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CNT और SPT एक्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, याचिकाकर्ता का दावा- एक्ट से सबसे अधिक नुकसान आदिवासियों को

Petition in Supreme Court against CNT-SPT Act, loss to tribals due to the Act

श्याम प्रसाद सिन्हा ने दायर की है याचिका

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

सीएनटी-एसपीटी एक्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। यह एक जनहित याचिका है जिसे झारखंड निवासी श्याम प्रसाद सिन्हा ने दायर की है। श्याम प्रसाद सिन्हा ने याचिका दायर करते हुए दावा किया कि सीएनटी-एसपीटी एक्ट से आदिवासियों का भला नहीं हो रहा, बल्कि इसके द्वारा आदिवासी समुदाय का शोषण ही हुआ है। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस एक्ट के कारण आदिवासी अपनी जमीन बेच नहीं सकते, लेकिन वे लीज पर दे सकते हैं। इस तरह के प्रावधान की असली मंशा आदिवासी समाज को गरीब रखना है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि थानाक्षेत्र की बंदिश के कारण हजारों एकड़ आदिवासी जमीन कोर्ट-कचहरी के चक्कर में फंस गई हैं। इससे आदिवासी जमीन मालिकों को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। याचिकाकर्ता श्याम प्रसाद सिन्हा ने कहा कि अंग्रेजों ने 1908 में सीएनटी और 1949 में एसपीटी एक्ट लाया था ताकि आदिवासी समाज अपनी जमीन न बेच सके, न ही उसका कोई व्यावसायिक उपयोग कर सके। आज भी चर्च, जो वैटिकन से कंट्रोल होता है, ने एक्ट की आड़ में आदिवासियों की हजारों एकड़ भूमि पर कब्जा जमा रखा है।

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