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National Herald: ईडी ने सोनिया को सवालों से हलकान किया, सोनिया ने मोतीलाल वोरा की आत्मा को अपने जवाबों से परेशान किया

National Herald: ED pranks Sonia with questions

जोतो दोष नोन्दो घोष! मोतीलाल वोरा के सिर सारा ठीकरा

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेसी नेता राहुल गांधी के बाद ईडी सोनिया गांधी पर लगातार सवालों के गोले दाग रहा है। इन सवालों से राहुल गांधी के बाद सोनिया गांधी भी काफी विचलित हैं, इतना तो समझ आ रहा है। ईडी के सवालों से परेशानी का यह आलम है कि सारा ठीकरा एक मरे हुए नेता पर फोड़ा जा रहा है। क्योंकि उन्हें पता है कि ‘मरा हुआ’ तो जवाब देने आयेगा नहीं, शायद इसी बहाने वे गंगा नहा लें।

‘ये तो मोतीलाल वोरा जी को पता था’, ईडी के अधिकांश सवालों पर कांग्रेस की सुप्रीमो सोनिया गांधी का यही जवाब हो रहा है। है न, हैरत वाली बात, सोनिया कांग्रेस की शीर्ष लीडर हैं और अपनी कांग्रेस की बातें कांग्रेस सुप्रीमो को पता नहीं हैं। अगर पार्टी के दिवंगत नेता और ट्रेजरर मोतीलाल वोरा के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अपनी पार्टी की गतिविधियों की जानकारी न हो, तब तो ऊपर से नीचे तक कांग्रेस के अंदर की गतिविधियों की जानकारी किसी को भी नहीं होनी चाहिए! फिर ये कांग्रेसी पूरे देश में बवेला क्यों मचा रहे हैं। यहां दो सवाल बनते हैं। एक, क्या कांग्रेस मोतीलाल वोरा के भरोसे चल रही थी, दो, मोतीलाल वोरा के बाद कांग्रेस कैसे चल रही है?

बता दें, नेशनल हेराल्ड का सारा मामला यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (YIL) और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के बीच लेन-देन को लेकर है। कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेता इसी लेन-देन मामले से जुड़े हैं, लेकिन लेन-देन के बारे में इन्हें कुछ भी पता नहीं है। जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक कई सवालों पर राहुल और सोनिया ने कांग्रेस के दिवंगत नेता को ही बीच में घसीट रहे हैं। उनके अनुसार वाईआईएल और एजेएल के बीच सभी वित्तीय लेन-देन की जिम्मेदारी मोतीलाल वोरा की थी। बता दें कि महज 50 लाख रुपए देकर वाईआईएल ने एजेएल के सारे शेयर ले लिए और उसपर चढ़ा 90 करोड़ का कर्ज माफ कर दिया था। और नेशनल हेराल्ड की हजारों करोड़ की सम्पत्ति अपनी।

कुल मिलाकर सोनिया और राहुल अगर मोतीलाल वोरा का नाम ले रहे हैं तो तो यह सब ईडी के शिकंजे से बचने की कवायद है? मोतीलाल वोरा अब दुनिया में रहे नहीं। ऐसे में जांच एजेंसी उनसे कुछ पूछ नहीं सकती कि मामले में उनकी भूमिका क्या रही और लेन-देन इस तरह क्यों किया गया। लेकिन क्या किसी दिवंगत की ‘गलतियों’ का फायदा किसी को लेने दिया जा सकता है? किसी पर 1 रुपये का एहसान कर आप उसकी 1000 रुपये की संपत्ति कैसे हड़प सकते हैं।

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