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National Sports Day 2022: ‘हम किसी से कम नहीं’…,  आंखों में तैरते सपने को झारखंड के खिलाड़ियों ने दिखाया उम्मीदों का सागर

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National Sports Day 2022: आज यानी 29 अगस्त को भारत राष्ट्रीय खेल दिवस (National Sports Day) मना रहा है। इससे एक दिन पहले यानी 28 अगस्त को भारतीय क्रिकेट टीम ने देशवासियों को पाकिस्तान पर जीत दिलाकर अपना जलवा बिखेर दिया है, यह दिन देश के खेल नायकों और चैंपियनों को भी समर्पित है, जो देश को गौरवान्वित करने की दिशा में उनके योगदान और समर्पण का सम्मान करते हैं। खेल के मूल्यों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य के अलावा अनुशासन, दृढ़ता, खिलाड़ी भावना, टीम वर्क और बड़े पैमाने पर जनता को खेलों को लेने के लिए प्रोत्साहित करना भी इसमें शामिल है।

झारखण्ड में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं 

अगर हम खेल और खेल प्रतिभाओं का जिक्र करें तो देश में झारखण्ड देश के किसी अन्य  प्रान्त से पीछे नहीं है। झारखंड का सिमडेगा जिला को तो कभी हॉकी की नर्सरी कहा जाता था। इसकी बड़ी वजह बड़ी संख्या में यहां से निकलने वाले खिलाड़ी हैं, जिन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2000 में राज्य का गठन होने के बाद प्रदेश के जिन खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उनमें से प्रमुख महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी निक्की प्रधान, सलीमा टेटे, झारखंड की तीरंदाज दीपिका कुमारी और दुनिया भर में क्रिकेट के लिए पहचान दिलाने वाले भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हैं।

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निक्की प्रधान

1993 में खूंटी में जन्मी महिला हॉकी खिलाड़ी निक्की प्रधान ने कई बार महिला हॉकी टीम में अपने प्रदर्शन की बदौलत देश का नाम रोशन किया है। निक्की सबसे पहले बैंकॉक में आयोजित एशिया कप 2011 में भारतीय टीम का हिस्सा बनीं, जिसमें टीम ने रजत पदक जीता। इसके अलावा 2016 में ब्राजील में होने वाले ओलिम्पिक में चयन के बाद वह भारत के लिए ओलिम्पिक में खेलने वाली झारखण्ड की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बनीं थीं। निक्की टोक्यो ओलंपिक 2021 में भी टीम का हिस्सा रहीं, इस टीम ने सेमीफाइनल तक का सफर पूरा किया था।

सलीमा टेटे

सिमडेगा में 2001 जन्मी सलीमा टेटे का अंतरराष्ट्रीय करियर 2017 में शुरू हुआ था। भारतीय हॉकी टीम की इस होनहार खिलाड़ी ने बेलारूस के खिलाफ राष्ट्रीय टीम में सबसे पहले जगह बनाई थी। वह 2018 यूथ ओलंपिक गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान भी थीं। इस टीम ने सिल्वर जीता था। इसके अलावा सलीमा टेटे टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारतीय महिला टीम की सदस्य भी थीं। इस टीम ने सेमीफाइनल तक का सफर पूरा किया।

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महेंद्र सिंह धोनी 

रांची में 1981 में जन्मे क्रिकेट खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी ने देश-दुनिया में झारखंड को पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने देश के लिए 341 वन डे, 90 टेस्ट और 98 टी-20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले। धोनी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे। उनकी अगुवाई में ही भारतीय टीम तीनों आईसीसी ट्राफी जीतने वाली टीम बनी। धोनी की अगुवाई में भारतीय टीम ने 2007 में आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप, 2011 में एकदिवसीय विश्वकप और 2013 में आईसीसी चैंपियंस ट्राफी जीती। धोनी को देश के प्रमुख नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण, पद्म श्री और देश का सबसे बड़ा खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न भी मिल चुका है। उनकी उपलब्धियों के लिए सेना ने उन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद उपाधि दी है।

दीपिका कुमारी

रांची में 1994 में जन्मी तीरंदाज दीपिका कुमारी ने 2006 में अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की थी. इस युवा तीरंदाज ने 2006 में मैरीदा मेक्सिको में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में कम्पाउंट एकल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया था। 2010 में एशियन गेम्स में भी दीपिका को कांस्य पदक मिला। इसी वर्ष कॉमनवेल्थ खेलों में महिला एकल और टीम गेम में दो स्वर्ण पदक हासिल किए। राष्ट्रमण्डल खेल 2010 में दीपिका ने न सिर्फ व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण जीता बल्कि महिला रिकर्व टीम को भी स्वर्ण जीता। टोक्यो ओलंपिक 2020 में पदक के लिए देश को दीपिका से सबसे अधिक उम्मीद थी। हालांकि वह अपना शानदार प्रदर्शन दोहरा नहीं सकीं। टोक्यो ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में कोरिया की शीर्ष वरीयता प्राप्त अन सान से दीपिका हार गईं। 2016 में दीपिका को पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

