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Pakistan: काम नहीं आया दांव-पेंच, सहयोगी MQM (P) ने छोड़ा साथ, अब कैसे कुर्सी बचायेंगे इमरान!

Pakistan: The trick didn't work, MQM left, how will Imran save the chair!

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की कुर्सी जानी तय हो गयी है। विपक्ष के द्वारा पाकिस्तान की नेशनल असेम्बली में लाये गये अविश्वास प्रस्ताव पर गुरुवार को चर्चा होनी है और 3 अप्रैल को वोटिंग। इमरान अपनी कुर्सी बचाने के लिए हर उपाय कर चुके हैं। यहां तक कि अपने सहयोगियों को साथ रखने के लिए अपनी पार्टी के मुख्यमंत्री की एक कुर्सी कुर्बान भी कर चुके हैं। इमरान ने अपने सहयोगी मुस्लिम लीग-कायद (PML-Q) को साथ रखने के लिए पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री की कुर्सी उसे दे दी। लेकिन दूसरा सहयोगी एमक्यूएम (पी) नहीं मान रहा। इमरान खान MQM-P को मैरिटाइम मिनिस्ट्री सौंपने को तैयार हो गये थे, लेकिन बात नहीं बनी। एमक्यूएम (पी) ने स्पष्ट कर दिया कि वह अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करेगा। एमक्यूएम (पी) की इस घोषणा के बाद विपक्ष की बाछें खिल गयी हैं। क्योंकि अब इमरान को सत्ता से हटाना उनके लिए और आसान हो गया है। यानी अगर इमरान के अन्य बागी सांसद विपक्ष का साथ नहीं भी देते हैं तब भी विपक्ष को ज्यादा चिंता नहीं है। क्योंकि एमक्यूएम (पी) के वोटों से ही उनका काम आसान हो जायेगा।

एमक्यूएम (पी) के इमरान सरकार का साथ देने से मना कर देने के बाद सीटों का अंक गणित अब इमरान के पक्ष में नहीं रहा। एमक्‍यूएम (पी) का साथ छोड़ने से इमरान समर्थक सांसदों की संख्‍या घटकर 164 पहुंच गई है। वहीं विपक्षी दलों के खेमे में अब 177 सांसद हो गए हैं। एमक्‍यूएम (पी) के कुल 7 सांसद हैं। जाहिर है सहयोगी दल के इस दांव से इमरान खान चारों खाने चित होते दिख रहे हैं। अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर 3 अप्रैल को मतदान हो सकता है जिसमें इमरान खान का जाना तय लग रहा है।

क्या है इमरान खान का अंतिम दांव?

इमरान खान अपने अंतिम दांव के रूप में पाकिस्तान के दल-बदल कानून को हथियार बनाना चाह रहे हैं। लेकिन इसमें वह कितना कामयाब हो पायेंगे, इस पर संशय बना हुआ है। संशय की वजह है खुद पाकिस्तान का दल-बदल कानून। इमरान खान ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सांसदों को पत्र लिखकर हिदायत दी है कि नेशनल असेंबली में पीटीआई के सभी सदस्य मतदान से दूर रहें। सभी सांसद उस दिन नेशनल असेंबली की बैठक में शामिल नहीं हों। इमरान खान का ऐसा करने का मकसद है विपक्ष की मुश्किलें बढ़ाना। क्योंकि इमरान सरकार को गिराने के लिए विपक्ष को पीटीआई या उनके सहयोगी दलों के कुछ सांसद तोड़कर अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 172 सांसद जुटाने होंगे। लेकिन यहां एक पेंच है, इससे विपक्ष कैसे निबटेगा यह देखना भी दिलचस्प होगा। पाकिस्तान के संविधान के आर्टिकल 63-A के मुताबिक अगर किसी भी पार्टी का सांसद अपनी पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाता है तो उसकी सदस्यता खत्म हो सकती है। ऐसे में इमरान से नाराज चल रहे सांसद अब इस हिदायत से बाहर जाकर वोट करेंगे तब होगा क्या…??

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