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छंटनी चाहिए ‘अग्निपथ’ पर छायी धुंध, मिटनी चाहिए भ्रम और सत्य की पतली लकीर

‘अग्निपथ’ को लेकर क्या है भ्रम – क्या है सत्य

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

भ्रम और सही-गलत की गुंजाइश हर जगह होती है। ऐसा आज ही नहीं हजारों वर्षों से देखा और समझा जा रहा है। आज युवाओं के लिए लायी गयी ‘अग्निपथ’ योजना के साथ भी ऐसा हो रहा है तो इसमें कोई नयी बात नहीं। युवा भ्रमित हैं और अपने ही देश की अपनी ही सम्पत्ति का दहन कर रहे हैं। ‘अग्निपथ’ नाम को जो योजना युवाओं के लिए लायी गयी है, उसका मकसद क्या है, उसको लाने के पहले की तैयारियां क्या रही हैं, उनसे युवाओं का क्या-क्या लाभ होने वाला हैं, लाभ है या हानि, अगर तमाम चीजों का जान लिया जाये तो इस योजना को लेकर जो एक धुंध छायी हुई है, वह शायद छंट जाये। हमने यह प्रयास भर किया है कि इसके जो भी सकारात्मक पहलू हैं, वह युवाओं को बता सकें, लेकिन शर्त यह है कि इसे बड़े धैर्य से समझने का यत्न करना होगा।

भ्रम- चार साल के बाद अग्निवीरों का भविष्य असुरक्षित हो जायेगा।

सत्य- सम्भव है भविष्य और सुरक्षित हो जाये! अग्निवीरों की पात्रता उम्र क्या है- 17 वर्ष से 21 वर्ष (इस बार के लिए अधिकतम उम्र 23 वर्ष)। चार साल बाद अग्निवीर रहने के बाद अगर सेवा समाप्त भी हो जाती है तो उस समय उनकी उम्र क्या रहेगी- अधिकतम 25 वर्ष। इसका तात्पर्य है कि उनके पास फिर से एक नयी दिशा तय करने का अवसर होंगे। जबकि सरकार इस बीच उन्हें मालामाल कर चुकी होगी। 25 वर्ष के करोड़ों युवा देश में आज भी बेरोजगार घूम रहे हैं। लेकिन सरकार अग्निवीरों को कई अवसर प्रदान करेगी। उसका लाभ उठाने का सर्वाधिक अवसर उन्हीं के पास होगा। कैसे-

  • उनके पास केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, असम राइफल्स तथा कई राज्यों की पुलिस में भर्ती होने का बेहतरीन अवसर होगा।
  • चार साल की नौकरी के बाद अगर सेना से दिल ऊब जाये तो वह अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। वह भी 25 वर्ष या इससे भी कम उम्र में। सरकार इसके लिए वित्तीय पैकेज के साथ बैंक से कर्ज की योजना का लाभ भी इन्हें देगी।
  • जो आगे पढ़कर कुछ और करना चाहते हैं तो उनके पास सर्टिफिकेट का अभाव नहीं रहेगा। अगर वे 10वीं पास हैं तो उन्हें 12वीं का सर्टिफिकेट और जो 12वीं हैं उन्हें ग्रेजुएशन का सर्टिफिकेट मिलेगा। जिसकी मान्यता देश में ही नहीं, बल्कि विदेश में भी होगी। यानी सफलता की उड़ान भरने का एक मजबूत धरातल छोटी उम्र में ही सरकार उनके लिए रख रही है।

भ्रम- ‘अग्निपथ’ योजना से युवाओं के लिए अवसर कम हो जाएंगे?

