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Ravan Dahan: गुणों की खान भी है बुराई का प्रतीक रावण, भारतीय मानस में रचे बसे हैं दशानन रचित शास्त्र

Ravan Dahan

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

आज विजयादशमी है। पूरा देश विजयोत्सव मना रहा है। यह विजयोत्सव रावण दहन (Ravan Dahan)  के बिना अधूरा है। क्योंकि रावण को बुराई का प्रतीक माना जाता है और सभी लोग उसके पुतले को जलाकर खुद के लिए अच्छाई की कामना करते हैं। पूरी दुनिया में रावण की यही पहचान की रावण बुराइयों का ‘पुतला’ है। लेकिन रावण के दूसरे पहलू को जानने का प्रयास कभी नहीं किया जाता कि वह प्रकांड पंडित भी था। न चाहते हुए भी भारतीय समाज को रावण की कई देन संजीवनी दे रही हैं। रावण की ये अच्छाइयां भारतीय मानस में रची बसी हैं। यही नहीं रावण की ये देन भारतीय समाज का मार्गदर्शन भी कर रही हैं।

आखिर रावण में ऐसा क्या था? रावण में कौन-कौन से गुण थे? तो सुनिये, रावण आयुर्वेद, तंत्र और ज्योतिष का महान ज्ञाता था। रावण अपने युग का प्रकांड पंडित ही नहीं, वैज्ञानिक भी था। इंद्रजाल जैसी अथर्ववेदमूलक विद्या का रावण ने कई अनुसंधान किये है। रावण का वैद्य सुषेण देवताओं के वैद्य अश्विनी और धन्वंतरि से योग्यता में किसी मायने में कम नहीं था। सुषेण वैद्य को देश-विदेश में पायी जाने वाली जीवनरक्षक औषधियों की जानकारी स्थान, गुण-धर्म आदि के अनुसार था। रावण की आज्ञा से ही सुषेण वैद्य ने मूर्छित लक्ष्मण की जान बचायी थी। रावण खुद आयुर्वेद का बहुत बड़ा ज्ञाता था।

कई भारतीय ग्रंथों में मिलता है रावण का उल्लेख

रावण के बारे में वाल्मीकि रामायण के अलावा पद्मपुराण, श्रीमद्भागवत पुराण, कूर्मपुराण, महाभारत, आनंद रामायण, दशावतारचरित आदि हिन्दू ग्रंथों के अलावा जैन ग्रंथों में भी उल्लेख मिलता है। शिव का परम भक्त, यम और सूर्य तक को अपना प्रताप झेलने के लिए विवश कर देने वाला, प्रकांड विद्वान रावण एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का मर्मज्ञ होने के साथ-साथ बहु-विद्याओं का जानकार था। रावण मायावी भी था। रावण को इंद्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और तरह-तरह के जादू का ज्ञान था।

रावण ने कई ग्रंथों की रचना की

कहा जाता है कि रावण ने कई शास्त्रों की रचना की थी, इनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

शिव तांडव स्तोत्र : रावण ने शिव तांडव स्तोत्र की रचना की थी। शिव तांडव स्तोत्र की रचना की पीछे एक कथा है। रावण कैलाश पर्वत को उठाकर लंका ले जाने चाहता था। यह सोचकर जब पूरे पर्वत को उठाकर लंका ले जाना चाहा तब भगवान शिव ने अपने अंगूठे से तनिक दबाव दिया तो कैलाश पर्वत जहां था वहीं अवस्थित हो गया। इससे रावण का हाथ दब गया और वह क्षमा याचना और स्तुति करने लगा। क्षमा याचना में की गयी स्तुति ही कालांतर में ‘शिव तांडव स्तोत्र’ कहलायी।

अरुण संहिता : मान्यता है कि अरुण संहिता का ज्ञान सूर्य के सारथी अरुण ने लंकाधिपति रावण को दिया था। यह ग्रंथ जन्म कुण्डली, हस्त रेखा तथा सामुद्रिक शास्त्र का मिश्रण है। संस्कृत के इस मूल ग्रंथ का अनुवाद कई भाषाओं में हो चुका है।

रावण संहिता : रावण संहिता जहां रावण के संपूर्ण जीवन के बारे में बताती है वहीं इसमें ज्योतिष की बेहतर जानकारियों का भंडार है।

चिकित्सा और तंत्र के क्षेत्र में रावण के चर्चित ग्रंथ- 1. दस शतकात्मक अर्कप्रकाश, 2. दस पटलात्मक उड्डीशतंत्र, 3. कुमारतंत्र और 4. नाड़ी परीक्षा। रावण के ये चारों ग्रंथ अद्भुत जानकारी से भरे हैं। रावण ने अंगूठे के मूल में चलने वाली धमनी को जीवन नाड़ी बताया है, जो सर्वांग-स्थिति व सुख-दु:ख को बताती है। रावण के अनुसार औरतों में वाम हाथ एवं पांव तथा पुरुषों में दक्षिण हाथ एवं पांव की नाड़ियों का परीक्षण करना चाहिए।

अन्य ग्रंथ : ऐसा कहते हैं कि रावण ने ही अंक प्रकाश, इंद्रजाल, कुमारतंत्र, प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर, ऋग्वेद भाष्य, रावणीयम, नाड़ी परीक्षा आदि पुस्तकों की रचना की थी। शिशु-स्वास्थ्य योजना का विचारक ‘अर्कप्रकाश’ को रावण ने मंदोदरी के प्रश्नों के उत्तर के रूप में लिखा है। इसमें गर्भस्थ शिशु को कष्ट, रोग, काल, राक्षस आदि व्याधियों से मुक्त रखने के उपाय बताए गए हैं। ‘कुमारतंत्र’ में मातृकाओं को पूजा आदि देकर घर-परिवार को स्वस्थ रखने का वर्णन है। इसमें चेचक, छोटी माता, बड़ी माता जैसी मातृ व्याधियों के लक्षण व बचाव के उपाय बताए गए हैं।

कहा यह भी जाता है कि भगवान शिव के आदेश पर अव्यवस्थिति वेदों को व्यवस्थित और उन्हें छंदबद्ध करने का काम रावण ने ही किया था।

रावण पर लिखी रचनाएं

पुराणों सहित इतिहास ग्रंथ वाल्मीकि रामायण और रामचरित रामायण में तो रावण का वर्णन मिलता ही है, किंतु आधुनिक काल में आचार्य चतुरसेन द्वारा रावण पर ‘वयम् रक्षामः’ नामक बहुचर्चित उपन्यास लिखा गया है। इसके अलावा पंडित मदनमोहन शर्मा शाही द्वारा तीन खंडों में ‘लंकेश्वर’ नामक उपन्यास भी पठनीय है।

यह भी पढ़ें: Ravan Dahan in Ranchi: दूसरी बार नहीं जलेगा रावण, 72 साल पुरानी है रांची में रावण दहन परम्परा

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