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Revdi Culture: मुफ्त, मुफ्त, मुफ्त… कहीं राजस्व पर भारी ना पड़ जाए ‘मुफ्त’ वादों की राजनीति

Revdi Culture

न्यूज़ डेस्क/ समाचार प्लस, झारखंड- बिहार 

Revdi Culture: इन दिनों राजनीतिक दलों में मुफ्त की सुविधा देने के वादे या यूं कहें कि  मुफ्त  रेवड़ियां बांटने (Revdi Culture) की होड़ मच गई है. जब- जब देश में चुनाव का वक़्त आता है, तब- तब देश के लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दल वोट हासिल करने के लिए मुफ्त बिजली पानी, महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा और हर महीने नकद राशि से लेकर कई तरह के प्रलोभन से अपने पक्ष में वोट करने को लेकर रिझाते हैं. हालांकि इस मुफ्तखोरी वाली घोषणा से वो सत्ता पर काबिज तो हो जाते हैं, पर इसके दूरगामी प्रभाव को नजरअंदाज कर देते हैं.

पीएम ने की थी ‘रेवड़ी कल्चर’ परंपरा की निंदा 

हाल ही में, पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा चुनावों में ‘रेवड़ी कल्चर’ (Revdi Culture) की परंपरा की निंदा करने के बाद राजनीतिक बहस छिड़ गई है. यही नहीं यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया कि क्या ‘फ्री’ के कल्चर पर रोक लगाई जानी चाहिए. जिस पर गत मंगलवार को सुनवाई भी हुई. चुनाव आयोग के वकील ने अदालत को बताया कि मुफ्त उपहार और चुनावी वादों से संबंधित नियमों को आदर्श आचार संहिता में शामिल किया गया है. भारत के मुख्य न्यायाधीश ने भी कहा कि यह ‘एक बहुत ही गंभीर मुद्दा’ है, इसके अलावा सीजेआई ने केंद्र सरकार से स्थिति पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाने को कहा है.

”भारतीय राज्यों पर संयुक्त रूप से 70 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज”

याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने अदालत को सूचित करते हुए कहा था कि सभी भारतीय राज्यों पर संयुक्त रूप से 70 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज है. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने यह याचिका दायर की तो पंजाब राज्य 3 लाख करोड़ के कर्ज में था. पंजाब की पूरी आबादी 3 करोड़ थी. इसका मतलब है कि हर नागरिक पर करोड़ों का कर्ज है! कुल मिलाकर सभी राज्य 70 लाख करोड़ से अधिक कर्ज में हैं. कर्नाटक में 6 लाख करोड़ से अधिक हैं. उन्होंने तर्क दिया कि हम श्रीलंका होने के रास्ते पर हैं. वहां भी उसी तरह के मुफ्त वादे किए गए थे जिससे वहन की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई.

image source : social media
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पंजाब है इस रेवड़ी कल्चर का भुक्तभोगी 

पंजाब में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो चुकी है. हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव के बाद पंजाब (Punjab)के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब की खराब आर्थिक स्थिति का  हवाला देते हुए प्रधानमंत्री से हर साल 50,000 करोड़ की मदद की मांग कर दी थी. पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बने अभी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं, लेकिन 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के वादे को पूरा नहीं होने का मुद्दा राज्य में असंतोष का कारण बनने लगा है.

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राजस्व पर पड़ता है असर 

कुछ राज्यों में किसानों को एक मुफ्त बिजली और उनके कर्ज माफी और बिजली के बिल माफी की घोषणा करने की होड़ मच गयी थी. निश्चित ही इस तरह की मुफ्त प्रदान किए जा रहे सेवाओं का असर राज्य के राजस्व पर पड़ता है, लेकिन ऐसे वादे करते समय राजनीतिक दल राज्य की आर्थिक स्थिति का आकलन नहीं करते हैं और बाद में बदहाल आर्थिक स्थिति की दुहाई देते हैं.

इन राज्यों पर हो गया है ऋण का अत्यधिक दबाव

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार ऋण- सकल राज्य घरेलू उत्पाद अनुपात के आधार पर जिन पांच राज्यों पर ऋण का अत्यधिक दबाव है, वे हैं बिहार, केरल, पंजाब, राजस्थान और बंगाल पंजाब के सबसे खराब स्थिति में रहने की आशंका है, क्योंकि इसका ऋण-जीएसडीपी अनुपात वर्ष 2026-27 में 45 प्रतिशत से अधिक होने का अनुमान है, जिससे इसकी वित्तीय स्थिति में और गिरावट आएगी.इन राज्यों को अपने ऋण स्तरों को स्थिर करने के लिए मुफ्त की योजनाओं पर अंकुश लगाना होगा.

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झारखंड भी अछूता नहीं 

झारखंड में भी यहां की हेमंत सरकार 100 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले को मुफ्त बिजली देने की घोषणा कर चुकी है. राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के करीब 31 लाख 52 हजार 773 उपभोक्ता ऐसे हैं जो 100 यूनिट से कम बिजली खपत करते हैं. ऐसे उपभोक्ताओं का बिजली बिल पूरी तरह माफ करने की बात कही गई है. वहीँ जानकारी के मुताबिक ऐसे उपभोक्ताओं पर बिल माफ करने से राज्य सरकार पर 75.03 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और इसका बुरा असर राज्य के राजस्व पर पड़ेगा. इसके अलावा राज्य सरकार ने अपने बजट में गरीबों को एक रुपये किलो दाल और किसानों को 100 यूनिट बिजली मुफ्त देने का प्रावधान कर दिया है.अगर देखा जाए तो ये कदम गरीब और किसानों के हित में है, लेकिन इन समस्याओं का कोई ठोस निराकरण सरकार को निकालना चाहिए ना कि लोक लुभावन घोषणा कर देना चाहिए, क्योंकि इससे इसके आर्थिक दुष्परिणाम ही सामने आते हैं.

रघुवर सरकार में भी हो चुकी है ऐसी घोषणाएं 

जब रघुवर दास झारखंड के सीएम थे, तो उस वक़्त उन्होंने भी अपने जन्मदिन पर राज्य की महिलाओं को बड़ा गिफ्ट दे दिया था। उन्होंने महिलाओं के नाम पर खरीदी जाने वाली अचल संपत्ति पर स्टांप और रजिस्ट्री फीस माफ कर दिया था। महिलाओं को मकान, फ्लैट और जमीन खरीदने पर सिर्फ एक रुपए का टोकन स्टांप लग रहा था। हालांकि हेमंत सरकार के सत्ता संभालने के बाद इसे हटा दिया गया।

भारत के लिए नयी नहीं है यह परंपरा 

भारत में चुनावों के दौरान ऐसे वादे करने की परंपरा कोई नयी नहीं है. देश में इसकी शुरुआत तत्कालीन आंध्रप्रदेश में एनटी रामाराव द्वारा ही कर दी गई थी,  जब उन्होंने 2 रूपये किलो चावल देने की घोषणा की थी तब से तमिलनाडु के  राजनीतिक दलों के बीच लोकलुभावन और रेवड़ी कल्चर की बाढ़ सी आ गई . उदहारण के लिए 100 यूनिट फ्री बिजली देना, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, कामकाजी महिलाओं को स्कूटी खरीदने में सब्सिडी से लेकर प्रेशर कुकर, मिक्सर ग्राइन्डर, और स्कूटी तक देने की भी घोषणा की जाती रही है.

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ये भी पढ़ें : ED पर ‘सुप्रीम’ फैसला, गिरफ्तारी, तलाशी और समन समेत ED के सभी अधिकार बरकरार

 

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