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Jharkhand में चल रहीं पंचायत चुनाव की तैयारियां, जानिये कितने बैलेट बॉक्स लेंगेगे चार चरण का चुनाव कराने में

Jharkhand Panchayat Election

Jharkhand Panchayat Chunav: झारखंड में तीसरे पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी गयी है। इससे पहले 32 वर्षों के लम्बे जद्दोजहद के बाद 2010 में झारखंड में पहला पंचायत चुनाव कराया गया था। दूसरा पंचायत चुनाव 2015 में कराया गया था। लेकिन कोरोना काल के कारण 2020 में कराये जाने वाले पंचायत चुनाव टलते हुए 2022 में कराया जा रहा है। झारखंड पंचायत राज्य विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गयी है। अब इंतजार है उस पर राज्यपाल की स्वीकृति का। राज्यपाल रमेश बैस की स्वीकृति मिलते ही कभी भी पंचायत चुनाव की तिथियों की घोषणा कर दी जायेगी। दो साल से टल रहे पंचायत चुनाव को कराने के लिए चुनाव आयोग भी पूरी तरह से तैयार है। इस बार झारखंड के 4,345 ग्राम पंचायतों में पंचायत चुनाव मई महीने में होगा, वहीं मतगणना जून में की जाएगी। पंचायत चुनाव ईवीएम से न कराकर बैलेट पेपर से कराये जायेंगे। चूंकि झारखंड के पास अपेक्षित मतपेटियां नहीं हैं, इसलिए पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से 46,000 मतपेटियां मंगाई गई हैं। हालांकि इतनी मतपेटियों से झारखंड का काम नहीं चलेगा।

चुनाव आयोग द्वारा 53,480 बूथ निर्धारित किये गये हैं। इन सभी बूथों पर मतदान के लिए 1.38 लाख मतपेटियों की आवश्यकता होगी। झारखंड पंचायत चुनाव 2022 झारखंड के अलग-अलग जिलों में चार चरणों में होगा। चारों चरण का मतदान कार्य मई महीने में पूरा कर लिया जाएगा। जून में मतगणना और परिणाम की घोषणा कर दी जायेगी। राज्य में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कुल 2,44,73,937 वोटर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे जिनमें 1,26,13,219 पुरुष और 1,18,60,442 महिला और 276 थर्ड जेंडर हैं। वहीं 3,95,798 युवा वोटर पंचायत चुनाव में भाग लेंगे।

त्रिस्तरीय चुनाव के कारण ज्यादा मतपेटियों की जरूरत

पंचायत चुनाव चूंकि त्रिस्तरीय होते हैं इसलिए मतपेटियों की संख्या भी अधिक हो जाती है। जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, मुखिया और वार्ड सदस्य इन सबके लिए अलग-अलग बैलेट पेपर दिये जाते हैं और मतपेटियां भी अलग-अलग होती है। यानी एक मतदान केन्द्र पर एक मतदाता चार वोट देता है। मुखिया, ग्राम पंचायतों के वार्ड सदस्य, पंचायत समिति के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों के सदस्य और जिला परिषद के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों के सदस्यों की सभी संख्या मिलाकर 63,701 जनप्रतिनिधियों का चुनाव मतपत्रों के जरिये होगा। इसके लिए चुनाव आयोग ने राज्यभर में 53,480 मतदान केंद्र तैयार किये हैं। इन मतदान केंद्रों में 1.38 लाख मतपेटियों की जरूरत होगी।

क्या है स्थानीय ग्रामीण स्वशासन?

पंचायती राज व्यवस्था, ग्रामीण भारत की स्थानीय स्वशासन की प्रणाली है। जिस तरह से नगरपालिकाओं तथा उपनगरपालिकाओं के द्वारा शहरी क्षेत्रों का स्वशासन चलता है, उसी प्रकार पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों का स्वशासन चलता है। पंचायती राज संस्थाएं तीन हैं, जिसे त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था कहते हैं-

  1. ग्राम के स्तर पर ग्राम पंचायत
  2. ब्लॉक (तालुका) स्तर पर पंचायत समिति
  3. जिला स्तर पर जिला परिषद

इन संस्थाओं का काम ग्राम का आर्थिक विकास करना, सामाजिक न्याय को मजबूत करना तथा राज्य सरकार और केन्द्र सरकार की योजनाओं को लागू करना है। भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था आस्तित्व में रही हैं। आधुनिक भारत में प्रथम बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा राजस्थान के नागौर जिले के बगधरी गांव में 2 अक्टूबर, 1959 को पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई।

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Jharkhand Panchayat Chunav

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