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Organ Donation: 4 जिंदगियां रोशन कर गईं उर्मिला, ब्रेन डेड हुई तो परिजनों ने लीवर, किडनी और आंखें दान दी

Organ Donation

समाचार प्लस डेस्क 

Organ Donation: अंगदान जीवनदान… यह केवल एक वाक्य नहीं है, यह सच में जीवन देता है. लीवर, किडनी और आँखों जैसे महत्वपूर्ण अंगों की खराबी की वजह से जो मरीज मौत का इंतजार कर रहे होते हैं, उन्हें Organ Donation करने वालों की वजह से नयी जिंदगी मिलती है. सीमावर्ती गांव मदेरां की उर्मिला सहारण उन्हीं में से एक हैं, जिनके मौत के गम को भुलाकर परिजनों ने अंगदान का कठोर फैसला लिया, ताकि मौत का इंतजार कर रहे कुछ लोगों को नयी जिंदगी मिल सके.

उर्मिला सहारण के पति कृष्णा सहारण का कहना है कि मेरी जीवन साथी मेरे साथ नहीं रहीं, लेकिन उनकी वजह से किसी को नई जिंदगी मिल जाए, इससे बेहतर और क्या हो सकता है. इस पहल ने ऐसे लोगों की भी आँखें खोल दीं, जो ब्रेन डेड होने की स्थिति में ऐसी हिम्मत नहीं जुटा पाते. पति कृष्ण सहारण ने बताया कि उर्मिला का अंतिम संस्कार सोमवार को जयपुर में किया गया.

अंगदान के बाद गुडगांव अस्पताल से पूरे मान-सम्मान के साथ उर्मिला सहारण को अंतिम विदाई दी. वहीँ, अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि हर साल, भारत में सैकड़ों लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में जान गंवा देते हैं. हमें समाज में एक स्पष्ट बदलाव देखना है तो अंगदान के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ानी होगी. इसके बारे में गलत धारणाओं से लड़ना होगा.

उर्मिला के पति कृष्ण सहारण ने बताया कि मेरे दो बेटे  हैं सूरज सहारण और दीपक सहारण. मेरी पत्नी उर्मिला 5 जुलाई को बेटे सूरज सहारण के पास गुडगांव गयी थी. एक बेटा गुडगांव तो एक जयपुर में रहता है. गुडगांव में 7 जुलाई को उर्मिला का अचानक सिर दर्द हुआ. सिर दर्द बढ़ता ही गया. हमने गुडगांव के पारस अस्पताल में उर्मिला को दिखाया उन्होंने इलाज शुरू किया कुछ देर बाद डॉक्टर बोले- इनका ब्रेनडेड हो गया है. फिर हमने देश और विदेशों में डोक्टरों से भी संपर्क किया. एक दिन इंतजार करने के बाद 9 जुलाई को परिवार की सहमती लेकर उर्मिला के अंग दान करने का फैसला लिया. उर्मिला के अंगदान करने के पीछे भावना यह है कि पत्नी का शरीर हमारे साथ नहीं रह्गेया. लेकिन उनके अंगों से 4 जिंदगियां रोशन हो गयी. इसीलिए हमने उर्मिला की किडनी. लीवर और आँखें दान कर दीं. इस दुनिया में अंत में सब कुछ ख़ाक हो जाएगा. हम यह सोचकर अपने दिल को तसल्ली देंगे कि मेरी पत्नी के अंग अभी भी इस दुनिया में कहीं किसी में जीवित है.

जानिए कौनसा अंग कहां दान दिया

लीवर: कोयंबटूर की 21 साल की युवती को लीवर डोनेट किया गया. लेकिन फैटी लीवर होने के कारण प्रत्यारोपण नहीं हो सका.

किडनी: फरीदाबाद की एक 14 साल की बच्ची को किडनी दी गईं. वहीँ, दूसरी किडनी किडनी के प्रत्यारोपण के लिए मैचिंग पक्रिया जारी है.

आँखें: उर्मिला सहारण की आँखें गुड़गांव के ही दो लोगों को प्रत्यारोपित की. जिसमें एक की उम्र 16 साल है. अब दोनों जिंदगियां रोशन होंगी.

आप भी जानिए कैसे कर सकते हैं अंगदान

Organ Donation की पहली शर्त: ऑर्गन डोनेशन के लिए पहली शर्त व्यक्ति स्वस्थ होना चाहिए. ब्रेन डेड व्यक्ति, एचआइवी, कैंसर, डायबिटीज़, किडनी और हृदय रोगों से पीड़ित नहीं होना चाहिए. ऑर्गन डोनेशन दो तरह से किया जा सकता है.

लिविंग डोनर: जीवित रहते हुए क्यक्ति शरीर के कुछ हिस्से जैसे किडनी, बॉन मैरो डोनेट कर सकता है.

ब्रेन डेड: ब्रेन डेड घोषित होने पर किडनी, लीवर, फेफड़े, पेंक्रियाज, ओवरी, आंखें, बोन मैरो और त्वचा को दुसरे शरीर में ट्रांसप्लांट करते हैं.

कब कर सकते हैं Organ Donation ?

जन्म से लेकर 65 वर्ष तक के व्यक्ति जिन्हें ब्रेन डेड घोषित किया जा चूका है, उनका ऑर्गन डोनेशन किया जा सकता है. ब्रेन डेड साबित होने या मृत्यु के बाद कितने घंटे में कौन सा अंग ट्रांसप्लांट हो जाना चाहिए यह जानना जरुरी है.

अंग                    घंटे

किडनी                6-12

लीवर                    6

हृदय                    4

फेफड़े                  4

पेंक्रियाज              24

टिश्यू                  5 साल

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