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झारखंड में बिकते हैं विधायक! खरीदोगे ?

हमारे देश में राजनितिक दलों में चुनाव जीतने को लेकर प्रतिद्वंद्विता एक स्‍वाभाविक बात है, लेकिन चुनाव संपन्‍न होने के बाद हंग एसेंबली की स्थिति में हर बार पॉलिटिकल हॉर्स ट्रेडिंग का गेम जमकर होता है. झारखंड में एक बार फिर राज्य सरकार के खिलाफ साजिश रचने की बू आनी शुरू हो चुकी है .  विधायकों की खरीद फरोख्त के लिए षड़यंत्र की सूचना गुरुवार को रांची की पुलिस को गुप्त रूप से मिली . इस बाबत अनुसार रांची के लोअर बाजार इलाके के एक बड़े होटल में छापेमारी कर पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में भी लिया है. सभी के पास से पैसों की बरामदगी भी हुई है. इसके बाद उन्हें गुप्त ठिकाने पर रखकर पूछताछ की जा रही है.हालांकि पूरे मामले को अभी गोपनीय रखा गया है.

हॉर्स ट्रेडिंग झारखण्ड राज्य के लिए कोई नई बात नहीं

2016 राज्य सभा चुनाव विधायक निर्मला देवी पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास पर आरोप लगा कह चुकी हैं कि 5 करोड़ रु. देकर उन्हें बीजेपी में आने को कहा गया था। लातेहार विधानसभा में बीजेपी और झामुमो दोनों पार्टी के नेता पार्टी बदल चुके हैं. विधायक नवीन जायसवाल, गणेश कुमार गंझू, अमर कुमार बाउरी, अनूप चौरसिया, रंधीर कुमार सिंह , जानकी प्रसाद यादव ने झामुमो छोड़ बीजेपी में विलय कर लिया था. इनके ऊपर कार्रवाई भी की गयी थी.ऐसा ही आरोप पहले भी जिप अध्यक्ष रहीं सुंदरी तिर्की पर भी लग चुका है.

पीसी एक्ट के तहत मामला चलाने का आदेश मिल चुका है 

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, एडीजी अनुराग गुप्ता और पूर्व सीएम के सलाहकार अजय कुमार के खिलाफ पीसी एक्ट ( प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट ) के तहत केस चलाने के लिए , पीसी एक्ट के तहत मामला चलाने का आदेश वर्ष 2016 में राज्यसभा चुनाव के दौरान हॉर्स ट्रेडिंग के मामले में दिया गया था । इसमें अनुराग गुप्ता और अजय कुमार को प्राथमिक अभियुक्त माना गया है, जबकि रघुवर दास को अप्राथमिक अभियुक्त बनाया गया है।

हाल के दिनों में की गई है कई बार छापेमारी

झारखण्ड में हाल के दिनों में हवाला कारोबार के नाम पर कई बार छापेमारी की गई है। 16 जुलाई को रांची, धनबाद और बोकारो में कई व्यवसायियों के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जिसके बाद व्यवसायियों में दहशत व्याप्त हो गया था। वहीं रांची शहर में भारी रकम के आने की सूचना पर शहरभर में पुलिस ने गहन जांच अभियान चलाया था।

एंटी डिफेक्‍शन लॉ के तहत होती है कार्रवाई 

हॉर्स ट्रेडिंग कोई नई बात नहीं है। ऐसा दशकों से होता आया है। जहां तक इस पर रोक लगाने की बात है तो इसके लिए एंटी डिफेक्‍शन लॉ है। जब भी कोई एमपी, एमएलए और एमएलसी पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाकर वोटिंग करता है तो उसके खिलाफ एंटी डिफेक्‍शन लॉ के तहत कार्रवाई होती है। इस कानून के तहत सदन कार्रवाई करती है और उसे अयोग्‍य करार दिया जाता है। लेकिन उसके खिलाफ कोई अन्‍य कानूनी कार्रवाई नहीं होती है। उसे सदन से अयोग्‍य करार दिया जाता है। फिलहाल जिस तरह से हॉर्स ट्रेडिंग होता है, उसके रोकने के अन्‍य कोई कानूनी प्रावधान भारत में नहीं हैं. इसी का लाभ राजनेता और राजनीतिक दल समय-समय पर उठाते हैं।

