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Jharkhand: सहाराश्री सुब्रत रॉय की बढ़ेंगी मुश्किलें! रांची के डोरंडा थाने में निवेशकों ने दायर की FIR

Problems will increase for Saharashree Subrata Roy, investors filed FIR in Ranchi's Doranda police station

‘सहारा’ ने झारखंड के 2.5 लाख निवेशकों को छोड़ा बेसहारा

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

सहारा इंडिया कंपनी में लाखों लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई लगायी है, लेकिन इन सभी के पैसे कम्पनी में फंसे पड़े हैं। निवेशकों के पैसे लौटा देने की शर्त पर भले 6 साल से सहाराश्री सुब्रत रॉय पेरौल पर हैं, लेकिन निवेशकों को उनके पैसे वापस नहीं मिल रहे हैं। अब तो निवेशकों के सब्र का बांध टूट रहा है। रांची के निवेशकों ने सहाराश्री सुब्रत रॉय के खिलाफ रांची के डोरंडा थाने में एक सामूहिक एफआईआर दर्ज करायी है। क्योंकि अब तो उनकी उम्मीद अदालत ही बची है। बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट निवेशकों के पैसे लौटाने का आदेश जारी किया था, इसी शर्त पर सुब्रत रॉय पैरोल पर हैं।  निवेशकों से धोखाधड़ी के आरोप में सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2016 से जेल से बाहर हैं।

केन्द्र सरकार द्वारा इस मामले की जांच भी करायी गयी थी। जांच एजेंसियों ने जांच में पाया कि सहारा इंडिया कामर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड, सहारा इंडिया फाइनेंशियल कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने हाई रिटर्न का लालच देकर निवेशकों से क्रमश: 14,100 करोड़, 17500 करोड़ और 19,400 करोड़ रुपये जुटाए थे। यानी विभिन्न स्कीमों के जरिए निवेशकों से करीब 50,000 करोड़ रुपये जुटाए गए।

झारखंड के ढाई लाख लोगों के फंसे हैं तीन हजार करोड़

झारखंड के ढाई लाख से भी ज्यादा लोगों ने सहारा की विभिन्न स्कीमों में पैसे निवेश किये है। एक अनुमान है कि इन लोगों के तीन हजार करोड़ रुपये सहारा इंडिया की विभिन्न योजनाओं में फंसे हुए हैं। जमा योजनाओं की पॉलिसी परिपक्व हो चुकी है, फिर भी उनका  भुगतान दो वर्षों से बंद है। राज्य के अलग-अलग इलाकों में स्थित सहारा के दफ्तरों में हर रोज बड़ी तादाद लोग पैसों के भुगतान की मांग को लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें मायूस होना पड़ रहा है। राज्य के कई जिलों में सहारा के दफ्तरों के बाहर निवेशकों का प्रदर्शन भी हो रहा है। लेकिन इन शाखाओं के प्रबंधक और कर्मी जवाब देने में असमर्थ हैं। अब तो सहारा कंपनी के कर्मचारी भी इन प्रदर्शनों से परेशान हो चुके हैं। लेकिन निवेशक भी क्या करें? उनकी विवशता यह है कि उन्होंने पाई-पाई जोड़ कर अपने जीवन की गाढ़ी कमाई सहारा कम्पनी की स्कीमों में लगाये हैं। लेकिन पैसे वापस नहीं मिलने से उनकी भविष्य की योजनाएं धूमिल होने लगी हैं। किसी के बच्चे की पढ़ाई पर संकट आ गया है तो किसी को अपने बच्चों की शादी करनी है, इलाज जैसी आवश्यकता भी गाहे-बगाहे आती ही रहती है, लेकिन पैसे नहीं रहने से इनकी मुश्किलें दोगुनी हो चुकी हैं।

देशभर में 13 करोड़ निवेशकों के 1.12 लाख करोड़ अटके

अगस्त महीने में सरकार ने लोकसभा में यह जानकारी दी थी कि सहारा इंडिया में पैसा लगाने वालों की संख्या करोड़ों में है। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया था कि सहारा समूह की विभिन्न इकाइयों में करीब 13 करोड़ निवेशकों के 1.12 लाख करोड़ रुपये के फंसे हुए हैं।

झारखंड विधानसभा में भी उठा मामला

सहारा के साथ दूसरी नॉन बैंकिंग कम्पनियों का मामला झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में उठ चुका है। हटिया विधायक नवीन जायसवाल ने नॉन-बैंकिंग कंपनियों में झारखंड के लोगों के लगभग 2500 करोड़ फंसे होने का मामला उठाया था। तब सरकार ने कहा था कि नॉनबैंकिंग कंपनियों की वादाखिलाफी और शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया जा रहा है। वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने भी कहा कि वित्त विभाग इन शिकायतों के आधार पर सीआईडी (आर्थिक अपराध शाखा, झारखंड) के साथ मिलकर जांच में मदद करेगा। यह सरकारी मदद भी फिलहाल नाकाफी है।

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