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Punjab Election: राहुल ने चन्नी को बना दिया पंजाब का सीएम चेहरा, अब क्या करेंगे बड़बोले सिद्धू

Channi has been made the CM face of Punjab, what will Sidhu do now?

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

पंजाब का सीएम बनने का सपना, आलाकमान को अपने इशारे पर नचाने का सपना सब धरा का धरा रह गया। पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू बहुत दिनों से पंजाब में जैसा चाह रहे थे, वैसा ही हो रहा था, इसलिए उनके पर कुछ ज्यादा ही निकल आये थे, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने उनका पर कतरना ज्यादा मुनासिब समझा। कांग्रेस आलाकमान ने चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब चुनाव में सीएम चेहरा घोषित कर सिद्धू की सारी हवा ही निकाल कर रख दी। सिद्धू ने खुद को सीएम उम्मीदवार बनवाने के लिए बहुत हाथ-पांव मारे। उन्होंने यहां तक साबित करने का प्रयास किया कि उनके अलावा पंजाब में कोई दूसरा सीएम का ‘योग्य’ उम्मीदवार नहीं है। पर उनका सारा पैंतरा बेकार गया और राहुल गांधी ने चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का सीएम उम्मीदवार घोषित कर दिया।

बता दें, आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने घोषणा की कि चरणजीत सिंह चन्नी कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। उन्होंने यह घोषणा रविवार को लुधियाना में एक वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए की। रैली का नाम था ‘आवाज पंजाब दी’। मंच से उन्होंने कहा, “एक गरीब परिवार से आने वाले सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ही आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए सीएम चेहरा होंगे।”

काम नहीं आया सिद्धू का तीखा तेवर

जैसे-जैसे पंजाब का चुनाव नजदीक आता जा रहा था और कांग्रेस आलाकमान पंजाब के लिए सीएम चेहरा घोषित नहीं कर रहा था, वैसे-वैसे सिद्धू के दिल की धड़कने बढ़ती जा रही थीं। लेकिन सिद्धू ने जैसे ही यह भापा कि आलाकमान कभी भी चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री चेहरा घोषित कर सकता है, कांग्रेस हाईकमान का रुख भांपते ही उनके तेवर कड़े हो गये। सिद्धू ने यह कहकर हाईकमान के फैसले के प्रति अपने तेवर स्पष्ट कर दिए कि ‘शीर्ष पर बैठे लोग’ (हाईकमान) एक कमजोर मुख्यमंत्री चाहते हैं, जो उनके इशारे पर नाचता रहे। सिद्धू का इशारा चरणजीत सिंह चन्नी ओर था। उनका कहना था कि एक अच्छे मुख्यमंत्री का चुनाव करना केवल पंजाब के मतदाताओं के हाथ में है। नया पंजाब बनाना सीएम के हाथ में है। लेकिन ऊपर वालों को एक कमजोर सीएम चाहिए, जो उनकी धुन पर नाच सके। यहां सिद्धू की अकलमंदी देखिये, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चुनना मतदाताओं का काम है, ऐसा कभी होता है। कोई पार्टी मुख्यमंत्री पद का सिर्फ चेहरा तय करती है, वह चेहरा पसंद है या नहीं, जनता अपना वोट देकर अपनी राय भर देती है। फिर भी जनता यह नहीं बताती कि मुख्यमंत्री यही बनेगा। यह पार्टियों का अपना राजनीतिक एजेंडा होता है।

अब क्या करेंगे सिद्धू?

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सिद्धू का अगला रुख क्या होगा। वह एक बार फिर ‘अबहीं लोट जइहौं धरणी पर’ वाली मुद्रा में आ जायेंगे या इस्तीफा देकर पार्टी से खुद को दरकिनार कर लेंगे। ऐन चुनाव के पहले उनके पार्टी छोड़ने का मतलब तो नजर नहीं आता। चूंकि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा कुछ ज्यादा ही बढ़ गयी हैं, इसलिए ऐसा कर वह अपने पैर पर कुल्हाड़ी नहीं मार सकते। हां, वह राजनीति छोड़ने का इरादा कर लें, तो बात अलग है। उनके सामने एक विकल्प यह भी है कि वह अपने पुराने प्रोफेशन में लौट जायें। लेकिन वहां पर भी सीट फुल है।

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