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Punjab: कैप्टन की नयी पार्टी तैयार, क्या भाजपा की लग जायेगी नैया पार? बनेगी बीजेपी की बी टीम?

Caption Amrinder Singh New Party

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नयी पार्टी का ऐलान कर दिया है। हालांकि अभी पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न तय नहीं किया गया है। कैप्टन की नयी पार्टी की घोषणा के बाद राजनीतिक हलचल भी तेज हो गयी है। अमरिंदर की ‘कैप्टन पारी’ दूसरी पार्टियों की बेचैनी बढ़ाने वाली है। हालांकि भाजपा इससे मन ही मन खुश हो रही होगी, लेकिन इसके लिए उसे कुर्बानी देनी पड़ेगी। और इस कुर्बानी के लिए वह कितनी तैयार होगी, यह तो समय बतायेगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैप्टन ने नयी पार्टी की घोषणा की

चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैप्टन ने यह बड़ा खुलासा किया कि वह एक पार्टी बना रहे हैं। पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न क्या होगा, इसके बारे में उन्होंने कहा कि ये सब अभी तय नहीं किया गया है। बता दें, कैप्टन ने पिछले हफ्ते ही कहा था कि वह जल्द ही अपनी नयी पार्टी का ऐलान करेंगे और अगर तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों के हित में कुछ समाधान निकलता है तो वह भारतीय जनता पार्टी के साथ 2022 के चुनाव में सीटों के समझौते के लिए भी तैयार होंगे।

जहां से भी लड़ें नवजोत सिंह सिद्धू, उनके खिलाफ लगेंगे

जिस नवजोत सिद्धू के कारण उन्हें कांग्रेस से दरबदर कर दिया गया था उस सिद्धू को वह कैप्टन पंजाब की राजनीति में देखना नहीं चाहतें। उन्होंने प्रेस कॉनफ्रेंस में स्पष्ट कहा कि जहां तक नवजोत सिंह सिद्धू की बात है, वो जहां से भी लड़ेंगे, हम उनसे लड़ेंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आगे बताया, ‘समय आने पर हम सभी 117 सीटों पर लड़ेंगे, चाहे समायोजन सीटों के साथ चुनाव लड़ें या अपने दम पर चुनाव लड़ें।‘

घोषणा-पत्र दिखाकर कहा- 9.5 साल इसी के अनुसार काम किया

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कागज दिखाते हुए कहा, “यह हमारा घोषणापत्र है जब मैंने पदभार संभाला था। हमने जो हासिल किया है उसका यह हमारा घोषणापत्र है।” उन्होंने कहा कि मैं 9.5 साल तक पंजाब का गृहमंत्री रहा। कोई जो 1 महीने से गृहमंत्री रहा है, ऐसा लगता है कि वह मुझसे ज्यादा जानता है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, “कोई भी परेशान पंजाब नहीं चाहता। हमें समझना चाहिए कि हम पंजाब में बहुत मुश्किल दौर से गुजरे हैं।”

कृषि कानूनों पर कल गृहमंत्री से करेंगे मुलाकात

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चंडीगढ़ में कहा कि वे सुरक्षा उपायों को लेकर मेरा मजाक उड़ाते हैं। मेरी बेसिक ट्रेनिंग एक सैनिक की है. मैं 10 साल तक सेवा में रहा हूं इसलिए मुझे मूल बातें पता हैं। केंद्र के तीन कृषि कानूनों को लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि कल हम लगभग 25-30 लोगों को अपने साथ ले जा रहे हैं और हम इस मुद्दे पर गृहमंत्री से मिलेंगे।

पंजाब में अमरिंदर की पार्टी बनेगी भाजपा की बी टीम!

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नयी पार्टी बना तो ली है, लेकिन वर्तमान राजनीति में अकेले दम पर जगह बनाना आसान नहीं होगा। उन्हें एक साथी की जरूरत होगी जिसके सहारे वह पंजाब में अपनी जमीन तलाश सकें। उनका मुख्य मुकाबला कांग्रेस पार्टी से ही होना है। अभी कांग्रेस वहां इस समय सत्ता में है। फिर ‘आप’ ने पंजाब में एक अच्छा जनाधार तैयार कर लिया है और शिरोमणि अकाली दल अपनी शर्तों पर ही गठबंधन को तैयार होगा। इन दोनों पार्टियों से कैप्टन की नहीं बन सकती, क्योंकि दोनों जगह किसी के अंदर रहकर वह राजनीति नहीं कर पायेंगे। अगर ऐसा ही करना था तो फिर पार्टी बनाने के बजाय किसी पार्टी में शामिल हो जाते। चूंकि भाजपा की स्थिति पंजाब में दयनीय है और उसमें बड़े नेता का अभाव भी है। तो यही पार्टी कैप्टन के खांचे से फिट बैठेगी। लेकिन कृषि कानूनों की मांग को लेकर चला रहा किसान आन्दोलन इस गठजोड़ के आड़े आयेगा। भाजपा ने अगर अपनी हठधर्मिता छोड़ कर किसान आन्दोलन का हल निकाल लिया तो भी दोनों पार्टियों का मेल-मिलाप तय है। फिर भाजपा और कैप्टन की पार्टी मिल कर बड़ी पारी खेल सकती हैं, ऐसा अनुमान है। तब नवजोत सिंह सिद्धू की हठधर्मिता के आगे ‘घुटने टेकने वाली’ कांग्रेस के लिए यह अपने पांव पर कुल्हाड़ी सिद्ध हो जायेगा।

भाजपा से कैप्टन की बन सकती है और कैप्टन भाजपा की जरूरत

पंजाब में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर दिया है। पंजाब विधानसभा चुनाव में पांच महीने बाकी हैं। ऐसे में सिर्फ बीजेपी को ही नहीं, बल्कि कैप्टन को भी बीजेपी की जरूरत है। इस समय कैप्टन के पास ज्यादा विकल्प नहीं है। अकाली दल के अलग होने के बाद पंजाब में भाजपा के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है, जिसके दम पर बीजेपी सत्ता में आ सके। बीजेपी यहां लीडर के रूप में तो नहीं होगी, लेकिन कैप्टन का साथ मिलने से उसे एक बड़ा माइलेज जरूर मिल जायेगा। अकाली दल से अलग होने के बाद फिलहाल बीजेपी के लिए कैप्टन ही विकल्प हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें: Bihar Politics : बिहार के सियासी पिच पर क्या लालू ला पाएंगे हरियाली?

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