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Sarala Birla University का स्थापना दिवस समारोह: बोलीं प्रोफेसर कामिनी कुमार- विवि ने 5 साल में हासिल किए कई नए मुकाम

Sarala Birla University ranchi : सरला बिरला विश्वविद्यालय (Sarala Birla University)  के पंचम स्थापना दिवस समारोह की विधिवत शुरूआत बी.के. बिरला ऑडिटोरियम में मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय की प्रति कुलपति प्रोफेसर कामिनी कुमार (kamini kumar), विश्वविद्यालय के  कुलपति प्रोफ़ेसर गोपाल पाठक, कुलसचिव प्रोफ़ेसर विजय कुमार सिंह, मानविकी एवं भाषा विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर नीलिमा पाठक, इंजीनियरिंग संकाय के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर एस बी दंडिन, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट के डीन  हरि बाबू शुक्ला, छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ अशोक कुमार अस्थाना, वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रबंधन विभाग के संकायाध्यक्ष डॉ संदीप कुमार, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभाग के सह संकायाध्यक्ष डॉ राधा माधव झा, डॉ सुबानी बाड़ा, डॉ रिया मुखर्जी, आशुतोष द्विवेदी आदि के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

कोरोना काल में भी विवि छात्रों को शिक्षा देने में कामयाब रहा-प्रोफेसर कामिनी कुमार 

बतौर मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय की प्रति कुलपति प्रोफेसर कामिनी कुमार ने सरला बिरला विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सौभाग्य से आजादी के अमृत महोत्सव के अमृत काल में सरला बिरला  विश्वविद्यालय अपने पांचवें स्थापना दिवस की सुखद अनुभूति के साथ सतत आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी सरला बिरला विश्वविद्यालय अपने छात्रों के साथ ऑनलाइन सतत संपर्क में रहा तथा उन्हें शिक्षा शिक्षित करने में कामयाब रहा। अपने 5 वर्ष के कालखंड में ही या विश्वविद्यालय वट वृक्ष बन छाया देना शुरू कर दिया है। छात्रों के कौशल विकास के लिए विश्वविद्यालय के कार्यों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि उदीयमान छात्रों को ज्ञान के उत्कृष्ट स्तर तक पहुंचाने में शिक्षक ही हर विपरीत परिस्थितियों से निपटने में सहायक होता है।

‘आदर्श शिक्षक ही नॉलेज को स्किल में बदल सकते हैं’

उन्होंने कहा कि लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के साथ मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करने वाले आदर्श शिक्षक ही नॉलेज को स्किल में बदल सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्राचीन ज्ञान एवं नवीन ज्ञान के बीच सामंजस्य स्थापित कर आधुनिक आवश्यकता के अनुरूप ज्ञानयुक्त राष्ट्र के लिए योग्य नागरिक निर्माण करने की योजना पर अपने विचार साझा की। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने कर्म, कर्तव्यों के प्रति ज्यादा जागरूक रहेंगे व अधिकार से हटकर कर्तव्यों के पालन की सोचेंगे तो अवश्य ही हम विश्व स्तर पर जाने जाएंगे।

शांतिनिकेतन की तर्ज पर विकसित होगा विवि- प्रोफ़ेसर गोपाल पाठक

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर गोपाल पाठक ने शुभ कामनाएं देते हुए अपने अध्यक्षीय उद्बोधन के क्रम में सरला बिरला विश्वविद्यालय के विकासक्रम एवं कोरोना काल में किए गए कार्यों की चर्चा करते हुए कहा शिक्षक समाज का सबसे सम्मानित समुदाय होता है। यह विश्व का निर्माता होता है। उन्होंने पंडित मदन मोहन मालवीय जी के चरित्र व व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर विश्वविद्यालय को आगे ले जाने की बात कही। उन्होंने सरला बिरला विश्वविद्यालय को शांतिनिकेतन के तौर पर विकसित किए जाने की भी बात कही।कार्य व चरित्र की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने कार्य, चरित्र एवं कर्तव्य से सम्मानित होता है।

‘पाश्चात्य संस्कृति  की नकल हमें जड़ से अलग कर रही है’ 

