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PM मोदी VS मनमोहन सिंह: किनके कार्यकाल में देश में बढ़ी महंगाई? जानें 

PM मोदी VS मनमोहन सिंह: किनके कार्यकाल में देश में बढ़ी महंगाई?

प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के सात साल पूरे हो गये हैं. इन सात सालों की लोग अपने अपने हिसाब से समीक्षा करने में लगे हैं. इसके साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार के आखिरी सात सालों से भी तुलना की जा रही है. साल 2010 और वर्तमान में 2021. इन दोनों ही सालों के बीच 11 सालों का भारी अंतर है. बहुत कुछ बदल गया है इन 11 सालों में. आज से 11 साल पहले 2010 में देश की कमान कांग्रेस के हाथों में थी. डॉक्टर मनमोहन सिंह पीएम की कुर्सी पर विराजमान थे. आज भाजपा सत्ता में है और देश की बागडोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में है. दोनों ही राजनेताओं की बदौलत यूं तो इन 10-11 सालों में तमाम चीजें बदली हैं, लेकिन अगर कुछ नहीं बदला है तो वो हैं पेट्रोल डीजल जैसी चीजों की कीमतें.

डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर मौन हैं पीएम मोदी

डीजल और पेट्रोल कीमतें मनमोहन सिंह के समय में भी आसमान छू रहीं थी और आज जब नरेंद्र मोदी देश संभाल रहे हैं तब भी पेट्रोल और डीजल दोनों के भाव बढ़े हैं. जिस हिसाब से पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं, सारे देश की निगाहें केंद्र सरकार पर हैं. हर कोई ये जानने को उत्सुक है कि एक ऐसे समय में जब देश कोरोना वायरस की मार झेल रहा हो और महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर हो सरकार क्या कर रही है. भले ही पीएम मोदी के मंत्रियों की तरफ से पेट्रोल के दामों पर बयान आ रहे हों, मगर इस अहम मसले पर अब तक देश के प्रधानमंत्री मौन साधे हैं. सरकार चाहे डॉक्टर मनमोहन सिंह की रही हो या फिर नरेंद्र मोदी की,

2010 रहा हो या फिर 2021, हालात दोनों ही वक़्त पर एक जैसे

चाहे वो 2010 रहा हो या फिर 2021, हालात दोनों ही वक़्त पर एक जैसे हैं. दोनों ही सरकारों के बीच तुलनात्मक अध्ययन में जो बात सबसे दिलचस्प है वो ये कि 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने मुखर होकर अपनी बातें कही थीं. डॉक्टर मनमोहन सिंह ने साफ कह दिया था कि न तो पेट्रोल की बढ़ी हुई कीमतें वापस होंगी और न ही हम इस बात की कोई गारंटी देते हैं कि भविष्य में कीमत नहीं बढ़ेगी. वहीं बात आज की हो तो इस अहम मसले पर पीएम मोदी चुप्पी साधे हुए हैं और सोशल मीडिया पर जनता की आलोचना का सामना कर रहे हैं.

क्या कीमतों का घटना बढ़ना सरकार के हाथ में नहीं है ?

पेट्रोल की बढ़ी हुई कीमतें सीधे तौर पर आम आदमी से जुड़ा मसला है. ऐसे समय में जब तेल शतक पार कर गया हो बहुत ज़रूरी था कि विपक्ष और सत्तापक्ष को इस मसले पर साथ बैठना था और कुछ ऐसी तरकीबें निकालनी थीं जहां समस्या का समाधान निकले. जिस तरह पेट्रोल को लेकर प्रधानमंत्री से लेकर अलग अलग दलों तक कोई संवाद नहीं हो रहा है, वो न केवल विचलित करता है, बल्कि ये भी बताता है कि कहीं न कहीं लोग भी इस बात को मान चुके हैं कि कीमतों का घटना बढ़ना सरकार के हाथ में नहीं है और ये उससे कहीं ऊपर की चीज है.

