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घबरायें नहीं, कृषि के लिए फायदेमंद है उत्तर-पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली बारिश, रबी के लिए है वरदान

western disturbances and crop

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

इस समय देश के उत्तरी भाग में पश्चिमी विक्षोभ या वेस्टर्न डिस्टर्बन्स सक्रिय है और कई राज्यों में इसके असर से बारिश भी हो रही है। झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश तक पश्चिमी विक्षोभ का असर दिख रहा है। दरअसल, भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी इलाकों में सर्दियों के मौसम में आने यह तूफान सक्रिय होता है जो वायुमंडल की ऊंची तहों में भूमध्य सागर, अन्ध महासागर और कुछ हद तक कैस्पियन सागर से नमी लाकर उसे अचानक वर्षा और बर्फ के रूप में भारत के उत्तरी भाग, पाकिस्तान व नेपाल पर गिरा देता है। भूमध्य सागर से लेकर भारत तक खाली मैदान और रेगिस्तान होने की वजह से हवा बिना किसी अवरोध के भारत के कई राज्यों तक पहुंच जाती है।

क्या पश्चिमी विक्षोभ नुकसानदेह है?

पश्चिमी विक्षोभ मौसम के हिसाब से पूरी तरह नुकसानदेह नहीं है। पश्चिमी विक्षोभ भारतीय उपमहाद्वीप के निचले क्षेत्रों में कम या बहुत अधिक बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में भारी हिमपात कराता है। पश्चिमी विक्षोभ की वजह से आकाश में बादल छाये रहते हैं। इस कारण रात का तापमान बढ़ जाता है, असमय वर्षा होती है। ठंड और बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हो जाता है।

पश्चिमी विक्षोभ के नुकसान

कभी-कभी पश्चिमी विक्षोभ के कारण बाढ़, बादल फटने, भूस्खलन, धूल भरी आंधी, ओलावृष्टि और ठंडी लहरों से नुकसान पहुंचाता है। यदि पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश अधिक होती है तो इससे फसल नष्ट हो जाती हैं, हिमस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं से जन-धन की हानि होती है। आजीविका का संकट भी उत्पन्न हो जाता है।

लाभ भी पहुंचाता है पश्चिम विक्षोभ

पश्चिम विक्षोभ से हुई बारिश उत्तर भारत में रबी की फसल के लिए, विशेषकर गेहूं के लिए वरदान है। इस समय खेतों में रबी की फसलें तैयार हो रही हैं। गेहूं की फसल के लिए इस समय होने वाली बारिश वरदान साबित हो सकती हैं। क्योंकि इसी वक्त गेहूं की फसलों को सिंचाई की जरूरत होती है। ऐसे में रिमझिम बारिश किसानों को इस समस्या से मुक्त तो करती ही है, साथ में ही गेहूं की बाली में पानी जाने के कारण यह बारिश का पानी खाद का काम करता है। जिसकी वजह से फसलों का बेहतर विकास होता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, रबी की फसलों पर यूरिया की पहली टॉप ड्रेसिंग के लिए यह बारिश बेहद फायदेमंद है। यूरिया की ड्रेसिंग से पहले किसानों को हल्की सिंचाई करनी पड़ती है, लेकिन अब किसानों को इसके लिए जद्दोहद नहीं करनी पड़ेगी।

राजस्थान में शीत ऋतु में उत्तर-पश्चिमी चक्रवातों में होने वाले वर्षा को स्थानीय भाषा में ‘मावट’ कहा जाता है। स्थानीय लोग इस वर्षा को गेहूं एवं अन्य शीतकालीन फसलों के लिए वरदान मानते हैं। इसका संबंध माघ महीने से है।

उत्तर-पश्चिमी विक्षोभ से पर्वतीय क्षेत्रों में हिमपात होता है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड राज्यों के लिए यह हिमपात लाभ पहुंचाने वाला होता है। क्योंकि हिमपात के कारण ही इन राज्यों मे पर्यटकों की भीड़ एकत्र होती है। यह अलग बात है कि पिछले दो वर्षों से कोरोना महामारी के कारण पर्यटन उद्योग ठप पड़ा हुआ है।

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