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Punjab Politics: किसान आंदोलन खत्म कराकर कैप्टन भाजपा के साथ काटेंगे ‘राजनीतिक फसल’?

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न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

पंजाब में राजनीति की एक नयी धुन सुनायी दे रही है। यह धुन कांग्रेस, अकाली दल और पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रही आप को कतई अच्छी नहीं लगेगी। कांग्रेस से अपमानित होकर निकाले गये पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) ने नयी पार्टी बनाने के संकेत दिये हैं। इसके साथ ही पंजाब में उनकी क्या नयी राजनीति होगी, इसके भी संकेत उन्होंने दे दिये हैं। कैप्टन अमरिन्दर सिंह नयी पार्टी बनाकर भाजपा के साथ एक नयी और बड़ी पारी खेलने की तैयारी कर रहे हैं। इस नये खेल में अभी बहुत कुछ सामने आना बाकी है, लेकिन जितनी भी बातें सामने आयी हैं, वह पंजाब में नये समीकरण के संकेत दे रही हैं।

बता दें, कांग्रेस से अलग होने के बाद कैप्टन अमरिन्दर सिंह गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) से दिल्ली में मिले थे, उस समय लोग यही कयास लगा रहे थे कि वह भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। मगर कैप्टन तब बात को टाल गये थे, फिर भी इतना तो अनुमान लग ही गया था कि कुछ बात तो है जो अभी सामने आनी बाकी है। बात अब बाहर आने लगी है। अब जब कैप्टन अमरिन्दर नयी पार्टी बनाने जा रहे हैं तो नयी बात भाजपा से ही जुड़ी हुई है।

किसान समस्या के निराकरण के बिना गठबंधन का कोई मतलब नहीं

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने जब भाजपा की ओर हाथ बढ़ाया होगा तब उन्होंने कुछ ऐसी शर्तें अवश्य रखी होंगी जो उनकी राजनीति के लिए खतरनाक हों। भाजपा से मेलजोल में कैप्टन की ओर से रखी गयी शर्तों में किसान आंदोलन (Farmers Protest) को समाप्त करना पहली शर्त होगी। भाजपा यह शर्त माने या न माने, लेकिन राजनीति की थोड़ी समझ रखने वाले इतना अवश्य जानते हैं कि इस आन्दोलन का अगर कोई समाधान नहीं निकला तो फिर कैप्टन की नयी पार्टी और भाजपा से गठजोड़ के कोई मायने नहीं होंगे। उल्टे कैप्टन अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी मार बैठेंगे। इसलिए यह समझा जा सकता है कि कैप्टन ने भाजपा से अंदरखाने में कुछ शर्तें जरूर रखी होंगी। भाजपा और कैप्टन की नयी पार्टी के अगर साथ आने की कोई गुंजाइश है तो ऐसे में बहुत संभव है कि पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले किसान आंदोलन को लेकर कोई बड़ा घटनाक्रम सामने आ सकता है। सूत्र भी यही बता रहे हैं कि अंदरखाने मोदी सरकार ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है।

कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही कर चुके हैं नये राजनीतिक इशारे

नयी पार्टी की घोषणा करते वक्त कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यह संकेत दे दिये थे कि अगर किसान आंदोलन का कोई सर्वमान्य हल निकलता है तो भाजपा संग गठबंधन से इनकार नहीं है। सूत्र बता रहे हैं कि कैप्टन के सुझावों पर केंद्र सरकार उनसे मशविरा कर अंदरखाने किसान आंदोलन खत्म कराने का प्रयास कर रही है।

भाजपा और कैप्टन की पार्टी का गठजोड़ तय करेगी भविष्य की राजनीति

इन संकेतों को देखें तो किसान आंदोलन पर भाजपा और कैप्टन की राजनीति टिकी हुई है। यदि किसान आंदोलन ऐसे ही जारी रहा तो कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए भाजपा के साथ जाना खतरनाक होगा। भाजपा का पंजाब में जैसा विरोध है, उसका खमियाजा सीधे तौर पर कैप्टन को भी भुगतना पड़ सकता है। ऐसे में यह भाजपा और कैप्टन दोनों के लिए फायदेमंद की स्थिति होगी कि पंजाब में चुनाव से पहले किसान आंदोलन का कोई समाधान निकल आये।

29 सितम्बर को अमित शाह से मिले थे कैप्टन अमरिंदर

कांग्रेस छोड़ने के बाद अमरिंदर सिंह ने 29 सितंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आवास पर पहुंचे थे। अमित शाह से करीब एक घंटे की मुलाकात में उनके भाजपा में शामिल होने के कयास तेज हो गये थे। मीडिया में कयास लगने लगे थे कि भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया जा सकता है या उनके कृषि मंत्री बनाने की संभावना जतायी जाने लगी थीं। लेकिन खुद कैप्टन ने इन कयासों के खारिज कर दिया था।

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