समाचार प्लस
Breaking झारखण्ड फीचर्ड न्यूज़ स्लाइडर

Row over coal : कोयले को लेकर कब ख़त्म होगी झारखंड और केंद्र सरकार के बीच तकरार?

Row over coal

न्यूज़ डेस्क/ समाचार प्लस झारखंड- बिहार

Row over coal: डीवीसी (DVC) बकाये के भुगतान का मसला हेमंत सरकार के गठन के समय से ही केंद्र और राज्य के बीच बड़ा मुद्दा बना हुआ है। शुरुआत में कई आग्रह के बाद डीवीसी ने चेताया था कि अगर उसका बकाया भुगतान नहीं किया जाता है तो वह बिजली आपूर्ति ठप कर देगी। उन्होंने एक-दो बार ऐसा किया भी। राज्य के आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में डीवीसी से बिजली की आपूर्ति होती है।हर बार राज्य सरकार के आश्वासन के बाद बिजली बहाल हो गई, लेकिन बकाया भुगतान का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। ऐसी स्थिति में कुछ महीने पहले केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार के भारतीय रिजर्व बैंक खाते से पहली किस्त के रूप में 1417 करोड़ रुपये काट लिए थे। इसके बाद काफी हो-हल्ला मचा था।

डीवीसी के बिजली उत्पादन का महत्वपूर्ण बेस है झारखंड

डीवीसी के बिजली उत्पादन का महत्वपूर्ण बेस झारखंड है। बंगाल और झारखंड दो राज्यों में ही डीवीसी के पावर प्लांट हैं। डीवीसी को उपयोग का 50% से अधिक कोयला झारखंड स्थित बीसीसीएल से मिलता है। ईसीएल एवं सीसीएल से डीवीसी को कोयला मिलता है। इतना ही नहीं, झारखंड डीवीसी का बड़े ग्राहकों में से एक है। झारखंड पर डीवीसी का बकाया पैसा केंद्रीय बिजली मंत्रालय द्वारा ऑटो डेबिट किए जाने पर झारखंड सरकार नाराजगी जताती रही है।

कोयले की रॉयल्टी झारखंड के लिए बड़ा सवाल

कोयले की रॉयल्टी झारखंड के लिए बड़ा सवाल है। इस राज्य की आर्थिक तौर पर अबतक की पहचान में कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिजों का ही महत्व है। देश-विदेश की नजरें इस राज्य पर खनिज और वन संपदा के कारण ही लगी हुई हैं। उनको देखकर ही मित्तल, जिंदल, रुइया जैसे नामी-गिरामी लोगों ने इधर का रुख किया था।

राज्य सरकार के हिस्से में अत्यंत सीमित खनन अधिकार

इन खनिजों के खनन से यहां के मानव समाज सहित तमाम जीव-जंतुओं और पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच चुका है। अलबत्ता, इन खनिजों से वास्तविक लाभ दो ही तरह के वर्ग उठा रहे हैं। एक तो उनके व्यापारी और मूल्य संव‌र्द्धनकर्ता और दूसरा पूरा देश। ऐसे में केंद्रीय ऊर्जा और कोयला मंत्री का यह कहना कि राज्य में कोयले का उत्पादन बढ़ा दिया जाय तो दूनी रॉयल्टी दी जाएगी, समझ से परे की बात है। कोयले का खनन या तो केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम करते हैं या फिर सीमित मात्रा में निजी कंपनियां। राज्य सरकार के हिस्से में अत्यंत सीमित खनन अधिकार है।

डीवीसी ने झारखंड के 2800 करोड़ रुपये बकाये के रूप में काट लिए

डीवीसी द्वारा झारखंड के 2800 करोड़ रुपये बकाये के रूप में काट लिए हैं।  2200 करोड़ और काटे जाने का मसला सामने आया है ।  इसके अलावा सीसीएल की तरफ से झारखंड सरकार को रॉयल्टी नहीं दी जा रही है, हजारों करोड़ रुपये कोल इंडिया की तरफ से झारखंड सरकार को अबतक नहीं दिया गया है।

केंद्र पर झारखंड के साथ भेदभाव बरतने का लगता रहा है आरोप 

जिस तरह से केंद्रीय उपक्रमों पर बिजली सहित अन्य बकाया का राज्य सरकार ने हिसाब-किताब खंगालना शुरू किया है, उसे देखते हुए यह आशंका भी बलवती हो गई है कि आने वाले दिनों में यह टकराव बढ़ेगा। राज्य में सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस पहले से ही केंद्र और भाजपा को इस मुद्दे पर घेरते आ रहे हैं। दोनों दल केंद्र पर झारखंड के साथ भेदभाव बरतने और परेशान करने का आरोप मढ़ रहे हैं।

 नीति आयोग ने दिया बकाया राशि दिलाने का भरोसा

हालांकि झारखंड में कोयला कंपनियों द्वारा इस्तेमाल की जा रही जमीन के एवज में राज्य सरकार को हजारों करोड़ रुपये मिल सकते हैं. नीति आयोग ने राज्य सरकार और कोल कंपनियों के अधिकारियों की संयुक्त कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद बकाया राशि दिलाने का भरोसा भी दिलाया है. हालांकि, आयोग ने यह साफ कर दिया है कि कोयला कंपनियों द्वारा इस्तेमाल की जा रही जमीन के बदले व्यवसायिक कार्य के लिए तय राशि नहीं दी जायेगी.जमीन के एवज में कृषि कार्य में उपयोग के लिए निर्धारित राशि ही राज्य को दी जायेगी.

केंद्र सरकार को ‘रॉयल्टी’ पर विचार करना ही चाहिए

भाजपा इसका प्रतिकार करती रही है और बकाया बिल प्रकरण को इसे राज्य सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन का नतीजा बताती रही है। खैर, इस विवाद का अंत जो भी हो, लेकिन यह सवाल तो लाजिमी है कि आखिर बिजली कंपनियों के बकाए का भुगतान नहीं होगा तो वे संचालित कैसे होंगी? जहां तक रॉयल्टी का सवाल है, केंद्र सरकार को इस पर विचार करना ही चाहिए। इसमें कहीं से ऐसी बू नहीं आनी चाहिए कि केंद्र और राज्य में दूसरे दल की सरकार होने का असर रॉयल्टी पर पड़ रहा है।

ये भी पढ़ें :राष्ट्रपति खेल धुरंधरों को आज राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों से करेंगे सम्मानित, नीरज समेत कई नाम

 

Related posts

IBPS Clerk Recruitment Form 2021: बैंक Clerk के पद पर नौकरी पाने का अंतिम मौका कल, 7,858 पद के लिए जल्द करें आवेदन

Manoj Singh

रांची के दर्शकों की मुराद पूरी, आधे नहीं पूरे दर्शक देखेंगे JSCA स्टेडियम में भारत-न्यूजीलैंड मैच

Pramod Kumar

Sahibganj: 11 हजार वोल्ट के तार की चपेट में आया हाईवा, ड्राइवर की घटनास्थल पर मौत, खलासी झुलसा

Pramod Kumar

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.