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अपनी पहचान की तलाश में झारखंड के दो माननीय, पार्टी में भी रहकर बेगाने प्रदीप यादव और बंधु तिर्की

pradeep yadav bandhu tirkey

झारखंड सरकार में शामिल कांग्रेस के दो विधायकों प्रदीप यादव(Pradeep Yadav) और बंधु तिर्की(Bandhu Tirkey) के सब्र का बांध अब टूटता जा रहा है। दोनों विधायक कांग्रेस पार्टी में तो हैं, पार्टी सरकार में भी है, लेकिन दोनों माननीयों की विवशता यह है कि पार्टी में उन्हें तरजीह नहीं मिल रही  है। अपनी समस्याओं को लेकर कांग्रेस के 6 विधायकों ने दिल्ली में आलाकमान के दरबार में हाजिरी लगायी है। इन विधायकों में झाविमो से कांग्रेस में आये दोनों विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की भी हैं।

दिल्ली प्रवास के दौरान इसी मुद्दे पर कांग्रेस विधायक बंधु तिर्की और प्रदीप यादव ने आज कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल राव से मुलाकात कर अपनी बातों को रखा। नेता द्वय इससे पहले कांग्रेस प्रवक्ता राजीव रंजन से भी मुलाकात कर अपनी बात रख चुके हैं, लेकिन बात नहीं बनी। झाविमो से दल-बदल कर कांग्रेस में आना दोनों नेताओं के लिए परेशानी का सबब है।

सब्र का बाध टूटता जा रहा दोनों नेताओं का

प्रदीप यादव और बंधु तिर्की कांग्रेस पार्टी को अब लगने लगा है कि पार्टी में उन्हें वह तरजीह मिल रही जो उन्हें मिलनी चाहिए। दल-बदल कर आने के बाद कांग्रेस विधायक के रूप में दोनों को अब तक मान्यता नहीं मिली है। प्रदीप यादव और बंधु तिर्की झाविमो से कांग्रेस में आये थे, लेकिन इनकी पार्टी का विलय कानूनी पचड़े में फंस गया है। मामला विधानसभा न्यायाधिकरण में अब तक लंबित है।

विधानसभा में पार्टी विधायक के रूप में मान्यता नहीं मिल पाने की वजह यही है। लिहाजा दोनों नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बतौर पार्टी विधायक मान्यता नहीं से वे काफी गुस्से में हैं। बंधु तिर्की यह भी कह रहे हैं क उनका और विधायक प्रदीप यादव का मामला संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल का नहीं है। अब तो दोनों नेता कह रहे हैं कि उन्हें कांग्रेस में विधायक के तौर पर मान्यता नहीं मिलती है तो इस्तीफा देकर वे फिर से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

विधानसभा में निर्दलीय विधायक के रूप में है मान्यता

गौरतलब है कि मांडर विधायक बंधु तिर्की और पोड़ैयाहाट के विधायक प्रदीप यादव झाविमो से कांग्रेस में शामिल हुए थे। विधानसभा में उन्होंने निर्दलीय विधायक के तौर पर मान्यता प्राप्‍त है। दोनों नेता अब यह कहने लगे हैं कि कांग्रेस का राज्य नेतृत्व इस मसले का समाधान निकालना ही नहीं चाहता। झारखंड प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव के समक्ष यह मामला उठाया जा चुका है, लेकिन उन्होंने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।

प्रदीप-बंधु का मामला विधानसभा न्यायाधिकरण में लंबित

विधायक प्रदीप यादव(Pradeep Yadav) और बंधु तिर्की(Bandhu Tirkey) के खिलाफ कांके से भाजपा विधायक समरी लाल ने विधानसभा न्यायाधिकरण में भाजपा की ओर से एक मामला दर्ज कराया है। दायर याचिका में समीर लाल ने दल-बदल कानून का उल्लंघन के लिए प्रदीप यादव और बंधु तिर्की की सदस्यता समाप्त करने की अपील की है। पूर्व में भी इन दोनों विधायक के खिलाफ मामले दर्ज हो चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि विधायक बंधु तिर्की और प्रदीप यादव को पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल के कारण झाविमो से निष्कासित कर दिया गया था। दोनों की बर्खास्तगी की सूचना विधानसभा अध्यक्ष और चुनाव आयोग को दी गयी थी। झाविमो के विलय को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने बाबूलाल मरांडी को भाजपा के विधायक के तौर पर और बंधु तिर्की और प्रदीप यादव को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मान्यता दी थी।। इसके बाद बंधु तिर्की, प्रदीप यादव ने कांग्रेस की सदस्यता ले ली थी। बाबूलालल मरांडी, बंधु तिर्की और प्रदीप यादव के दल-बदल का मामला सुप्रीम कोर्ट में अभी लंबित है।

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