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कांग्रेस के पोस्टर में सावरकर की फोटो ‘भूल’ या ‘ऐतिहासिक भूल सुधार’, कांग्रेस की नजर में सावरकर स्वतंत्रता सेनानी नहीं

Savarkar's photo in Congress poster is a 'mistake' or a 'historic blunder

तब तो जवाहरलाल नेहरू भी नहीं हैं स्वतंत्रता सेनानी…!

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

इसे भूल नहीं, बल्कि ‘भूल सुधार’ कहेंगे! कांग्रेस ने भारत जोड़ो अभियान में एक पोस्टर जारी किया। इस पोस्टर में स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी वीर सावरकर की तस्वीर भी नजर आयी। पोस्टर छपने के बाद कांग्रेस इसे गलती से हुई प्रिंटिंग बताते हुए, सावरकर की फोटो को छुपा कर वहां गांधीजी की तस्वीर लगा दी। सावरकर की तस्वीर के लगने को कांग्रेस भले ही अपनी ‘भूल’ बता रही है, दरअसल यह भूल नहीं, बल्कि इसे कांग्रेस की ‘भूल सुधार’ माना जाना चाहिए। जिस महान स्वतंत्रता सेनानी का महानता का लोहा देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, लौह महिला इंदिरा गांधी मान चुके हों, उसे आज के कांग्रेसी अपनी राजनीतिक लिप्सा के कारण भूलने का नाटक कर रहे हैं।

जिस पोस्टर में यह तथाकथित ‘गलती’ हुई, वह यात्रा के केरल के एर्नाकुलम में पहुंचने पर लगाए गए पोस्टर में हुई है। इसी पोस्टर में स्वतंत्रता सेनानियों की फोटो के बीच में वीर सावरकर की फोटो लगी हुई थी। इसी का बचाव कांग्रेस प्रिंटिंग की गलती बताकर कर रही है। पोस्टर में अगर वीर सावरकर की सिर्फ फोटो लगी होती तब भी माना जा सकता था कि यह गलती से कोई दूसरी फोटो लग गयी। मगर पोस्टर में तस्वीर भी सही है और तस्वीर के नीचे नाम भी सही है। यह कैसे हो सकता है कि कांग्रेस जिससे ‘नफरत’ करती हो, नाम के साथ उसकी फोटो कैसे छप जाये। गनीमत यह है कि कांग्रेस ने यह नहीं कहा कि पोस्टर भाजपा ने छपवाया है।

कांग्रेस की जवाब लाजवाब

पोस्टर में हुई गलती पर कांग्रेस का यह कहना है कि प्रिंटिंग की गलती के कारण ऐसा हुआ है। पार्टी पोस्टर पर स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीर चाहती थी। लेकिन डिजाइन करने वाले लड़के ने ऑनलाइन फोटो खोजकर पोस्टर में लगा दिया। यह तो वही हुआ कि शादी का कार्ड छपवाना था तो प्रिंटिंग वाले कह दिया ‘भैया एक कार्ड’ छाप देना’। इसका मतलब यह भी हुआ कि पोस्टर छपा लेकिन उसे कांग्रेसियों ने देखा भी नहीं, बस उसे टांग दिया। गलती समझ आने के बाद कार्यकर्ताओं ने उनकी जगह महात्मा गांधी की फोटो लगाकर अपनी गलती ढंकने का प्रयास किया।

सावरकर को स्वतंत्रता सेनानी नहीं मानती कांग्रेस

जिस तरह से भारत जोड़ो यात्रा की अपनी विचारधारा है, उसी प्रकार वीर सावरकर को लेकर उसकी अपनी विचारधारा है। पूरा देश वीर सावरकर को महान स्वतंत्रता सेनानी मानता है, लेकिन कांग्रेस सावरकर को स्वतंत्रता सेनानी नहीं मानती है, लेकिन क्यों… यह तो कांग्रेस ही जाने… कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने देश की आजादी के लिए अंग्रेजों से लड़ने के बजाय ‘केवल उनसे माफी’ मांगी थी। यानी वीर सावरकर का स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेना, उसकी खातिर कालापानी की सजा झेलना, जेल में भीषण यातनाएं झेलना, सब की सब कांग्रेस की नजर में व्यर्थ हैं?

नेहरू का माफी मांगना कैसे भूल गयी कांग्रेस?

बात निकलती है तो दूर तलक जाती है। सावरकर की एक तथाकथित भूल को कांग्रेस उनकी गलती मानती है तो चलो इसे हम भी मान लेते हैं। लेकिन गलती को हर जगह गलती ही कहा जायेगा> जवाहरलाल नेहरू की भी ऐसी ही ‘गलती’ इतिहास में दर्ज है। पोस्टर विवाद में भाजपा की IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट कर कांग्रेस को कुछ याद दिलाया है, ‘वीर सावरकर की तस्वीरें एर्नाकुलम (हवाई अड्डे के पास) में कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को सुशोभित करती हुईं। देर से ही सही, लेकिन राहुल गांधी के लिए अच्छा रियलाइजेशन है, जिनके परदादा नेहरू ने अंग्रेजों से पंजाब की नाभा जेल से केवल दो सप्ताह में ही बाहर निकाले जाने की गुहार लगाई थी।’

वाकया 1923 का है। नाभा रियासत में गैर कानूनी ढंग से प्रवेश करने पर औपनिवेशिक शासन ने जवाहरलाल नेहरू को 2 साल की सजा सुनाई गई थी। तब नेहरू ने भी कभी भी नाभा रियासत में प्रवेश न करने का माफीनामा देकर दो हफ्ते में ही अपनी सजा माफ करवा ली और रिहा भी हो गए। यही नहीं, जवाहर लाल के पिता मोती लाल नेहरू भी उन्हें रिहा कराने के लिए तत्कालीन वायसराय के पास सिफारिश लेकर भी पहुंच गए थे। लेकिन चूंकि जवाहरलाल नेहरू राहुल गांधी के परदादा है, इसलिए कांग्रेस के लिए यह माफी योग्य है!

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