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जोश और जज्बे को सलाम: त्रिकुट Ropeway Accident में Panna Lal बने देवदूत, 11लोगों की बचाई जान

Panna Lal

Ropeway Accident: देवघर त्रिकुट रोपवे हादसे (Ropeway Accident)  के दूसरे और तीसरे दिन करीब 900 फीट की ऊंचाई में ट्राली में फंसे 48 लोगों को रेस्क्यू कर निकालने के लिए एयरफोर्स, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, पुलिस बल और स्थानीय लोगों ने संयुक्त रूप से अभियान चलाया.

11 पर्यटकों महिला और बच्चे समेत सुरक्षित नीचे उतारा

एयरफोर्स के हेलिकॉप्टर का रेस्क्यू शुरू होने से पहले स्थानीय ग्रामीणों की टीम ने पूरी सजगता के साथ रस्सी और सेफ्टी बेल्ट के साथ कुर्सी के जरिए दो ट्राली से 11 पर्यटकों को खुद रेस्क्यू कर सुरक्षित उतार लिया. इसमें स्थानीय गांव के रहने वाले पन्ना लाल अग्रणी भूमिका निभाते हुए रस्सी के जरिए ट्रोली पर गए और एक -एक कर दोनों ट्राली से 11 पर्यटकों महिला और बच्चे समेत सुरक्षित नीचे उतारा. पन्ना लाल (Panna Lal) के साथ करीब आठ अन्य ग्रामीण, एनडीआरएफ तथा आईटीबीपी के जवान सहयोग कर रहे थे.

मसीहा साबित हुआ पन्नालाल

झारखंड में रविवार को हुई रोप-वे दुर्घटना के बाद सोमवार को बचाव अभियान के दौरान हेलीकॉप्टर से गिरने के बाद एक व्यक्ति की मौत हो गई, और मंगलवार को रेस्क्यू के दौरान एक महिला की भी नीचे गिरने से मौत हो गई ,  लेकिन इस मुश्किल घडी में देवघर का एक स्थानीय युवक पन्नालाल मसीहा साबित हुआ है.

पन्नालाल ने अकेले 11 लोगों को बचाया

झारखंड के लाल पन्नालाल ने साहस का परिचय देते हुए अकेले 10 लोगों की जान बचाई. पन्नालाल अपनी टीम के साथ मेंटेंनेस रोप-वे के जरिए दो ट्रॉली तक पहुंच गए और 10 पर्यटकों को नीचे उतार लिया. पन्नालाल के साथ उनकी टीम के बसडीहा निवासी उमेश सिंह, उपेंद्र विश्वकर्मा, नरेश गुप्ता और शिलावर चौधरी नीचे से रस्सी पकड़े हुए थे और कुर्सी भेजकर एक-एक कर सभी पर्यटक को आसानी से बाहर निकाल लिया.

रोप-वे में काम करने के दौरान रेस्क्यू करना सीखा

पन्नालाल और उनकी टीम का साहस देखकर भारतीय फौज के जवान भी टावर पर चढ़ गए और सहयोग किया. पन्नालाल ने बताया कि रोप-वे में काम करने के दौरान वह रेस्क्यू करना सीखे हैं. इससे पहले पन्नाला रविवार रात में ही अंधेरे में वह रोप-वे के तार से झूलते हुए करीब 100 फीट की दूरी तय कर 18 नंबर केबिन तक पहुंचे. इसके बाद फंसे लोगों तक पानी और खाना पहुंचाया था. वह पूरी रात वह ओपन ट्राली से उपर नीचे करते रहे.

पन्नालाल इस दौरान ट्राली में फंसे लोगों का हौसला बढ़ाते रहे. सोमवार सुबह जब ट्राली केबिन में फंसे लोगों को बाहर निकालने की बात हो रही थी तभी पन्नालाल आगे आए। सेना के जवान ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए प्लानिंग करने में जुटे थे तभ पन्नालाल ने साहस का परिचय दिया.

बारी-बारी से कुर्सी के सहारे नीचे उतारा

दुबले पतले कद काठी के पन्ना लाल ने अपनी जान की परवाह किए बगैर अपने कमर में रस्सा बांधा और करीब 40 फीट की उंचाई पर केबिन संख्या आठ में फंसे चार लोगों तक पहुंच गया. काफी कुशलता से सभी चार लोगों को बारी-बारी से कुर्सी के सहारे नीचे उतार दिया. पन्नालाल की साहस को देखकर सेना के जवानों में भी जोश भर आया और वे ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाने में जुट गए.

कौन हैं पन्नालाल

पन्नालाल झारखंड के मोहनपुर प्रखंड के बसडीहा गांव के रहने वाले हैं . वह रोप-वे में काम करते हैं. उन्होंने इससे पहले गंगटोक, अरुणाचल प्रदेश इलाके के रोप-वे में रेस्क्यू का काम कर चुके हैं. इतनी हिम्मत का काम करने के बाद भी पन्नालाल में तनिक भी घमंड नहीं दिखा. वह मीडिया के कैमरे पर भी आने से कतराते रहे. उन्होंने कहा कि मानव धर्म का प्रचार करने की जरूरत नहीं होती। यह हर इंसान की ड्यूटी होती है।

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Ropeway Accident

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