संयम, समर्पण और अनुशासन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हम पाश्चात्य संस्कृति  की नकल करते हुए अपनी जड़ से कटते जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीयता के साथ भारतीय परंपराओं एवं रीति-रिवाजों को अपनाते हुए आधुनिक आवश्यकता के अनुसार राष्ट्र के लिए समर्पित व निष्ठावान नागरिक निर्माण करने की दिशा में एक नई सोच के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी देन है। उन्होंने कहा कि बिरला परिवार द्वारा निर्देशित सरला बिरला विश्वविद्यालय सदैव गुणवत्ता पर बल देती है चाहे वह शिक्षा हो या प्रबंधन।

सभी पदाधिकारी और छात्र बधाई के पात्र -डॉ प्रदीप कुमार वर्मा 

विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी डॉ प्रदीप कुमार वर्मा ने विश्वविद्यालय के 5 वर्ष पूरे हो जाने पर हर्ष व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकारियों कर्मचारियों एवं छात्र छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें बधाइयां दी। सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर विजय कुमार सिंह ने एनुअल रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय के प्रारंभिक इतिहास की जानकारी देते हुए वर्तमान परिदृश्य की वृत्त चित्र प्रस्तुत किया।

आज सरला बिरला विश्वविद्यालय छात्रों की पहली पसंद- प्रोफेसर विजय कुमार सिंह

उन्होंने 2017 से सरला बिरला विश्वविद्यालय की यात्रा की चर्चा हुए करते हुए कहा कि समर्पण और टीम स्पिरिट के साथ हम आगे बढ़ते जा रहे हैं। महज 5 साल की यात्रा में हम ना केवल भारत बल्कि विश्व के कई महत्वपूर्ण विश्वविद्यालयों के साथ जुड़ पाने में कामयाब हो सके हैं। 2017 में विश्वविद्यालय की यात्रा शून्य से प्रारंभ होकर बगैर इसकी परवाह किए कि लोग क्या कहेंगे, हम बिरला हाउस के मार्गदर्शन में उनकी ख्याति के अनुरूप अपने आप को स्थापित करने में लगे रहे।जिसका परिणाम है कि आज सरला बिरला विश्वविद्यालय छात्रों की पहली पसंद बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारे सभी पदाधिकारी, प्राध्यापक एवं कर्मचारी नौकरी करने के भाव से कभी काम नहीं किए, सदैव अपने और अपनत्व के साथ काम कर रहे हैं।

कार्य सबसे बड़ा तीर्थ और सबसे बड़ा देव- प्रोफेसर नीलिमा पाठक

मानविकी एवं भाषा विज्ञान संकाय की संकायाध्यक्ष प्रोफेसर नीलिमा पाठक ने कहा कि स्थापना दिवस अतीत के लेखा-जोखा एवं भविष्य के सपनों को याद करने का दिन है। उन्होंने कहा कि कोई भी शिक्षण संस्थान राष्ट्र निर्माता की भूमिका में होता है। उन्होंने कहा कि पद से अधिकार जुड़ा होता है। अधिकार और कर्तव्य के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने अपने कार्य से सम्मान पाए जाने की बात की। उन्होंने बताया कि कार्य को सबसे बड़ा तीर्थ और सबसे बड़ा देव माना गया है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका 

कार्यक्रम का संचालन मानविकी की सहायक प्राध्यापक डॉ रिया मुखर्जी ने किया तथा स्वागत भाषण डीएसडब्ल्यू डॉ अशोक कुमार अस्थाना ने प्रस्तुत किया। अतिथियों का परिचय एवं कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन की औपचारिकता वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रबंधन विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ नीतू सिंघी द्वारा पूरी की गई।

ये रहे उपस्थित 

इस अवसर पर उप कुलसचिव प्रोफ़ेसर अमित गुप्ता, श्री प्रवीन कुमार, प्रो राहुल वत्स, डॉ संजीव कुमार सिन्हा, डॉ संजीव कुमार, डॉ पार्थ पॉल, डॉ मनोज पाण्डेय, डॉ पूजा मिश्रा, डॉ नित्या गर्ग, डॉ अमृता सरकार, प्रो आदित्य विक्रम वर्मा, प्रो आरोही आनंद, डॉ भारद्वाज शुक्ल, डॉ अभिषेक चौहान, प्रो मोटोशी साहा,अनुभव अंकित, सुभाष नारायण शाहदेव, आदित्य रंजन, राहुल रंजन, ऋषि राज जमुआर, अमित शर्मा, प्रशान्त जमुआर सहित सभी पदाधिकारी, प्राध्यापक, कर्मचारी और  छात्र- छात्राएं उपस्थित थे।

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