम से कम पॉपुलेशन एंड डेवलपमेंट रिव्यू जर्नल में छपा सर्वे यही बताता है। सर्वे के अनुसार भारत में सवर्ण जाति के लोगों और दलित समुदाय के लोगों की जीवन-प्रत्याशा में अंतर है। यानी प्रकृति की यह विभिन्नता उनकी औसत उम्र पर भी दिखायी देती है। सर्वे बताया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लोगों के मुकाबले सवर्ण औसतन 4 से 6 साल ज्यादा जीते हैं। इतना ही नहीं, भारत के मुसलमानों और सवर्णों बीच औसत उम्र का अंतर ढाई वर्ष तक का है। यानी सवर्णों के मुकाबले मुसलमान 2.5 साल कम जीते हैं।

साल-दर-साल आया है अंतर

सवाल उठता है कि आखिर इस सर्वे का आधार क्या है? दावा यही किया गया है कि काफी गहन अध्ययन के बाद सर्वे रिपोर्ट तैयार की गयी है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे इसका मूल आधार है। 1997-2000 और 2013-16 के बीच नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में यह अंतर साफ-साफ दिखता है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के इन आंकड़ों की तुलना की गयी तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं। 1997-2000 में सवर्ण पुरुषों की जीवन-प्रत्याशा 62.9 साल पायी गयी, जबकि इस अवधि में अनुसूचित जाति में 58.3 और अनुसूचित जनजाति में 54.5 वर्ष थी। सवर्णों के मुकाबले मुस्लिमों और ओबीसी की जीवन प्रत्याशा कम पायी गयी। मुस्लिम पुरुषों में जीवन-प्रत्याशा 62.6 और ओबीसी में 60.2 वर्ष सामने आई है। 2013-16 के सर्वे के जीवन-प्रत्याशा में अंतर आ गया। 2013-16 में सवर्ण पुरुषों की जीवन प्रत्याशा बढ़कर 69.4 वर्ष हो गयी जबकि मुस्लिमों पुरुषों की 66.8, ओबीसी की 66, एससी की 63.3 और एसटी का 62.4 वर्ष थी।

महिलाओं की जीवन-प्रत्याशा बेहतर

महिलाओं की जीवन-प्रत्याशा पुरुषों की तुलना में बेहतर पायी गयी है। 1997-2000 के सर्वे में सवर्ण महिलाओं की औसत उम्र 64.3 वर्ष, मुस्लिम महिलाओं की औसत उम्र 62.2, ओबीसी महिलाओं की औसत उम्र 60.7, अनुसूचित जाति (एससी) 58 और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की महिलाओं की औसत उम्र 57 साल थी। पुरुषों की ही तरह 2013-16 के सर्वे में महिलाओं की औसत उम्र में इजाफा देखा गयाहै। सवर्ण जाति की महिलाओं की औसत उम्र जहां 72.2 वर्ष थी, वहीं मुस्लिम महिलाओं की औसत उम्र 69.4, ओबीसी महिलाओं की औसत उम्र 69.4, अनुसूचित जाति (एससी) 67.8 और एसटी 68 साल पायी गयी।

बीमार राज्यों में जीने पर भी खतरा

देश के कुछ राज्यों, जैसे- यूपी, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की गिनती बीमारू राज्यों में होती है। सर्वे में जीवन प्रत्याशा का जो अंतर बताया गया है, वह इन राज्यों में फेल हो जाता है। यानी इन राज्यों के लोगों में जीवन प्रत्याशा बाकी जगहों के मुकाबले और कम है। हालांकि पूर्वोत्तर राज्यों में अनुसूचित जातियों की औसत उम्र सवर्ण जातियों से भी ज्यादा पाया गया है।

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