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एक देश, एक कानून: क्या देश में लागू होगा Uniform Civil Code?

Uniform Civil Code

 

आज देश आज़ादी का 75वां अमृत महोत्सव मना रहा है. आज से ठीक 73 साल पहले साल 1948 में नई दिल्ली स्थित संसद भवन के संविधान सभा कक्ष में सुबह 10 बजे से बैठक हो रही थी. विषय था- यूनीफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code). उस वक़्त भारत के तत्कालीन उप राष्ट्रपति एचसी मुखर्जी (HC Mookerjee)की अध्यक्षता में यह बैठक हो रही थी. जब देश आज़ाद हुआ था, तब से ही UCC को लागू करने की बात होती आ रही है. लेकिन आज तक इसे लागू नहीं कराया जा सका है. देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू (Pt. Jawaharlal Nehru) ने भी UCC को लागू करने के दिशा में कदम उठाया था. वहीं दूसरी ओर संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर (B. R. Ambedkar) भी UCC के पक्ष में थे. लेकिन उनकी सरकार द्वारा यह काम करने से पहले ही उन्होनें पद छोड़ दिया था. इस सभा में कुछ सदस्यों द्वारा इस कानून का विरोध भी हुआ था. लेकिन आज की परिस्थिति को देखते हुए ऐसा लगता है कि देश को “एक देश एक कानून” की आवश्यकता है.

क्या है Uniform Civil Code

यूनीफॉर्म सिविल कोड का मतलब है भारत देश में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान एक कानून होना. दूसरे शब्दों में इस कानून का मतलब निष्पक्ष कानून है, जिसका किसी भी धर्म से कोई ताल्लुक नहीं है. इस कानून के लागू होने पर पूरे देश में हर नागरिक के लिए एक जैसा कानून होगा. भले ही वह शख्स किसी धर्म का भी का हो. लेकिन हिंदुस्तान में अभी तक ऐसा नहीं हो सका है. हमारे देश में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के लिए देश में विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग कानून हैं. इस अलग कानून को पर्सनल लॉ कहते हैं.

आख़िर क्या है पर्सनल लॉ

भारत में हिन्दुओं के लिए हिन्दू कोड बिल लाया गया था. यह कोड लाने के बाद देश भर में इसका विरोध हुआ था. जिसके बाद इस बिल को चार हिस्सों में बांट दिया गया था. देश के पहले और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Pt. Jawaharlal Nehru) ने इसे हिन्दू मैरिज एक्ट, हिन्दू सक्सेशन एक्ट, हिन्दू एडॉप्शन एंड मैंटेनेंस एक्ट और हिन्दू माइनोरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट में बांट दिया था. इस कानून ने महिलाओं को सीधे तौर पर सशक्त और मज़बूत बनाया दिया था. जिसके तहत महिलाओं को पैतृक और पति की संपत्ति में पुरुषों के बराबर का अधिकार मिलता आया है. इसके अलावा अलग-अलग जातियों के लोगों को एक-दूसरे से शादी करने का अधिकार है लेकिन कोई व्यक्ति एक शादी करने के बाद दूसरी शादी नहीं कर सकता है.

क्या कहना है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) भारत के लिए सही नहीं है और संविधान भारतीय नागरिकों को मज़हब की आजादी देता है. इस बोर्ड के पूर्व जनरल सेक्रेटरी वली रहमानी (Wali Rahmani) ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि UCC इस देश के लिए सही नहीं है. इस देश में कई संस्कृतियां हैं जिनका सम्मान किया जाना चाहिए.

भारतीय संविधान और Uniform Civil Code

यूनिफॉर्म सिविल कोड का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 4 के आर्टिकल 44 में है. इसमें नीति-निर्देश है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड कानून लागू करना ही हमारा लक्ष्य होगा. सुप्रीम कोर्ट भी कई बार इसे लागू करने की दिशा में केन्द्र सरकार के विचार जानने की पहल कर चुका है. इसके अलावा कोर्ट कहती रही है कि देश में अलग अलग पर्सनल लॉ की वजह से भ्रम की स्थिति बनी रहती है. सरकार चाहे तो एक जैसा कानून बनाकर इसे दूर कर सकती है. इस कानून को लागू करने की कोशिशें आज़ादी के पहले से की जा रही हैं. शाहबानो केस में भी UCC और ट्रिपल तलाक मामले पर खासा विवाद हुआ था.

डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने क्या कहा था UCC को लेकर

जून 1948 में संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad) ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) को बताया था कि पूरे हिंदू समाज में जो छोटे छोटे अल्पसंख्यक समूह हैं, उनकी तरक्की के लिए पर्सनल लॉ में मूलभूत बदलाव लाने की ज़रूरत थी. पट्टाभि सीतारमैया (Pattabhi Sitaramayya), एमए अयंगर (M. A. Ayyangar), मदनमोहन मालवीय (Madan Mohan Malaviya) और कैलाशनाथ काटजू (Kailash Nath Katju) जैसे नेताओं ने हिंदू कानूनों में सुधार लाने का विरोध किया था.

UCC के फायदे

भारतीय नागरिक संहिता लागू होने से रूढ़िवादी, जातिवाद, कट्टरवाद, सोच समाप्त होकर एक वैज्ञानिक सोच विकसित होगी. (One Nation – One Civil Code) लागू होने से पूरे देश और समाज को पुराने कानून से मुक्ति मिलेगी. शादी के लिए सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू होगा. पैतृक सम्पत्ति में बेटा- बहू तथा बेटा -बेटी को एक समान हक़ मिलेगा. बंटवारा, दान, वसीयत के मामलों में एक समान कानून लागू होगा.

UCC को लेकर लोगों की क्या सोच है?

कुछ लोगों का मानना है कि पर्सनल लॉ व्यवस्था और UCC दोनों साथ में बने रह सकते हैं, तो कुछ लोग मानते हैं कि अगर UCC लागू होता है तो इसका मतलब ही पर्सनल लॉ का खत्म हो जाना होगा. एक वर्ग यह भी मानता है कि UCC लागू किए जाने से धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन होगा.

इन देशों में लागू है यूनिफॉर्म सिविल कोड

एक तरफ भारत में समान नागरिक संहिता को लेकर बड़ी बहस चलती आ रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, तुर्की, इंडोनेशिया, सूडान और इजिप्ट जैसे कई देश इस कानून को अपने यहां लागू कर चुके हैं. भारत का इकलौता राज्य गोवा UCC का पालन करता है. वहां इसे गोवा फैमिली लॉ कहते हैं.

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