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Jharkhand की सियासी हवा गर्म, बंधु की विधायकी गयी, समरी लाल अधर में, सीएम हेमंत के साथ सरकार की अटकी है सांस!

The political air of Jharkhand is hot, the government's breath is stuck with CM Hemant

सीएम हेमंत पर अपने पद के दुरुपयोग का लगा है बड़ा आरोप

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

मौसम के साथ झारखंड की सियासी हवा गर्म हो गयी है। यहां तक कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार के वेंटिलेटर पर जाने का खतरा पैदा हो गया है। सरकार में शामिल कांग्रेस के विधायक आय से अधिक सम्पत्ति मामले में अपनी विधायकी खो चुके हैं। भाजपा के विधायक समरी लाल फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर विधायक बनने का आरोप झेल रहे हैं। जांच समिति उनके जाति प्रमाण पत्र को रद्द भी कर चुकी है। समरी का मामला झारखंड हाई कोर्ट के साथ राज्यपाल के पास भी पहुंच चुका है। लेकिन इस खबरों से बड़ी खबर यह है कि झारखंड की पूरी सरकार पर ही फिलहाल खतरे में पड़ी हुई है, क्योंकि खुद मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के बड़े आरोप में फंस गये हैं, अगर यह आरोप सिद्ध हो गया तो मुख्यमंत्री की विधायकी के साथ सरकार की सत्ता से विदाई हो जायेगी।

खुद को ही फायदा पहुंचाने का आरोप!

पद का दुरुपयोग कर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के उल्लंघन का बड़ा आरोप झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर लगा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नाम पत्थर खदान लीज मामले में आया है जो उनकी मुश्किलें बढ़ा रही हैं। झारखंड हाई कोर्ट में उनके खिलाफ एक जनहित याचिका दाखिल की गयी है। याचिका प्रार्थी शिव शंकर शर्मा की ओर से अधिवक्ता राजीव कुमार ने दाखिल की गयी है। इसमें आरोप लगाया गया है कि हेमंत सोरेन, जो मुख्यमंत्री हैं और वन पर्यावरण मंत्री भी, उन्होंने पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए ‘खुद को आवेदन’ देकर ‘खुद को ही लाभ’ पहुंचा कर खनन पट्टा हासिल कर लिया। ऐसा करना पद का दुरुपयोग और जनप्रतिनिधि अधिनियम का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की सीबीआई जांच के साथ सीएम की सदस्यता रद्द करने की भी मांग की है।

राज्यपाल की सक्रियता और गृहमंत्री से मुलाकात क्या खिलायेगी गुल?

बता दें, इन मामलों को लेकर झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस सक्रिय हैं। 27 अप्रैल को केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात भी करने वाले हैं। इसलिए राज्य ही नहीं, पूरे देश की निगाहें झारखंड के राज्यपाल और गृहमंत्री अमित पर टिक गयी हैं। ऐसी ही एक मुलाकात 2005 में भी हुई थी। राज्यपाल और गृहमंत्री की मुलाकात के बाद सीएम हेमंत के पिता शिबू सोरेन की सरकार चली गयी थी। हालांकि तब केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी। उस समय झारखंड के राज्यपाल सैयद अहमद थे और केन्द्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल। तब सियासी नौटंकी के बाद जोड़-तोड़कर बनायी गयी शिबू सोरेन की सरकार चली गयी थी। उसके बाद अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी थी।

मौका नहीं छोड़ना चाहती भाजपा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ बीजेपी ने इस मुद्दे पर मोर्चा खोल रखा है। भाजपा भी हेमंत सोरेन को सीएम पद से हटाने पर तुली हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलकर मुख्यमंत्री हेमन्त के खिलाफ शिकायत कर चुका है। भाजपा ने पद का दुरुपयोग करने के लिए हेमंत सोरेन को पद से हटाने की मांग मुख्य रूप से रखी है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर क्या हैं आरोप?

दरअसल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए, अपने नाम पत्थर खदान लीज की स्वीकृत करा लिया है। आरोप के मुताबिक हेमंत सोरेन ने रांची जिले के अनगड़ा मौजा, थाना नं-26, खाता नं- 187, प्लॉट नं- 482 में अपने नाम से पत्थर खनन पट्टा की स्वीकृति ली है। इसके लिए वह 2008 से प्रयासरत थे।

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