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SCO Summit 2022: समरकंद में एससीओ समिट शुरू, पुतिन से होगी पीएम मोदी की खास मुलाकात

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उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) के समरकंद (Samarkand) में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन 2022 (SCO Summit 2022) शुरू हो गया है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन को आज संबोधित कर रहे हैं। साथ ही एससीओ के शिखर सम्मेलन से इतर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात पर सबकी निगाहें हैं।

हम भारत को एक विनिर्माण केंद्र में बदलना चाहते हैं: पीएम मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया कोरोना महामारी पर काबू पा रही है। कोरोना और यूक्रेन संकट के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में कई व्यवधान उत्पन्न हुए है। हम भारत को एक विनिर्माण केंद्र में बदलना चाहते हैं। SCO सम्मेलन की बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत में 70 हजार से अधिक स्टार्टअप है। हम आपसी सहयोग बढ़ाना चाहते है. दुनिया इस समय खाद्य संकट का सामना कर रही है।

इन नेताओं से होगी मुलाकात

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi), चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping), रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin), पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif), उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव (Shavkat Mirziyoyev) और अन्य नेताओं ने समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में एक सामूहिक तस्वीर के लिए पोज दिया।

पुतिन से होगी पीएम मोदी की मुलाकात

बता दें कि समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन 2022 के दौरान पीएम मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता होगी. इसके अलावा पीएम मोदी ईरान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

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पीएम मोदी का हुआ भव्य स्वागत

इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी हिस्सा ले रहे हैं। शिखर सम्मेलन एससीओ की गतिविधियों की समीक्षा करने और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करने का अवसर होगा। समरकंद पहुंचने पर पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया। दो साल बाद पहली बार एससीओ के शिखर सम्मेलन में नेताओं की व्यक्तिगत रूप से मौजूदगी दिखेगी।

क्या है SCO

एक अंतर सरकारी संगठन है। यह संगठन राजनीति, अर्थशास्त्र, विकास और सेना के मुद्दों पर केंद्रित है। इसकी शुरुआत 1996 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान के नेताओं द्वारा ‘शंघाई फाइव’ के रूप में हुई थी। वर्तमान में संगठन के आठ सदस्य देश शामिल हैं। इन देशों की सूची में भारत, पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान सहित चार पर्यवेक्षक देश (Observer Countires) और छह संवाद भागीदार (Dialogue Partners) देश शामिल हैं।

उद्देश्य 

2001 में संगठन का नाम बदलकर एससीओ कर दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना, सीमा मुद्दों को हल करना, आतंकवाद और धार्मिक अतिवाद का समाधान करना और क्षेत्रीय विकास को बढ़ाना है। हालांकि, चीन के राष्ट्रपति शी के साथ उनकी संभावित द्विपक्षीय बैठक की अब तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। शिखर सम्मेलन में आमतौर पर दो सत्र होते हैं। एक सीमित सत्र केवल एससीओ सदस्य राज्यों के लिए और दूसरा विस्तारित सत्र पर्यवेक्षकों और विशेष आमंत्रितों के लिए होगा।

15 देशों के शीर्ष नेता हैं आमंत्रित 

आठ देशों का ये सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब यूक्रेन पर रूसी आक्रमण और ताइवान जलडमरूमध्य में चीन के आक्रामक सैन्य रुख के कारण भारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल देखी जा रही है। इस साल के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए कुल मिलाकर 15 देशों के शीर्ष नेताओं को आमंत्रित किया गया है।

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