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हॉकी में झारखण्ड को इन्होंने दी अंतर्राष्ट्रीय पहचान 

इसके अलावा झारखण्ड ने कई महान हॉकी खिलाडी भी दिए। मैदान कोई भी हो जयपाल सिंह मुंडा ने हारना नहीं सीखा था. उन्होंने हॉकी की टर्फ पर भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाया था।

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सिलवानुस डुंगडुंग

भारत के पूर्व फील्ड हॉकी खिलाड़ी सिलवानुस डुंगडुंग मॉस्को, सोवियत संघ में आयोजित 1980 के ग्रीष्मकालीन ओलिंपिक में स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य रहे हैं। इन्हें झारखण्ड का आयरन मैन भी कहा जाता है । 2016 में इन्हें ध्यानचंद पुरस्कार मिला।

माइकल किंडो

दूसरे हॉकी वर्ल्ड कप और तीसरे वर्ल्ड कप में महान हॉकी खिलाड़ी माइकल किंडो थे जिन्होंने 1972 में अर्जुन पुरस्कार मिला। अर्जुन पुरस्कार पाने वाले वो पहले खिलाड़ी थे। ये 1972 में म्यूनिख में हुए ओलिंपिक में कांस्य पदक विजेता भारतीय टीम के सदस्य थे।

इसके अलावा हॉकी में ही झारखण्ड ने कई और दिग्गज खिलाडी दिए। इनमें मनोहर टोपनो, कांति बा, मसिरा सुरीन, सलीमा टेटे, गोपाल भेंगरा, दयामनी सोय (भारतीय हॉकी टीम की खिलाड़ी), असुंता लकड़ा प्रमुख हैं।

तीरंदाजी में इनका रहा है श्रेष्ठ प्रदर्शन 

वहीँ हम तीरंदाजी की बात करें तो पूर्णिमा महतो झारखंड की पहली महिला खिलाडी थी जिन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार मिला था, 2012 में ओलिंपिक में मुख्य कोच बनाया गया था। इसके अलावा झानो हांसदा जिसने 2006 में एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया था।2006 में ही विश्व आर्चरी में स्वर्ण पदक हासिल किया था। वही कोमालिका बारी ने 2021 में विश्व महिला प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक और इसी इवेंट में मिश्रित युगल में स्वर्ण पदक जीता था ।

झारखंड ने देश को कई क्रिकेट खिलाडी भी दिए

झारखंड ने देश को कई क्रिकेट खिलाडी भी दिए हैं। महेंद्र सिंह धोनी के अलावा सौरभ तिवारी, इशांक जग्गी, वरुण एरोन, शाहबाज नदीम, ईशान किशन और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी शुभ लक्ष्मी शर्मा का नाम उल्लेखनीय है ।

बॉक्सिंग में इन्होंने दिलाई पहचान 

बॉक्सिंग में झारखण्ड को राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने में जिन खिलाडियों का योगदान रहा है उनमें अरुणा मिश्र, लक्ष्मी पाडिया, दिवाकर प्रसाद, मिशन बेंजामिन लकड़ा प्रमुख हैं ।

दीपसेन गुप्ता और नीरज कुमार मिश्र बने ग्रैंड मास्टर

इसके अलावा शतरंज में झारखंड का नाम जिन्होंने रोशन किया उनमें दीपसेन गुप्ता, नीरज कुमार मिश्र के नाम प्रमुख हैं । दीपसेन गुप्ता तो भारत के पहले ग्रैंड मास्टर बने। वहीँ नीरज कुमार मिश्र 1991 में अंतर्राष्ट्रीय मास्टर बने।

रूपा रानी तिर्की और लवली चौबे ने  लॉन बॉल को दिलाई पहचान 

बर्मिंघम में 2022 में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल में लॉन बॉल में भारतीय महिला टीम को स्वर्ण पदक मिला। इसमें चार खिलाडियों में से दो रूपा रानी तिर्की और लवली चौबे झारखण्ड की थीं।

ये भी पढ़ें : IND vs PAK Asia Cup 2022: पंड्या-जडेजा ने पलटी हारी हुई बाजी, पूरा हुआ वर्ल्डकप का बदला

 

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