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महिलाओं के विवाह की कानूनी उम्र 21 वर्ष करने का प्रस्ताव, नारी सम्मान भी, जनसंख्या नियंत्रण भी

Marriage in 21 years

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

महिलाओं के विवाह की उम्र सीमा 21 वर्ष करने का प्रस्ताव नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है। बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महिलाओं के लिए विवाह की कानूनी आयु 18 से 21 वर्ष तक बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया है। बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में भी इसकी घोषणा की थी। केन्द्र सरकार का यह प्रयास एक ओर जहां नारी सम्मान का बड़ा कदम है, वहीं जनसंख्या नियंत्रण की ओर भी एक बड़ा प्रयास कहा जा सकता है। इस प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है अब केन्द्र सरकार बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 में एक संशोधन पेश करेगी और इसके परिणामस्वरूप विशेष विवाह अधिनियम और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 जैसे व्यक्तिगत कानूनों में संशोधन करने का काम करेगी।

महिलाओं का होगा सशक्तीकरण, जनसंख्या नियंत्रण भी होगा

महिलाओं के विवाह की केन्द्र सरकार जो उम्र सीमा तय करने जा रही है, उसके दूरगामी परिणाम सामने आयेंगे। सबसे पहले तो यह महिलाओं के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने का सच्चा प्रयास है। देश में महिलाओं को झेलने वाली कई दुश्वारियों पर चिंता पहले भी की जाती रही है, लेकिन महिलाओं को उनकी समस्याओं से निजात दिलाने का  प्रयास कभी नहीं किया गया। कम उम्र में विवाह के कारण महिलाओं को होने वाली कठिनाइयों को कभी नहीं समझा गया। कम उम्र में विवाह से महिलाओं का जल्दी मां बन जाना, कम उम्र में मां बन जाने से कई बीमारियों से ग्रसित हो जाना, यहां तक कि मौत तक हो जाना आदि समस्याएं समाज में विद्यमान हैं। ये समस्याएं कम उम्र में शारीरिक रूप से परिपक्व नहीं हो पाने की वजह से होती हैं। अब कम से कम एक हद तक इस पर नियंत्रण तो लग पायेगा। हालांकि राजस्थान जैसे राज्यों इस मार्ग में रोड़ा हैं। जहां बाल विवाह समाज की जड़ में घुसा हुआ है, वहां से इसे समाप्त करना बहुत बड़ी चुनौती होगी।

कैबिनेट में पारित प्रस्ताव जनसंख्या नियंत्रण का भी एक बड़ा उपाय माना जा सकता है। परिपक्व उम्र होने के बाद युवा सामाजिकता को भी अच्छी तरह से समझने लगते हैं। परिवार नियंत्रण की आवश्यकता उन्हें समझ आने लगती है। जो कम उम्र के युवाओं को समझ नहीं आती है। कम उम्र में बेवजह परिवार बढ़ा लेते हैं और बाद में पछताते रहते हैं। जाहिर है परिपक्व उम्र में विवाह जनसंख्या नियंत्रण की राह खुद ही आसान करता जायेगा। हां, अब पुरुषों के विवाह की उम्र 25 वर्ष करने की आवश्यकता है। 25 वर्ष तो वैसे भी भारतीय समाज में गृहस्थ आश्रम में प्रवेश की उम्र है।

जया जेटली की सिफारिशों पर आधारित है प्रस्ताव

बुधवार को कैबिनेट में जिस प्रस्ताव को मंजूदी दी गयी वह दिसंबर 2020 में जया जेटली की अध्यक्षता वाली केंद्र की टास्क फोर्स द्वारा नीति आयोग को सौंपी गई सिफारिशों पर आधारित हैं। जया जेटली ने अपनी सिफारिशों में ‘मातृत्व की उम्र से संबंधित मामलों के साथ मातृ-मृत्यु-दर को कम करने की आवश्यकता और पोषण में सुधार से संबंधित मामलों की जांच का जिक्र किया था।

जया जेटली ने अपनी सिफारिशों में था- ‘मैं स्पष्ट करना चाहती हूं कि सिफारिश के पीछे हमारा तर्क कभी भी जनसंख्या नियंत्रण का नहीं था। NFHS 5 (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण) द्वारा जारी हालिया आंकड़ों ने पहले ही संकेत दिए हैं कि कुल प्रजनन दर घट रही है और जनसंख्या नियंत्रण में है। इस विचार के पीछे महिलाओं के सशक्तीकरण का विचार है। NFHS 5 के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने पहली बार 2.0 की कुल प्रजनन दर प्राप्त की, जो टीएफआर के रिप्लेसमेंट लेवल से 2.1 से नीचे है। यह दिखाता है कि आने वाले वर्षों में जनसंख्या विस्फोट की संभावना नहीं है।

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