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वन्यजीवों से PM मोदी का प्यार रंग लाया, 70 वर्षों बाद ‘बिग म्याऊं’ इज बैक इन इंडिया

भारत फिर देखेगा चीतों की रफ्तार

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वन्य-जीवों के प्रति प्रेम से आज का दिन मध्यप्रदेश के लिए ही नहीं, पूरे भारत के लिए ऐतिहासिक बन गया है। 70 वर्षों का लम्बे इंतजार के बाद एक बार फिर भारत में चीतों की रफ्तार फिर देखने को मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्वालियर के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से आये 8 चीतों का स्वागत किया। ये सभी चीते एक विशेष कार्गो फ्लाइट से लाने के बाद मध्यप्रदेश के ग्वालियर लाया गया था। इनमें से 3 चीतों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जन्मदिन पर देशवासियों को उपहार देते हुए मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बने विशेष बाड़ों में छोड़ा। बाकी चीते रणथम्भौर और पन्ना के नेशनल पार्क में छोड़ जायेंगे। नामीबिया से जो चीते आये हैं उनमें 5 मादा और 3 नर हैं। इन सबकी उम्र औसतन 5 साल है। भारत में चीतों को लाना एक शुरुआत है, अगले 5 वर्षों में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 50 चीते लाए जाएंगे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की योजना इससे बड़ी है। विदेश से लाये लाये जाने के बाद चीतों की देश में ब्रीडिंग करायी जायेगी। ब्रीडिंग कराकर 500 की संख्या होने पर देश के अलग-अलग नेशनल पार्क में छोड़े जाने की योजना है।

वन्य जीवों से पीएम मोदी का प्यार

भारत में चीतों की एक बार फिर से रफ्तार देख पाना पीएम मोदी के वन्यजीव के प्यार का नतीजा है। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए पहले से ही कदम उठाते रहे हैं। इसी का ही नतीजा है कि पहले जहां 1,61,081.62 वर्ग किलोमीटर के ऐसे 740 संरक्षित इलाके थे। अब संरक्षित इलाके की संख्या बढ़कर 981 हो गयी है और इलाका भी बढ़कर 1,71,921 वर्ग किलोमीटर हो गया है। सामुदायिक रिजर्व 2014 में 43 थे जो  2019 तक 100 हो चुके थे। बाघ बचाओ अभियान के लिए भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी काम करते रहे हैं। इसका नतीजा है कि देश के 18 राज्यों में 75,000 वर्ग किलोमीटर में 52 टाइगर रिजर्व आज हैं। देश में बाघ भी बढ़े हैं। 2014 में देश में 2226 बाघ थे। साल 2018 में इनकी संख्या 2967 हो चुकी थी।

सिर्फ बाघों को ही नहीं, चीतों को भी बचाने का प्रयास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया है। 2015 में गिर अभयारण्य में जहां 523 शेर थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 674 हो गई है। इसके साथही तेंदुआ संरक्षण योजना की वजह से 2020 में इनकी संख्या बढ़कर 12852 हो गई थी जो कि 2014 में देश में सिर्फ 7910 ही थी।

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