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देश कहे Ban IPL: और खेलो आईपीएल! पैसों से ऊपर थोड़ी देश की चिंता भी तो करो!

IPL Ban
न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

चलिये, टीम इंडिया ने हमारी सारी टेंशन खत्म कर दी। अच्छा हुआ भारत न्यूजीलैंड से हार गया। हम क्रिकेट फैंस इतने दिनों ‘टीम इंडिया कैसे जीतेगी’ को लेकर मरे जा रहे थे। अब हमें और दुबला नहीं होना पड़ेगा। वैसे टीम इंडिया कोई पहली बार थोड़े ही हारी है। हार-जीत तो लगी रहती है। विश्व कप T20 मुकाबलों में हम न्यूजीलैंड से एक बार और नहीं जीत पाये।

कहा जाता है कि हार एक सबक है, लेकिन हम लगातार हारों से सबक कब लेंगे? हारने की चिंता छोड़कर थोड़ी देर यह सोचें कि भारत में खिलाड़ी आज किसके लिए खेलते हैं। ‘जिसके’ लिए खेलते हैं, वही देश के लिए ‘कुछ कर गुजरने’ में सबसे बड़ी बाधा है। टीम इंडिया तो टीम इंडिया है, गली-मोहल्लों में चलते ‘ये-वो’ कोचिंग सेन्टर, अपने बच्चों की किट अपने कंधों पर ढोकर कोचिंग सेन्टर पहुंचाने वाले अभिभावक, क्या वास्तव में अपने बच्चों को इसलिए वहां ले जाते हैं कि उनके बच्चे बड़े क्रिकेटर बनें, देश के लिए खेलें और देश का नाम रोशन करें? बिल्कुल नहीं, सबकी एक ही मंशा होती है, उनका बेटा बड़ा क्रिकेटर बने, ढेर सारे पैसे कमाये। फिर यही सब मुकाम हासिल कर लेने वाले खिलाड़ी क्यों न करें? जब खिलाड़ी एक मुकाम हासिल कर लेता है तब उसकी महत्वाकांक्षा, गलियों में खेलने वालों की महत्वाकांक्षा से कई गुणा बढ़ जाती है। इनकी इस महत्वाकांक्षा को और उड़ान देता है ‘द ग्रेट इंडिया क्रिकेट सर्कस’ आईपीएल। इस सर्कस का रिंग मास्टर कौन है- बीसीसीआई।

आईपीएल ने जितना दिया उससे ज्यादा छीन

आईपीएल एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसमें देश के ही खिलाड़ी नहीं खेलते हैं। ढेरों विदेशी खिलाड़ी भी खेलते हैं। इन विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलना हमारे लिए फायदेमंद भले न हो, लेकिन विदेशी खिलाड़ी फायदा जरूर उठा रहे हैं। कुछ साल के अंदर क्रिकेट हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के पन्ने उलट लें तो पता चल जायेगा कि पहले जो खिलाड़ी भारतीय पिचों पर आकर ‘रॉक एन रोल’ करने लगते थे, वही खिलाड़ी दूसरे मैचों में हमारी पिचों पर हमें ही आंखें दिखाने लगते हैं। युद्ध से पहले जासूसी करके दुश्मन की कमजोरी पता लगाने की पुराना परम्परा है। लेकिन आईपीएल ने तो अपने देश के खेल की जासूसी करने का एक खुला मंच दे दिया है।

लगातार आईपीएल मैच खेलने के कई और दुष्परिणाम भी हैं। मैचों की संख्या खूब बढ़ गयी है। उसी रफ्तार से खिलाड़ियों के घायल होने की संख्या भी बढ़ी है। अक्सर देखा जाता है कि अच्छे खिलाड़ी घायल अपना इलाज करा रहे होते  हैं। बार-बार घायल होने से खिलाड़ियों की क्षमता भी प्रभावित होती है। T20 World Cup  में हार्दिक पांड्या और भुवनेश्वर कुमार इसके उदाहरण है। आईपीएल में चूंकि पैसा खूब है, पैसे की लालच में कई खिलाड़ी अपनी चोट छुपाते भी खूब हैं।

बीसीसीआई की प्रयोगधर्मिता का भी खेल पर प्रभाव

एक विडम्बना यह है कि बीसीसीआई आज ज्यादा ही प्रयोगधर्मी हो गया है। बीसीसीआई के प्रयासों से राज्यों के क्रिकेट का स्तर सुधरा तो अच्छे खिलाड़ियों की भरमार हो गयी है। इसलिए किसी खिलाड़ी का थोड़ा भी खेल प्रभावित होता है तो बीसीसीआई एक के बाद एक प्रयोग करना शुरू कर देता है। इससे भी खिलाड़ियों की क्षमता प्रभावित होती है, क्योंकि जब तक खिलाड़ी टीम में अपना स्थान सुरक्षित नहीं मानेगा तक तक वह निश्चिंत होकर प्रदर्शन नहीं कर सकता। बीसीसीआई तो एक बिजनेसमैन की भूमिका में है, उसकी जरूरत सिर्फ पैसा है। किसी को दरकिनाकर करने में जरा भी दर्द नहीं होता, क्योंकि उसके पास ऑप्शन की भरमार है।

बीसीसीआई वास्तव में क्रिकेट का हित चाहता है तो एक स्थिर रणनीति उसे तय करनी होगी। आईपीएल में विदेशी खिलाड़ियों के खेलने की रणनीति को थोड़ा बदलना होगा ताकि उसका खमियाजा भारतीय क्रिकेट न भुगतना पड़े। अन्यथा वही होगा जैसा भारतीय टीम के न्यूजीलैंड के हाथों 8 विकेट की हार के बाद क्रिकेट फैंस सोशल मीडिया पर कर रहे हैं।

भारत की लगातार दूसरी हार के बाद भारतीय क्रिकेट फैंस भी गुस्से में हैं। फैंस भी भारत की करारी मिली हारों का जिम्मेवार आईपीएल को ही मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर किये जा रहे गुस्से का इजहार इसका प्रमाण है। फैंस तो जरिए BanIPL की मांग करने लगे हैं।

 

यह भी पढ़ें: T20 World Cup: भारत न्यूजीलैंड से हार गया तो क्या तब भी पहुंच पायेगा सेमीफाइनल में?

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