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‘रेवड़ियां’ ‘आप’ के लिए अच्छी नहीं! मुफ्त की बिजली ने दिया पंजाब सरकार को जोर का झटका, खजाना खाली!

'Revdiyan' is not good for 'You'! Free electricity gave a jolt to the Punjab government

‘ब्यूरोक्रेट पॉलिटिशियन’ केजरीवाल हुए फ्यूज, चेतें दूसरे राज्य!

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

मुफ्त की रेवड़ियों की वकालत करने वाली देश की तमाम सरकारों के लिए पंजाब की हालत बड़ा सबक है। मुफ्त के वायदों के सहारे सत्ता में आयी आप सरकार अब अपने खाली खजाने का रोना रो रही है। हालत यह है कि अपने कर्मचारियों, यहां तक कि अपने विधायकों को देने के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं। बता दें, सत्ता में आने के बाद पंजाब की आप सरकार ने 1 जुलाई से न सिर्फ राज्य की जनता को 300 यूनिट बिजली फ्री दे रही है, बल्कि उसका पिछला बकाया बिजली बिल भी माफ कर दिया। इसका नतीजा है कि पंजाब की वित्तीय स्थिति डगमगा गयी है।

बता दें, पिछले दिनों पीएम नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकारों की तरफ से बिना अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन किये मुफ्त की योजनाओं को ‘रेवड़ी कल्चर’ कहा था। इस पर कई राज्यों की सरकारों को मिर्ची लग गयी थी। इनमें झारखंड की हेमंत सरकार भी थी। 5 सितम्बर को विश्वास मत हासिल करते समय भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन में चीख-चीख कर पीएम मोदी को इसके लिए कोसा था। पीएम मोदी तो चलिये कभी चाय बेचने वाले रहे हैं, लेकिन Indian Revenue Service में Assistance Commissioner of Income Tax यानी ब्यूरोक्रेट रह चुके दिल्ली के केजरीवाल राज्य का वित्तीय गणित नहीं समझ पाये, तो उनका अनुसरण कर रेवड़ियां बांटने वाली राज्य सरकारें क्या अपनी जनता को बतायेंगे कि वे रेवड़ियां किस आधार पर बांट रही हैं। कहीं वह भी केजरीवाल की तरह अपने राज्य को संकट में तो नहीं डाल रहीं?

ऐसा नहीं कि सिर्फ प्रधानमंत्री ने इसको लेकर चिंता जतायी थी। सुप्रीम कोर्ट भी ऐसी योजनाओं पर चिंता जता चुका है। लेकिन चूंकि यह बात पीएम मोदी ने कही थी, इसलिए उसका विरोध करना जरूरी है। विपक्षी पार्टियों की सरकारें ने ने पानी पी-पीकर मोदी को तो कोसा ही, रेवड़ियां बांटने का अपना काम जारी भी रखा। आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल तो गुजरात में दिल्ली और पंजाब से भी बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर आये हैं। कांग्रेस के राजकुमार भी कहां पीछे रहने वाले हैं। उन्होंने तो मुफ्त बिजली के साथ किसानों के कर्जे तक माफ कर देने का ऐलान अभी से करना शुरू कर दिया है।

पंजाब सरकार दे रही तकनीकी गड़बड़ी की सफाई

दूसरी ओर पंजाब सरकार इस संकट को तकनीकी गड़बड़ी बता रही है।  लेकिन ये सच है कि सब्सिडी का बोझ उसके खजाने पर लगातार बना हुआ है। वैसे, खजाने पर दबाव बनने की खबर पंजाब में सरकार गठन के पहले महीने से ही आनी शुरू हो गयी थी। जीएसटी की मुआवजा राशि भी केंद्र सरकार ने बंद कर दी है। इसके कारण पंजाब की माली हालत और खराब हो गयी। पिछले साल दिसंबर तक के बिजली बिल माफ करने से खजाने पर करीब 1300 करोड़ रुपए का बोझ पड़ा है। साथ ही बिजली की पिछली सब्सिडी का बकाया भी 9000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

पंजाब के बिजली बिल का गणित

आप सरकार बनने से पहले पंजाब सरकार को बिजली बिल से 33000 करोड़ रुपये हासिल होते थे। लेकिन सब्सिडी ने सारा गणित बिगाड़ दिया है। सब्सिडी 18000 करोड़ रुपये के पार कर गयी है। यानी बिजली से होने वाली आय पर सब्सिडी का जबरदस्त दबाव पड़ा है। हालत यह कि पंजाब सरकार सब्सिडी की राशि न कम्पनियों को दे पा रही है और न ही निजी प्लांट को बिजली खरीद की कीमत ही अदा नहीं कर पा रही है। बिजली मुफ्त होने से लोग उसका जमकर फायदा ले रहे हैं। पंजाब में पहली बार सितंबर तक बिजली की खपत 14000 मेगावाट को पार कर गई है। अब पंजाब की आप सरकार के सामने सांप-छछूंदर वाली स्थिति हो गयी है। अब अगर वह इससे पीछे हटती है, तो यह उसके लिए और घातक हो सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में तो अभी वक्त है। गुजरात और तेलंगाना समेत दूसरे राज्यों में  पांव पसारने के सपने को भी बड़ा झटका लग सकता है।

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