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President Election: विपक्ष के राष्ट्रपति कैंडिडेट देने के रास्ते में मुश्किलें बड़ी, विपक्ष परेशान, भाजपा इत्मीनान

Presidential Election: Difficulties in the way of giving Presidential candidate of the Opposition

आदिवासी राष्ट्रपति कैंडिडेट देकर विपक्ष को भेदेगी भाजपा

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का विपक्ष का राष्ट्रपति कैंडिडेट देने का विसमिल्लाह ही खराब हो गया है। ममता बनर्जी को बहुत उम्मीदें थीं कि राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने के लिए राजी हो जायेंगे। लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर ममता बनर्जी के साथ विपक्ष को बहुत बड़ा झटका दे दिया है। शरद पवार ऐसा नाम हैं जिन पर विपक्ष की तमाम पार्टियां एकमत हो सकती हैं। ममता बनर्जी ने भाजपा से उनकी ही पार्टी में आये दिग्गज नेता यशवंत सिन्हा की ओर नजरें कीं, लेकिन यशवंत सिन्हा की अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा है, इसलिए उनका भी पार्टी प्रमुख के प्रस्ताव से सहमत होना मुश्किल है। ममता बनर्जी के जेहन में कुछ और नाम हो सकते हैं, लेकिन अब इसका खुलासा आज होने वाली बैठक के बाद ही हो पायेगा। ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति चुनाव पर आमराय बनाने के लिए विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है। दोपहर 3 बजे दिल्ली के कॉन्सटीट्यूशन क्लब में होगी। यह बैठक सफल होगी इसमें संदेह है। बैठक से पहले ओडिशा की बीजेडी और आंध्र प्रदेश की वाईएसआरसीपी ने ममता बनर्जी की आहूत बैठक में शामिल होने से मना कर दिया है। भाजपा को उम्मीद है ये दोनों पार्टियां एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार को समर्थन देंगी।

कांग्रेस है खफा, वाम दल बेमन से होंगे शामिल

बैठक से पहले ही टीएमसी से कांग्रेस और सीपीएम दोनों खफा हुए बैठे हैं। कांग्रेस टीएमसी से खफा है, क्योंकि जब राहुल गांधी की ईडी में पेशी हुई तब टीएमसी की ओर से तंज कसा गया था। वहीं, कम्युनिस्ट पार्टियों सीपीएम और सीपीआई के शीर्ष नेतृत्व ने भी बैठक में शामिल न होने की बात कह दी है। हां, दोनों दल अपने सांसदों को बैठक में भेजेंगे। ममता ने 22 विपक्षी दलों के नेताओं को चिट्ठी लिखकर बैठक के लिए न्योता दिया था। अब देखना है कि कितनी पार्टियां इस बैठक में शामिल हो पाती है।

भाजपा का पलड़ा भारी, शुरू कर चुकी है तैयारी

विपक्ष जहां अपने राष्ट्रपति कैंडिडेट और पार्टियों के समर्थन को लेकर परेशान है, वहीं सत्ताधारी बीजेपी इत्मीनान है। भाजपा ने ने सिर्फ अपनी चालें चलनी शुरू कर दी हैं, बल्कि दूसरे दलों को सहमत करने के लिए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को जिम्मेदारी सौंप दी है। विपक्षी दलों से अगर आमराय नहीं भी बनती है तब भी उसे कोई दिक्कत नहीं होगी। आंध्र प्रदेश की वाईएसआरसीपी और ओडिशा की बीजेडी की मदद से बीजेपी आसानी से अपना राष्ट्रपति बना लेगी। कुल मिलाकर फिलहाल बीजेपी के पक्ष में पलड़ा झुका हुआ दिख रहा है। यानी भाजपा जिसे भी अपना उम्मीदवार घोषित करेगी वह आसानी से राष्ट्रपति का चुनाव जीत जाएगा।

क्या आदिवासी होगा एनडीए का राष्ट्रपति उम्मीदवार?

भाजपा ने अभी तक राष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। चूंकि पीएम मोदी का स्टाइल हमेशा से चौंकाने वाला होता है, इसलिए लोग यह उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार का राष्ट्रपति उम्मीदवार का नाम भी चौंकाने वाला होगा। ज्ञात हो, 2017 में भी बिहार के राजभवन से रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाकर मोदी ने सबको चौंकाया था। दलित उम्मीदवार देकर भाजपा ने पांच वर्ष पहले विपक्षी दलों की एकता में सेंध तो लगायी ही, देश के दलितों को भी एक संदेश देने की कोशिश की, जिसका लाभ भाजपा को उसके बाद के चुनावों में भी मिला।

आजादी के अमृत महोत्सव के इस दौरे में कयास लगाये जा रहे हैं कि भाजपा एक आदिवासी को उम्मीदवार बना सकती है। भाजपा की उम्मीदवार एक आदिवासी महिला भी हो सकती है। अगर भाजपा ने किसी आदिवासी नेता को उम्मीदवार बनाया तो झारखंड में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चला रहे हेमंत सोरेन समेत अन्य दलों के लिए भी राजनीतिक दुविधा की स्थिति पैदा हो सकती है। भाजपा का राष्ट्रपति उम्मीदवार अगर आदिवासी होगा तो यह नाम कौन हो सकता है। कहीं यह नाम खूंटी के पूर्व सांसद कड़िया मुंडा तो नहीं, या झारखंड की राज्यपाल रह चुकी द्रौपदी मुर्मू। अर्जुन मुंडा का भी नाम बीच में राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए उठ चुका है। अभी तो यह अटकलें हैं, यह नाम जिसका भी होगा, चौंकाने वाला होगा।

यह भी पढ़ें: Bihar: जदयू ने आरसीपी सिंह के करीबियों को दिखाया पार्टी से बाहर का रास्ता, लिस्ट में पार्टी प्रवक्ता और प्रदेश महासचिव भी

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