सत्य- अग्निवीर बन कर चार साल में रिटायर हो जाने के बाद युवाओं को सेना में नौकरी के अवसर रहेंगे। जैसा कि सरकार कह रही है, सेना में अग्निवीरों की भर्ती मौजूदा स्तर के तीन गुना हो जाएगी।

भ्रम- 21 वर्ष की उम्र अपरिपक्व मानी जाती है, कम उम्र के युवाओं पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

सत्य- ऐसा करने वाला भारत पहला देश नहीं बन रहा है। दुनिया के कई देशों में युवाओं पर सेना भरोसा करती है। चूंकि सेना की नौकरी अनुशासन वाली होती है, इसमें युवाओं के उद्दंड हो जाने का भय कदापि नहीं होता, वह भी भारत मे। चार साल के बाद सेना के अनुशासन से ये युवा काफी परिपक्व हो जायेंगे। इसके बाद ये युवा जहां भी जायेंगे वहां भी वे अनुशासन पसंद रहेंगे। यह समाज के लिए सकारात्मक बात होगी। फिर सेना सिर्फ युवाओं पर ही निर्भर नहीं रहेगी। मौजूदा योजना दीर्घ काल में युवाओं तथा अनुभवियों के 50-50 प्रतिशत का मिश्रण लाएगी। यह योजना शुरू हो जाने के बाद एक नया क्रम शुरू हो जायेगा।

भ्रम- रिटायर हो चुके अग्निवीर समाज के लिए खतरनाक होंगे। इनके आतंकी और अपराधी बन जाने का भय होगा।

सत्य- जैसा कि पहले कहा जा चुका है कि अग्निवीर अधिकतम 25 वर्ष की आयु में रियाटर होंगे। यह उम्र भी काफी छोटी होती है। यानी यहां से भी अग्निवीर ही नहीं अनगिनत युवा अपनी शुरुआत करते हैं। यानी रिटायर जो जाने के बादअग्निवीर का जीवन निरर्थक नहीं हो जायेगा, क्योंकि उसके पास उम्र और अवसर दोनों रहेंगे और उसमें अनुभव भी जुड़ जायेगा। जहां तक उनके अपराधी औ आतंकवादी बनने का सवाल है तो यह भारतीय सेना के मूल्यों तथा आदर्शों का अपमान है। चार साल वर्दी पहनने वाले युवा तो अपराधी नहीं बन सकेगा। वह समाज से जुड़ेगा, देशविरोधी ताकतों से नहीं।

भ्रम- इससे सेना के तीनों अंगों की क्षमता प्रभावित होगी।

सत्य- दूसरी सर्विस में इस तरह की बात सोची जा सकती है, लेकिन सेना में नहीं। चूंकि दूसरे देशों में सेना में शॉर्ट सर्विस की व्यवस्था है, उसके अनुभवों के आधार पर भी यह समझा जा सकता है कि ऐसा नहीं होगा। वैसे भी भारतीय सेना का आदर्श दूसरे देशों की सेनाओं के आदर्शों की तुलना में ज्यादा दृढ़ है। फिर युवा तेजतर्रार सेना के लिए सबसे अच्छी व्यवस्था माने जाते हैं। अग्निपथ स्कीम लागू होने के बाद पहले वर्ष भर्ती अग्निवीरों की संख्या आर्म्ड फोर्सेज़ की केवल 3 प्रतिशत होगी। इसके अलावा, चार साल बाद सेना में दोबारा भर्ती से पहले अग्निवीरों के प्रदर्शन की जांच की जाएगी। इस तरह, सेना को सुपरवाइजरी रैंक के लिए जांचे और परखे लोग मिलेंगे।

भ्रम- पूर्व सैन्य अधिकारियों से बिना राय लिये योजना लादी गयी।

सत्य- सरकार दो वर्षों से इस योजना पर काम कर रही है। इस योजना पर पूर्व सैन्य अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई। बता दें, यह प्रस्ताव मिलिट्री ऑफिसर विभाग में मिलिट्री ऑफिसरों द्वारा तैयार किया गया है। इतना ही नहीं कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने इस योजना को स्वीकार किया तथा सराहा है।

यह भी पढ़ें: ‘अग्नि’ में घी डालती राजनीति, ‘अग्नि’ जितनी भड़केगी, राजनीति की रोटी उतनी अच्छी सिंकेगी

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