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पंचायत चुनाव नहीं कराने की जिद में मध्य प्रदेश और झारखंड, फिर कब बनेगी गांव की सरकार?

No Panchayat Election Madhya Padesh Jharkhand

Panchayat Election : खबर मध्य प्रदेश से है, लेकिन सम्बंध झारखंड से भी ही। मध्य प्रदेश में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव होने वाले थे, लेकिन अब वे टलते नजर आ रहे हैं। वहीं झारखंड सरकार चुनाव जब तक टलते रहें टालते रहना चाहती है। मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने पंचायत चुनाव निरस्त कराने पर मुहर लगाकर प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा है। प्रस्ताव पर मुहर लगाने के बाद राज्यपाल राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायत चुनाव निरस्त करने का निर्देश दे सकते हैं।

मध्य प्रदेश: आरक्षण, परिसीमन, रोटेशन को लेकर असमंजस में सरकार

पंचायत चुनावों को निरस्त कराने के पीछे मध्य प्रदेश की राजनीतिक मंशा है। सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर को पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण पर रोक लगाते हुए पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित पदों के लिए दोबारा नोटिफिकेशन जारी करने के निर्देश दिया था। इसके बाद से कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हो गये हैं और एक-दूसरे पर ओबीसी विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस ने तो शिवराज सरकार के एक अध्यादेश को भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है, जिसमें रोटेशन व्यवस्था खत्म कर 2014 की स्थिति में चुनाव कराने का फैसला किया गया था। पिछले विधानसभा सत्र में शिवराज सरकार इस अध्यादेश को कानूनी जामा पहनाना भी चाहा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और अध्यादेश खुद-ब-खुद निरस्त हो गया। अब शिवराज सरकार के सामने 2019 में कमलनाथ सरकार के फैसले के अनुसार नये परिसीमन और रोटेशन के आधार पर पंचायत चुनाव कराए जाने की विवशता आ गयी। इसीलिए शिवराज सिंह चौहान सरकार ने पंचायत चुनाव को ही निरस्त करने की चाल चल दी है।

झारखंड:  पंचायत चुनाव कराने का सरकार का मूड नहीं

झारखंड में 2020 दिसम्बर में पंचायत चुनाव का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। लेकिन कोरोना महामारी के कारण चुनाव न कराकर गांवों की सरकार का दो बार विस्तार कर दिया गया है। अब जबकि स्थिति पहले से बेहतर है, और देश के दूसरे हिस्सों में पंचायत या नगरी चुनाव हो रहे हैं ऐसे में झारखंड सरकार का मूड पंचायत चुनाव कराने का नहीं लग रहा है। शीतकालीन विधानसभा सत्र में सरकार ने गोल-मटोल जवाब देकर इसे टालने का ही काम किया है जबकि चुनाव आयोग ने सरकार को बता दिया था कि वह झारखंड में चुनाव कराने के लिए पूरी तरह से तैयार है। लेकिन झारखंड सरकार मतदाता सूची का बहाना लेकर बैठी हुई है। यानी फिलहाल पंचायत चुनाव के आसार नहीं हैं। अगर चुनाव होना होता तो दिसम्बर के इन आखिरी दिनों में तिथियों की घोषणा हो गयी होती। जबकि चुनाव आयोग अक्टूबर में ही बता चुका था कि उसने झारखंड में चार चरणों में चुनाव की तैयारी पूरी कर ली है।

चुनाव आयोग को सरकार ने क्या दिया था जवाब?

राज्य निर्वाचन आयोग ने 29 नवंबर को सरकार को लिखित रूप से बता दिया था कि सभी जिलों में पंचायत चुनाव की तैयारी पूरी कर ली गयी है। इस पर सरकार ने कहा कि भारत के निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार राज्य में मतदाता सूची का पुनरीक्षण चल रहा है, जिसका अंतिम प्रकाशन 5 जनवरी 2022 को होगा। जिलों में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 10 फरवरी, 2022 तक कर लिया जायेगा। लेकिन चुनाव आयोग द्वारा पूछे गये सवाल राज्य में पंचायतों के चुनाव कब तक कराये जायेंगे, पर राज्य सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया। यह बात तो पिछले महीने की है। अब राज्य सरकार चाहे तो उसके पास एक और बहाना है- ओमीक्रॉन। जब कोरोना के कारण दो बार पंचायत चुनाव टाले जा सकते हैं तब ओमीक्रॉन भी एक बड़ा बहाना साबित हो सकता है।

डर से सरकार नहीं करा रही Panchayat Election – भाजपा

पंचायत चुनाव बार-बार टालने और पंचायत चुनाव नहीं होने देने के लिए भाजपा बार-बार राज्य सरकार पर हमला बोल रही है। भाजपा का कहना है कि राज्य की सरकार गांव-गिरांव के जमीनी मुद्दों से मुंह चुरा रही है। उसे डर है कि पंचायत चुनाव होंगे तो लोग झामुमो, कांग्रेस, राजद को जबर्दस्त झटका लगा देंगे। पंचायत चुनाव भले ही दलीय आधार पर नहीं होंगे, लेकिन यह भी सरकार जानती है कि कौन-किस पार्टी का समर्थक है।

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Panchayat Election

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