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अब कांग्रेस को प्रशांत किशोर पर भरोसा !

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देश की राजनीति के चाणक्य और रणनीतिकार माने जाने वाले प्रशांत किशोर अब कांग्रेस के खेवनहार बन सकते हैं। 2024 के लिए कांग्रेस ने बिसात सजाने की तैयारी कर ली है। सूत्र बताते हैं कि राहुल, सोनिया और प्रियंका के साथ उनकी बैठक हुई है. बैठक में रणनीतिकार प्रशांत किशोर को कांग्रेस में शामिल होने का न्योता दिया गया है. कहा यह भी जा रहा है कि उत्तर प्रदेश और पंजाब ही नहीं,बल्कि नेशनल लेवल पर प्रशांत किशोर कांग्रेस की वापसी का रोड मैप तैयार करेंगे।

कौन हैं प्रशांत किशोर ?

प्रशान्त किशोर एक भारतीय राजनीतिक रणनीतिकार और राजनीतिज्ञ हैं।आरम्भ में सार्वजनिक स्वास्थ्य में प्रशिक्षित, किशोर ने भारतीय राजनीति में प्रवेश करने से पहले आठ वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र के लिए काम किया। किशोर ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम किया ।
उनका पहला प्रमुख राजनीतिक अभियान 2011 में नरेन्द्र मोदी की मदद करने के लिए था, तब गुजरात के मुख्यमंत्री 2012 के गुजरात विधानसभा चुनावों में तीसरी बार मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए फिर से निर्वाचित हुए। उन्होंने नागरिकों को जवाबदेह शासन के लिए व्यापक रूप से ध्यान दिया और एक चुनाव-प्रचार समूह बनाया। 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत से जीतने में उन्होंने सहायता की।

व्यक्तिगत जीवन और करियर

साल 1977 में प्रशांत किशोर का जन्म हुआ था. प्रशांत किशोर का सबंध रोहतास जिले के कोनार गांव से है, लेकिन उनके पिता श्रीकांत पांडेय बक्सर में एक डॉक्टर थे. यहीं किशोर ने अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी की। वह 16 सितंबर 2018 को जनता दल (यूनाइटेड) के राजनीतिक दल में शामिल हो गए।

पंजाब विधानसभा चुनाव में मिला था जीत का श्रेय

कांग्रेस द्वारा पंजाब के अमरिंदर सिंह के अभियान में मदद करने के लिए किशोर को पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 के लिए नियुक्त किया गया था.यहां कांग्रेस के लिए लगातार दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद पंजाब में चुनाव प्रचार में मदद मिली।पंजाब में इस जीत का श्रेय उन्हें मिला।

वाईएसआरसीपी को जीत दिलाने में की थी मदद

प्रशांत किशोर को मई 2017 में वाईएस जगनमोहन रेड्डी के राजनीतिक सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया. उन्होंने कई चुनावी अभियानों की रूपरेखा तैयार की. वाईएसआरसीपी ने 175 सीटों में से 151 सीटों के बड़े बहुमत के साथ जीत दर्ज की।

ममता की सत्‍ता में वापसी में निभाई अहम् भूमिका

बंगाल में ममता बनर्जी की सत्‍ता में वापसी कराने में प्रशांत किशोर की अहम भूमिका रही है । प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे सामने आने से पहले दावा किया था कि अगर बीजेपी 100 से ज्यादा सीटें लेकर आती है तो वह अपना काम छोड़ देंगे। उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भगवा पार्टी की सीटें दहाई अंकों में ही सिमटकर रह जाएगी। दावा सच होते ही उन्होंने ऐसा कर दिखाया।

‘अबकी बार मोदी सरकार’ और ‘बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है’ जैसे नारे गढ़े

प्रशांत किशोर ने बिहार में जनता दल यूनाइटेड को अपनी सेवाएं दी थी. उन्होंने नीतीश कुमार, लालू प्रसाद और कांग्रेस को मिलाकर सरकार की राह बनाई। बदले में जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए। उन्होंने ही अबकी बार मोदी सरकार’ और ‘बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है’ जैसे नारे गढ़े. जब जदयू में खटपट बढ़ी तो उन्होंने नीतीश से अपनी राह अलग कर ली।

कांग्रेस में आयेंगे तो यह होगी चुनौती

कांग्रेस का प्रभाव पिछले कई सालों के दौरान घटता जा रहा है.कांग्रेस के हाथों से लगातार सत्ता खिसकती जा रही है.वहीं पंजाब, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में कांग्रेस इकाई में आपसी कलह के बीच प्रशांत का राहुल से मिलना अहम माना जा रहा है। इसके अलावा उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर और गुजरात में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। पंजाब में कांग्रेस की सरकार है। जबकि बाकी जगह पर वह अपनी खोई जमीन पाने की कोशिश करेगी। यह भी बात अहम है कि प्रशांत किशोर ने 2 मई को ऐलान किया था कि वह पॉजिटिकल स्‍ट्रैटेजिस्‍ट की भूमिका अब नहीं निभाएंगे। लेकिन, कांग्रेस के लिए उनका दोबारा सक्रिय होना काफी दिलचस्‍प है.

प्रशांत किशोर के आने से कांग्रेस को कितना होगा फायदा

जाहिर है, कांग्रेस का मुश्किल दौर चल रहा है। इस वक्त कांग्रेस को सबसे ज्यादा जरूरत है किसी खेवनहार की। अगले साल पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव की उसे विशेष चिंता नहीं है, लेकिन उत्तर प्रदेश का चुनाव उसकी प्रतिष्ठा पर असर डाल सकता है। गांधी परिवार भी उत्तर प्रदेश में अपनी साख नहीं बना पा रहा है। प्रशांत कुमार अगर ऐसे में कांग्रेस के पाले में आ जाते हैं तो उम्मीद की जा सकती है कि उसका कुछ लाभ पार्टी को मिल जाये।

प्रशांत कुमार के पिछले कुछ चुनावों में अपनी पार्टी के लिए किये गये प्रदर्शन के आधार पर तो यह कहा ही जा सकता है। 2017 यूपी चुनाव के बाद प्रशांत किशोर के साथ हुए मतभेद के बाद इस पुरानी पार्टी को एक बार एहसास हो रहा है कि राजनीति में बने रहने के लिए उसे प्रशांत किशोर के जादू की जरूरत है। हालांकि आगे जो भी होना है वह सिर्फ अटकल है। यह तो समय बतायेगा कि प्रशांत कांग्रेस में आते हैं या नहीं और आ गये तो क्या जादू चला पायेंगे?

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