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किसान सरकार को झुका सकते हैं तो साधु-संत क्यों नहीं? अपनी मांग मनवाने के लिए कर दी आन्दोलन की शुरुआत

Sadhu Sant

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

किसानों के आन्दोलन का प्रभाव अब दूसरे वर्गों पर भी पड़ने लगा है। सबको अब यही लगने लगा है कि जब किसान अन्दोलन कर सरकार से अपनी बातें मनवा सकते हैं तब वे क्यों नहीं? कृषि कानूनों की वापसी के बाद ट्रेड यूनियनें हरकत में आ चुकी हैं। अब देशभर के साधु-संत भी अपनी मांग मनवाना चाहते हैं। साधु-संतों ने तो बजाप्ते आंदोलन का ऐलान कर भी दिया है।

दिल्ली के कालजयी मंदिर में जमा हुए संत, छेड़ा  मठ-मंदिर मुक्ति आन्दोलन

देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली के कालकाजी मंदिर में साधु-संत इकट्ठा हुए थे। साधु-संतों की मांग है देशभर के मंदिरों को सरकार नियंत्रण से मुक्त कराना। साधु-संत मंदिरों और मठों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करवाने के लिए कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। साधु-संतों ने तो यह भी ऐलान कर दिया है कि अगर जरूरत पड़ी तो वे दिल्ली में डेरा डाल देंगे।

तमिलनाडु के नटराज मंदिर पर आये सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

अखिल भारतीय संत समिति के महंत रवींद्र पुरी ने जनवरी 2014 में सुप्रीम कोर्ट  के एक फैसले का हवाला दिया है। तमिलनाडु में नटराज मंदिर को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया था कि मंदिरों का संचालन और व्यवस्था भक्तों का काम है। बता दें, मंदिर के पुजारियों और बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया था। जगन्नाथ मंदिर के अधिकार वाले केस में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मंदिरों पर भक्तों द्वारा चढ़ाए गए धन को सरकारें मनमाने तरीके से खर्च करती हैं। जबकि एक भी चर्च या मस्जिद पर राज्य का नियंत्रण नहीं है।

अपनी मांग मनवाने के लिए किसानों का रास्ता अपनायेंगे संत

अखिल भारतीय संत समिति के कार्यक्रम में साधु-संतों ने कहा कि जब किसान दिल्ली में रास्ते को रोककर बैठ सकते हैं और सरकार उनकी मांगें मान सकती तो वे ऐसा क्यों नहीं कर सकते। महन्त सुरेंद्र नाथ अवधूत महाराज ने सरकार को चेताते हुए कहा कि सरकार को मंदिरों का प्रबंधन तुरंत साधु-संतों के हाथ में सौंप देना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो पूरे देश के साधु-संत आंदोलन करेंगे।

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