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लता मंगेशकर के निधन पर 2 दिन का राष्ट्रीय शोक, आधा झुका रहेगा राष्ट्रध्वज, जानें- क्या होता है राष्ट्रीय शोक का मतलब ?

National mourning

स्वर कोकिला लता मंगेशकर का रविवार को निधन हो (Lata Mangeshkar passes away) गया. वह 92 वर्ष की थीं. उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है. लता मंगेशकर के निधन पर दो दिन का राष्ट्रीय शोक ( National Mourning) घोषित किया गया है.

यह है नियम 

दुनिया के लगभग सभी देशो में राष्ट्रीय शोक मनाया जाता है, और इसे मनाने का तरीका लगभग एक जैसा ही होता है। राष्ट्रीय शोक के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर उस गणमान्य व्यक्ति की मृत्यु पर दुःख व संवेदना प्रकट की जाती है। जिसने राष्ट्र के हित में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सरकारी निर्णय पर राष्ट्रीय शोक 1 से 7 दिन का शोक घोषित किया जाता है और पूरे राजकीय सम्मान के साथ गणमान्य विशेष व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जाता है। देश में अभी तक विभिन्न राजनेताओं, पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व राष्ट्रपति तथा अपने-अपने क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों के निधन पर घोषित राष्ट्रीय शोक किया जा चुका है और आज 6 फरवरी 2022 लता जी के निधन पर दो दिनों का राष्ट्रीय शोक रहेगा। राष्ट्रीय शोक क्या होता है, कब घोषित किया जाता है, आइए जानते हैं नियम और राजकीय अंत्येष्टि के बारे में

इतने दिन के लिए होता है राष्ट्रीय शोक 

देश में ‘राष्ट्रीय शोक’ पूरे राष्ट्र के दुःख को व्यक्त करने का एक प्रतीकात्मक तरीका है। यह राष्ट्रीय शोक किसी बड़े नेता या गणमान्य व्यक्ति के निधन या पुण्य तिथि पर होता है। हालांकि राष्ट्रीय शोक के लिए कोई भी समय सीमा निर्धारित नहीं है, लेकिन भारत में राष्ट्रीय शोक का इतिहास देखा जाए तो आज तक कम से कम 1 दिन और अधिक से अधिक 7 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।

इनके लिए होता है राष्ट्रीय शोक 

वर्ष 1997 में पांचवें वेतन आयोग की सिफारिश के आधार पर सरकार द्वारा एक अधिसूचना जारी की गयी, जिसमें कहा गया था कि सिर्फ राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की मृत्यु की स्थिति में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाएगा। हालांकि बाद में इसमें कई संशोधन किए गए। वर्तमान में अन्य गणमान्य व्यक्तियों के मामले में, केंद्र विशेष निर्देश जारी कर सकता है। इसके साथ ही देश में किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा के समय भी राष्ट्रीय शोक घोषित किया जाता है।

सार्वजनिक अवकाश के नियम 

केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 1997 में जारी एक नोटीफिकेशन के अनुसार सिर्फ वर्तमान प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की मृत्यु की स्थिति में सार्वजनिक अवकाश(Rules Of Public Holiday) घोषित किया जा सकता है। इसी कारण अटल बिहारी वाजपेयी की मृत्यु पर आधे दिन का अवकाश घोषित किया था। हालांकि दिल्ली जैसे कई राज्यों ने अवकाश पूरे दिन का रखा था। भारत में किसी भी गणमान्य व्यक्ति की मृत्यु के बाद सरकार द्वारा उनके निधन की घोषणा की जाती है, इसके साथ ही सरकार द्वारा एक राजपत्र अधिसूचना काली पट्टी के साथ जारी की जाती है। राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुका देने के निर्देश के साथ राजकीय शोक भी घोषित किया जाता है। साथ ही सरकार द्वारा सार्वजनिक अवकाश की घोषणा भी की जाती है। सरकार आमतौर पर सभी राज्यों और अन्य सरकारी विभागों को राष्ट्रीय शोक, झंडा फहराने आदि के बारे में एक वायरलेस संदेश भेजती है।

गृह मंत्रालय राजपत्र अधिसूचना जारी करती है 

राजकीय अंत्येष्टि (State Funeral)के लिए गृह मंत्रालय द्वारा राजपत्र अधिसूचना जारी की जाती है। रक्षा मंत्रालय द्वारा अंतिम संस्कार के लिए सभी व्यवस्था की जाती है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी की मृत्यु के पश्चात तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण नें व्यक्तिगत रूप से अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था की गयी थी।

राजकीय अंत्येष्टि में यह होता है 

देश में और देश के बाहर स्थित भारतीय दूतावास और उच्चायोग में भी राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाया जाता है। राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि के दौरान पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज अर्थात तिरंगे में लपेटा जाता है। इस दौरान दिवंगत हस्ती को पूर्ण सैन्य सम्मान दिया जाता है। इसमें मिलिट्री बैंड द्वारा ‘शोक संगीत’ बजाया जाता है और इसके बाद 21 बंदूकों की सलामी दी जाती है। स्वतंत्र भारत में राजकीय सम्मान के साथ पहला अंतिम संस्कार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का हुआ था।

राष्ट्रीय शोक के दौरान कोई सरकारी या औपचारिक कार्यक्रम नहीं होता  

राष्ट्रीय ध्वज संहिता के अनुसार राजकीय शोक के दौरान संसद, सचिवालय, विधानसभा, अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय भवनों या सरकारी कार्यालयों पर लगा राष्ट्रध्वज आधा झुका रहता है. इसके अलावा देश से बाहर स्थित भारतीय दूतावासों पर भी राष्ट्रध्वज आधा झुका रहता है. राष्ट्रीय शोक के दौरान कोई सरकारी या औपचारिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाता है.

राज्य सरकारें भी राजकीय शोक की घोषणा करती हैं

बता दें कि भारत रत्न से सम्मानित किसी भी शख्सियत के निधन को अपूर्णीय क्षति मानते हुए  राजकीय शोक की घोषणा की जाती है. पहले इसकी घोषणा केवल केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति करते थे लेकिन अब राज्य सरकारें भी राजकीय शोक की घोषणा करती हैं.
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