LPG गैस सिलेंडर की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं

कोरोना काल के बाद अब महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है। पेट्रोल-डीजल के साथ ही रसोई गैस के दाम एक फिर बढ़े हैं। रसोई गैस यानी LPG गैस सिलेंडर की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. कोरोना काल के बाद अब महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है। पेट्रोल-डीजल के साथ ही रसोई गैस के दाम एक फिर बढ़े हैं। बढ़ोतरी उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को दिए जाने वाले सब्सिडी वाले सिलेंडर सहित सभी श्रेणियों में भी हुई है. ऐसे में कई  आदिवासी बहुल जिलों में कई परिवार ऐसे हैं, जो फिर से चूल्हे पर लौट आए हैं और फिर से चूल्हा जलाने को मजबूर हो गए .

मनमोहन सिंह सरकार को भी होना पड़ा था आर्थिक मंदी का शिकार

वैसे आर्थिक सुस्ती का शिकार मनमोहन सिंह सरकार को भी होना पड़ा था. 2008 में दुनिया भर में आर्थिक मंदी आई थी. तब मनमोहन सिंह ने डिमांड यानि मांग बढाने पर जोर दिया था. मनरेगा के बजट में इजाफा किया था. राइट टू फूड यानि भोजन के अधिकार के तहत देश की 82 करोड़ आबादी को पांच किलो चावल तीन रुपये किलो की दर से या गेंहू दो रुपये किलो की दर से देना शुरु किया था. मिड डे मील योजना को पांचवी से बढ़ाकर आठवीं कक्षा तक कर दिया था. कच्चे तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ने के बावजूद देश में उस अनुपात में पेट्रोल डीजल के रेट बढ़ने नहीं दिये थे.

मनमोहन सरकार का जबरदस्त विरोध करती थी बीजेपी, अब है मौन

जब बीजेपी विपक्ष में थी तो मनमोहन सरकार में बढ़ती महंगाई का जमकर विरोध किया था। जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने अपने एक भाषण में कहा था कि हमारी सरकार बनेगी तो हम आपसे वादा करते हैं कि 100 दिन के अंदर महंगाई कम कर देंगे। महंगाई के मुद्दे पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर हमला बोलते हुए कहा था, ‘आज रुपए की स्थिति प्रधानमंत्री के जैसी हो गई है’ उन्होंने मनमोहन सिंह पर तंज कसते हुए कहा था कि आज रुपया भी प्रधानमंत्री की तरह गूंगा हो गया है। उन्होंने कहा था कि पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी यूपीए सरकार की नाकामी है’. लेकिन आज पेट्रोल, गैस सिलिंडर, खाद्य पदार्थों की आसमान छूती कीमतों पर पीएम नरेंद्र मोदी मौन धारण किए हुए हैं.

 मनमोहन ने दिखाई थी उम्मीद की किरण

केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, खाद्य तेल, खाद्य पदार्थ, खेती उर्वरकों के दाम रोज बढ़ रहे हैं । पिछले डेढ़ साल से लोग कोरोना महामारी की मार झेल रहे हैं। ऐसे में मजदूर निम्न वर्ग, मध्य वर्ग के परिवार सबसे ज्यादा परेशान हैं।चाहे वो 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का शासनकाल रहा हो या वर्तमान में पीएम मोदी का देश के प्रधानमंत्री की कमान संभालना, कांग्रेस से लेकर भाजपा तक ने कुछ किया नहीं. लेकिन जिस तरह मनमोहन सिंह ने अलग अलग चीजों को लेकर पहल की थी तो देश को लगा कि पेट्रोल की कीमतों का कुछ निदान हो रहा है और सरकार इस दिशा में कुछ बड़ा करने वाली है. वहीं जब हम प्रधानमंत्री मोदी की बात करते हैं तो उनके रवैये से तो ऐसा ही लगता है कि शायद उन्हें आम आदमी और उसकी समस्याओं की कोई परवाह ही नहीं है.

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