11 करोड़ रुपये में खरीद-फरोख्त मामले की चिट्ठी हो चुकी है सार्वजनिक 
जेवीएम के छह विधायकों को 11 करोड़ रुपये में खरीद-फरोख्त मामले की चिट्ठी सार्वजनिक होने के बाद विपक्षी पार्टियां सरकार से जांच कराने की मांग कर चुकी हैं . जेवीएम के साथ झामुमो व कांग्रेस सरकार भाजपा पर हमलावर थी और आज भी यह पेच फंसा ही हुआ है . उस वक्त झारखण्ड विकास मोर्चा के पार्टी अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सत्ताधारी रघुवर सरकार पर उनके विधायकों को खरीद अपनी पार्टी में शामिल करने का आरोप लगा चुके हैं ,लेकिन सत्ता सुख प्राप्त कारण सबसे अहम् होता है. बाबूलाल मरांडी ने भी अपने खोते जा रहे जनाधार को देखते हुए अपने पार्टी का विलय बीजेपी में कर दिया, उनके चार विधायक तो बीजेपी में शामिल हो चुके हैं, लेकिन दो विधायक बंधु तिर्की और प्रदीप यादव ने पाला बदलने से इंकार कर दिया. अभी भी यह मामला विधानसभा अध्यक्ष के पाले में है। जिससे यहां राजनीतिक संकट भी अक्सर उत्पन्न हो जाती है.

विद्वेष और बदले की राजनीति की शुरुआत हो रही है

झारखंड में पहली बार विद्वेष और बदले की राजनीति की शुरुआत हो रही है। सिर्फ विधान सभा चुनाव में ही नहीं में ही नहीं, यहां राज्यसभा 2016 हॉर्स ट्रेडिंग मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. पूर्व सीएम के साथ ही एडीजी अनुराग गुप्ता और रघुवर दास के प्रेस सलाहकार अजय कुमार की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. मामला 2016 में राज्यसभा की दो सीटों से जुड़ा है. 2016 राज्यसभा चुनाव के दौरान स्टिंग के जरिए आरोप लगाया गया है कि योगेन्द्र साव की पत्नी और कांग्रेस की विधायक निर्मला देवी का वोट हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास भी उनके घर गए थे.

इन कारणों से दशकों से जारी है जोड़तोड़

वर्तमान कानूनों के तहत पॉलिटिकल हॉर्स ट्रेडिंग को रोकना राज्य और देश में फिलहाल संभव नहीं है. अदालत ने साफ कर दिया कि यह सदन का मामला है. इसलिए इस मामले में लोकसभा, राज्‍यसभा, विधानसभा और विधान परिषद ही कार्रवाई करने में सक्षम प्राधिकार है. अदालती प्रक्रिया के तहत सजा का प्रावधान नहीं है. शीर्ष अदालत ने उस समय अपने आदेश में कहा था कि अगर कोई जनप्रतिनधि पैसा लेकर संबंधित पार्टी के पक्ष में मतदान कर देता है तो उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई संभव नहीं है.

सिस्टम होता है तार तार

झारखंड राज्य के गठन के बाद से ही यहां विधायकों की खरीद फरोख्त के मामले सामने आते रहे हैं, किस तरह बाबूलाल मरांडी की पहली सरकार में विधायक एनोस एक्का को पैसों के बल पर अपने साथ करने में उस समय सफलता हासिल की गई थी.अभी भी विपक्ष में बैठी बीजेपी दुसरे दलों के विधायकों को तोड़ने में जुटी है, जो कि प्रजातांत्रिक सरकार के लिए घातक और शर्मनाक है. जनता द्वारा चुनी हुई सरकार को अस्थिर कर अपने रजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति में लगा विपक्ष सिस्टम को तार तार करने में जुटा है.
दरअसल 2024 के चुनाव को नजर में रखते हुए झारखंड में नौकरशाहों का दखल भी सरकार बनाने की जोड़तोड़ को लेकर
हावी है, जो अधिकारी यह सोच रहे हैं कि अभी गंदगी फैला लेंगे और 2024 तक रिटायरमेंट के बाद आराम की जिंदगी बसर करेंगे, तो यह उनकी भूल है. सभी की जिम्मेदारी तय की जायेगी.

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