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जन सुराज पदयात्रा पर निकले Prashant Kishor, राजनीतिक दलों में बढ़ी बेचैनी

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गांधी जयंती पर प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने अपनी 3500 किलोमीटर की जन सुराज पदयात्रा की  शुरुआत की. प्रशांत किशोर ने अपने जन सुराज अभियान के तहत महात्मा गांधी की जयंती पर पश्चिम चंपारण जिले से बिहार में 3500 किलोमीटर की ‘‘पदयात्रा” का आरंभ किया. प्रशांत किशोर की यह यात्रा 12 से 18 महीनों तक चलेगी. इसके बाद उनके व्यापक रूप से राजनीति के क्षेत्र में नए सिरे से कदम रखने की संभावना व्यक्त की जा रही है.

3500 किमी पैदल चलेंगे

बिहार की राजनीति को नई दिशा देने के लिए चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) गांधी जयंती के मौके पर पद यात्रा पर निकल रहे हैं और लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान की शुरुआत कर रहे हैं. जन सुराज अभियान के तहत प्रशांत किशोर 2 अक्तूबर से पदयात्रा की शुरूआत इसी दिशा में एक कदम है . यह पद यात्रा बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के भितिहरवा गांधी आश्रम से शुरू होगी. प्रेस रिलीज जारी कर प्रशांत किशोर ने कहा कि इस पदयात्रा के माध्यम से वो लगभग 3500 किमी पैदल चलेंगे, बिहार के हर पंचायत और प्रखंड में पहुंचने का प्रयास करेंगे.

बिहार के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए पदयात्रा 

बताया जाता है कि प्रशांत किशोर अगले डेढ़ साल में पदयात्रा के जरिए राज्य में 3500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करेंगे. प्रशांत किशोर का कहना है कि उनकी यह पदयात्रा बिहार के लोगों और वहां के बच्चों के बेहतर भविष्य और नए बिहार के निर्माण के लिए है.

बिहार के राजनीतिक दलों में बढ़ी बेचैनी

प्रशांत किशोर के प्रस्तावित यात्रा को लेकर बिहार के राजनीतिक दलों में बेचैनी है. राजनीतिक दल प्रशांत किशोर को नजरंदाज कर रहे हैं. जनता दल यूनाइटेड ने प्रशांत किशोर को भाजपा की बी टीम बताया है, वहीँ राजद और भाजपा ने प्रशांत किशोर को बिहार की राजनीति में गैर महत्वपूर्ण बताया है. दरअसल प्रशांत किशोर के निशाने पर लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के शासनकाल का 30 साल है. इन 30 साल के दौरान बिहार को क्या हासिल हुआ, उसे जनता के सामने रखेंगे.

क्या हैं राजनीतिक मायने

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नीतीश कुमार का विपक्षी दलों को जोड़ो यात्रा के बीच चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जनसुरक्षा यात्रा के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर भले ही अपने पत्ते नहीं खोल रहे हो, लेकिन उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा है. फिलहाल वह पद यात्रा के जरिए लोगों को जागरूक करेंगे. 30 साल के दौरान बिहार में क्या कुछ हुआ और क्या नहीं हो सका. इसे लेकर वह जनता के सामने जाएंगे. 2024 चुनाव से पहले वह अपने पत्ते खोलें ऐसी सम्भावना जताई जा रही है.

प्रशांत किशोर पर कटाक्ष करती रही भाजपा 

चुनावी रणनीतिकार के तौर पर देखे जाने वाले प्रशांत किशोर को एक व्यापारी बता चुकी है। भाजपा उनके बारे में कह चुकी है कि प्रशांत किशोर की दुकान भी बंद होने की कगार पर है लिहाजा उन्होंने भी एक पार्टी का गठन करने का फैसला लिया, जिसके लिए वह पदयात्रा निकाल रहे हैं।

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