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झारखंड विधायक खरीद फरोख्त मामला: मंगलवार को Congressविधायकों की लगेगी Class

झारखंड में हेमंत सरकार (Hemant Soren Government) को गिराने की कोशिश का मामला सामने आने के बाद सियासत तेज हो गई है। इस मामले की पुलिस जांच कर रही हैं। वहीं, बीजेपी ने इसकी SIT जांच की मांग की है और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उधर कांग्रेस बीजेपी पर आरोप मढ़ रही है कि उसकी नजर कांग्रेस विधायकों पर है. दूसरी और वह यह भी दावा कर रही है कि उनके सारे विधायक एकजुट हैं, कहीं कोई असंतुष्टि नहीं है, सिर्फ उन्हें बदनाम किया जा रहा है।

कांग्रेस विधायकों से बात करेंगे प्रदेश अध्यक्ष

विधायकों की खरीद फरोख्त मामले के सामने आने से झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस के माथे पर बल पड़ गया है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव इस बाबत कांग्रेस विधायकों से मंगलवार को बात करेंगे। क्योंकि विधायकों की नाराजगी के पीछे जो सबसे बड़ी वजह है ‘ वह है बोर्ड निगम में जगह पाना।साथ ही नाराज विधायकों की नजर 12 वें मंत्री को लेकर भी है।

कांग्रेस के विधायकों में असंतोष पनपने की बात हाल के महीनों में सामने आ चुकी है. झारखंड के सिमडेगा जिले के कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी कहते रहें हैं कि अधिकारी विधायकों की सुनते नहीं हैं। विधायक दल की बैठक में दूसरे विधायकों ने भी ऐसी शिकायत की है। तालमेल के अभाव का नतीजा है कि जिस गति से जिले में काम होना चाहिए नहीं हो रहा है। हमारा ध्यान जनहित के मुद्दों पर होता है मगर अफसरों की प्राथमिकता ठेकेदार के आधार पर होती है।

कांग्रेस विधायकों की नाराजगी पहले भी आ चुकी है सामने

बड़कागांव विधायक अंबा प्रसाद और उनके समर्थकों पर हाल ही कटकमदाग थाना से अवैध बालू लदे ट्रैक्ट्रर जबरन ले जाने और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में बड़कागांव डीएसपी से बन नहीं रही। उनकी भी शिकायत रही है कि उनकी नहीं सुनी जाती।

इस तरह की घटनाओं के बाद राज्य में अधिकारियों के रवैये से नाराज चल रहीं महिला विधायकों ने चार जून को बैठक की थीं । विधायक दल नेता आलमगीर आलम व अन्य विधायकों के साथ वर्चुअल बात की। दीपिका पांडेय ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर विधायक दल की बैठक में बात नहीं सुनी गई तो दिल्ली दरबार में फरियाद करेंगे।

दूसरे विधायक भी महसूस करते रहे हैं कि सरकार के साथ समन्वय ठीक है, मगर अधिकारियों का रवैया ठीक नहीं है। कांग्रेस विधायक दल नेता आलमगीर आलम ने अनुसार विधायक सरकार के काम-काज से नाराज नहीं हैं, लेकिन कुछ अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि जिला और प्रखंड स्तर पर बीस सूत्री और निगरानी समितियों का जल्द गठन होगा।

मलाईदार बोर्ड-निगमों पर विधायकों की है नजर 

पार्टी में असंतोष की वजह नई नहीं है। गठबंधन की सरकार बने डेढ़ साल हो गये मगर अभी तक न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय नहीं हो सका है। निगरानी समिति और बीस सूत्री समितियों के लिए के लिए कांग्रेस की चार सदस्यीय समन्वय समिति बनी थी मगर बीते कोई छह माह में सिर्फ एक ही बैठक हो सकी है। जिलों का प्रभारी मंत्री बनाकर सरकार खामोश है। करीब ढाई दर्जन बोर्ड, निगम और आयोगों में पद खाली पड़े हैं। मलाईदार बोर्ड-निगमों पर विधायकों की नजर है। विधायकों के साथ पार्टी के बड़े नेताओं की इस पर नजर है। नतीजा है कि प्रदेश से लेकर जिला स्तर के पार्टी के पदाधिकारी और दूसरे बड़े कार्यकर्ताओं को महसूस नहीं हो रहा कि उनकी पार्टी की सरकार है। ऐसे में यदि कांग्रेस हाई कमान इतने दिनों से इन विधायकों की असंतुष्टि को नजरअंदाज कर निष्क्रिय बैठे हैं तो विधायकों के खरीद फरोख्त के मामले तो सामने आएंगे ही।
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