समाचार प्लस
Breaking झारखण्ड देश फीचर्ड न्यूज़ स्लाइडर बिहार

प्रदूषण ने बिगाड़ी दिल्ली की हवा, दिल्ली में लग सकता है लॉकडाउन, क्या है झारखंड और बिहार की स्थिति?

Delhi Pollution

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बढ़ते प्रदूषण के खतरे को देखते हुए आपात बैठक बुलाई है। बैठक ‘दिल्ली के विस्फोटक हो चुके प्रदूषण को कैसे नियंत्रित किया जाये’ की  रणनीति बनाने की लिए बुलाई गयी है। प्रदूषण को लेकर केजरीवाल सरकार का जैसा रुख है उसे देखते हुए दिल्ली में लॉकडाउन लग सकता है।

क्यों है दिल्ली की हवा खराब

दिल्ली की हवा को दिल्लीवासियों से ज्यादा दिल्ली के आसपास के राज्य खराब करते हैं। हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश मिलकर दिल्ली की हवा बिगाड़ देते हैं। स्थिति यह हो जाती है कि दिल्ली वालों की सांसें घुटने लगती हैं। लेकिन इसके बावजूद ये राज्य सुधरने का नाम नहीं लेते।

यह तय है कि दिल्ली में छोटे-बड़े वाहनों की भरमार है। फिर कई राज्यों की तुलना में यहां एसी भी खूब चलते हैं। ये सब मिलकर वातावरण को गर्म तो करते ही हैं। लेकिन इसके बावजूद दिल्ली की प्रदूषण की स्थिति इसके पड़ोसी राज्य वीभत्स बना दे रहे हैं। हजारों की संख्या में फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं, सिविल कंस्ट्रक्शन, वाहन दिल्ली का प्रदूषण तो बढ़ाते ही हैं। पंजाब और हरियाणा में जलायी जाने वाली पराली दिल्ली की सांसें घोंट देने में ज्यादा ही योगदान करती है। दिल्ली सरकार के अनुरोध, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पंजाब और हरियाणा सरकारों पर बेअसर साबित हो चुके हैं। किसान तो खैर सुनते नहीं है, चुनाव के रथ पर सवार किसानों के वोटों को गिनने में व्यस्त पंजाब सरकार ने दिल्ली की इस समस्या से आंखें मूंद ली हैं।

झारखंड-बिहार में प्रदूषण का कितना खतरा?

झारखंड का प्रदूषण स्तर भले ही दिल्ली की तरह नहीं हो, लेकिन झारखंड में प्रदूषण के कारण मौतें भी खूब होती हैं। एक आंकड़े के अनुसार, प्रदूषण के कारण होनेवाली बीमारियों से 2019 में करीब 33 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। इससे भी यहां के प्रदूषण स्तर को समझा जा सकता है। झारखंड में बड़े शहरों में वाहनों की बहुतायत से प्रदूषण तो बढ़ ही रहा है। चूंकि यहां फैक्टरियों का जाल नहीं बिछा है, इस नाते फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण में अपना योगदान नहीं करता, लेकिन राज्य के अधिकांश घरों में अब भी जलावन के रूप में लकड़ी और कोयले का अधिक उपयोग होता है। आंकड़ों के हिसाब से राज्य की 80 फीसदी आबादी आज भी खाना बनाने के लिए लकड़ी, कोयला, उपला आदि का उपयोग करती है। जलावन के ये साधन दमघोंटू गैसें उत्सर्जित करते हैं। यह हमारे स्वास्थ्य पर असर तो डालता है, साथ ही राज्य में मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण भी है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का यह राज्य में सबसे बड़ा कारण भी है। झारखंड में वायु प्रदूषण से स्ट्रोक, मोतियाबिंद, उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी बीमारी, सांस संबंधी बीमारी, मधुमेह, लंग्स कैंसर तथा कम वजन के बच्चों का पैदा होना आदि बीमारियां होती हैं।

प्रदूषण के मामले में बिहार की स्थिति भी बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है। राजधानी पटना में वायु की स्थिति पहले से ज्यादा खराब हुई है। इसी साल मार्च में आये एक सर्वे के अनुसार बाद पटना देश में सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में तीसरे नंबर पर था। वहीं पटना राज्य का पहला ऐसा शहर बन गया है, जहां सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण है। पटना की हवा खराब श्रेणी में पहुंच गयी है। दानापुर और ईको पार्क एरिया की हवा बहुत खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है। बिहार में गया और मुजफ्फरपुर से भी ज्यादा प्रदूषित शहर पटना बन गया है।

यह भी पढ़ें: PM Modi ने की UNSC की बैठक की अध्यक्षता, समुद्री सुरक्षा के लिए दिए 5 सिद्धांत

Related posts

The Railway Men: बाबिल खान ने शेयर किया भोपाल गैस त्रासदी पर बनी फिल्म का पोस्टर, R. Madhavan, Kay Kay Menon भी आएंगे नजर

Sumeet Roy

दस लाख के इनामी नक्सली समेत दो नक्सलियों ने झारखंड पुलिस के समक्ष किया सरेंडर, देखें VIDEO

Sumeet Roy

Republic Day 2022 : 18 साल से कम व 60 साल से अधिक उम्र के लोग गणतंत्र दिवस समारोह में नहीं होंगे शामिल

Manoj Singh