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Deoghar: रजत मुखर्जी ने 50 वर्षों में किया 50,000 डाक टिकटों का संग्रह, प्रकृति प्रेमी हैं, पक्षी भी पहचानते आवाज

देवघर के रजत मुखर्जी ने 50 वर्षों में किया 50,000 डाक टिकटों का संग्रह

देवघर से शैलेन्द्र मिश्रा/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

देवघर के एक शिक्षक की टिकट संग्रह करने की दीवानगी हैरान करती है। प्रकृति प्रेमी रजत मुखर्जी को पक्षियों के साथ समय बिताना भी अच्छा लगता है और टिकटों का संग्रह करना तो उनका शौक है। 64 साल के रजत मुखर्जी 50 वर्षों से डाक टिकटों का संग्रह कर रहे हैं और अब तो उनके डाक टिकटों का संग्रह 50,000 से अधिक का हो चुका है। 64 वर्षीय रजत मुखर्जी अपनी बहन के साथ मिलकर टिकटों का संग्रह करते हैं। दोनों निःस्वार्थभाव से समाज सेवा में भी करते हैं। दोनों साथ ही रहते हैं।

प्रकृति और पशु-पक्षियों से लगाव

भाई-बहन की यह जोड़ी प्रकृति प्रेमी है। इन्हें पशु-पक्षियों से बेहद लगाव है। टिकटों ही नहीं, नई-नई चीजों को संग्रह करना भी इन्हें अच्छा लगता है। रजत मुखर्जी बताते हैं कि जब वह छठी कक्षा में पढ़ते थे तब से ही उन्होंने टिकट संग्रह करना शुरू कर दिया था और आज जब 64 वर्षों की उम्र हो गयी है, यह शौक कम नहीं हुआ है। वह आज भी यह काम कर रहे हैं।

रजत मुखर्जी के एलबम में भारत और दूसरे देशों के भी टिकट

रजत मुखर्जी कहते हैं कि भारत सरकार का कोई भी ऐसा डाक टिकट नहीं होगा जो उनके संग्रह में उपलब्ध नहीं होगा। सभी टिकटों को उन्होंने अच्छे से एलबम में लगाकर रखा है। भारत के अलावा दूसरे देशों के टिकट भी उनके एलबम में हैं।

टिकटों के साथ सिक्के इकट्ठा करने का शौक

टिकटों के संग्रह के साथ रजत मुखर्जी ने सिक्कों का भी संग्रह कर रखा है। भारतीय सिक्कों के साथ, ब्रिटिश जमाने के सिक्कों एवं दूसरे देशों के कई सिक्कों का भी अच्छा-खासा संग्रह है।

निःस्वार्थ समाज सेवा और बच्चों को मुफ्त शिक्षा

टिकट संग्रह के अलावा निःस्वार्थ समाज सेवा में भी रजत गुप्ता अपनी बहन के साथ लगे हुए हैं। वह बच्चों को शिक्षा-दान भी देते हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए उनसे कोई शुल्क नहीं लेते। 64 वर्ष की उम्र होने के कारण अब उनकी आंखों से कम दिखाई देता है। फिर भी समाज सेवा के उनके जज्बे में कोई कमी नहीं आयी  है।

चित्रकला के भी हैं शौकीन

रजत मुखर्जी चित्रकला के भी शौकीन हैं। हालांकि आंखों की समस्या के कारण उनके इस शौक की गति धीमी हो गयी है। लेकिन चित्रकला में भी उनकी तूलिका ने बड़े कमाल किये हैं। लगभग 5,000 से ज्यादा चिड़ियों के स्क्रेच उन्होंने बनाये हैं और सभी को सजाकर रखा है।

पक्षी भी पहचानते हैं रजत मुखर्जी की आवाज

रजत मुखर्जी की पहचान एक कलाकार के रूप में तो है ही, लेकिन उनकी एक और पहचान सभी को अचम्भित करती है। चर्चा है कि पशु-पक्षी भी उन्हें आवाज से पहचानते हैं। जब वह पक्षियों को दाना देते हैं तो सभी उनकी आवाज सुनकर खिंचे चले आते हैं।

संगीत में भी है रुचि

रजत मुखर्जी का संगीत से भी लगाव है। काम की धुन में या खाली वक्त, वह संगीत की दुनिया में खोये रहते हैं। वह हमेशा कुछ न कुछ गुनगुनाते रहते हैं। रजत मुखर्जी कहते हैं उन्होंने अपना सारा जीवन निःस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करने में गुजार दिया। आगे भी अपनी सेवा का काम जारी रखेंगे। उनकी यही इच्छा शेष है कि अगर उनके कार्यों के साथ उनके संग्रह को सरकार से उचित सम्मान मिल जाये तो उन्हें बड़ी खुशी होगी।

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