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Mission 2024: ‘यूपी+बिहार=गयी मोदी सरकार’, पोस्टर ने तेज की सियासी सुगबुगाहट

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Mission 2024: लखनऊ में समाजवादी पार्टी दफ्तर के बाहर लगे एक पोस्टर से देश में सियासी सुगबुगाहट तेज हो गई है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के दिल्ली दौरे के ठीक कुछ ही दिनों बाद इसका प्रभाव उत्तर प्रदेश की सियासत में भी दिखने लगा है. समाजवादी पार्टी ने एक नया पोस्टर जारी किया है जिसमें सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर है. वहीं नारा दिया गया है यूपी+बिहार=गयी मोदी सरकार. इस पोस्टर से अब देशभर की सियासी गरमी बढ़ गई है. गत 7 सितंबर को नीतीश कुमार ने जब दिल्ली में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश से मुलाकात की थी,  तब बिहार के CM नीतीश कुमार ने कहा था कि अखिलेश यूपी का नेतृत्व करेंगे.

सभी दलों को एकजुट करने में भिड़े नीतीश

दरअसल नीतीश कुमार इन दिनों मिशन 2024 पर है. जिसमें वह बीजेपी विरोधी सभी दलों को एकजुट करने में लगे हैं और एकजुटता के उद्देश्य से उन्होंने अखिलेश यादव  से मुलाकात की. अभी हाल में ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली दौरे पर गये थे, जहां विपक्षी दलों के कई नेताओं से उनकी मुलाकात हुई थी. CM नीतीश कुमार के भाजपा से अलग होने के बाद से ही उन्हें 2024 में विपक्ष की ओर से  प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने का दावा किया जा रहा है.

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अखिलेश यादव यूपी का नेतृत्व करेंगे- नीतीश

अखिलेश यादव से मुलाकात और उनकी भूमिका को लेकर नीतीश कुमार का कहना है कि अखिलेश यादव यूपी का आगे नेतृत्व करेंगे,  वहीं, अखिलेश यादव का इस सम्बन्ध  में कहना है कि नीतीश कुमार की मुहिम में वो उनके साथ हैं.

महागठबंधन के लिए अहम् है यूपी

उत्तर प्रदेश में कुर्मी और कोइरी जातियों की संख्या अच्छी खासी है. ऐसे में जो सामाजिक समीकरण है, वह नीतीश कुमार के अनुकूल नजर आ रहा है. बिहार से सटे यूपी के जिलों में कुर्मी समुदाय की बड़ी आबादी है. इसके अलावा अति पिछड़े समुदाय की भी अच्छी तादाद है. बीजेपी की सहयोगी अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल (एस) का आधार कुर्मी समुदाय का ही माना जाता है. हालांकि यह समुदाय  फिलहाल बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है. लेकिन उन्हें ऐसा लगता है कि यदि उनके नाम पर सर्वसम्मति से सहमति जाता दी जाती है, तो एक बड़ा मतदाता वर्ग विपक्षी एकता के साथ खड़ा हो सकता है. यूपी में कुर्मी-कुशवाहा-सैथवार मिलाकर 8 फीसदी वोट हैं, ऐसे में नीतीश कुमार यदि विपक्षी गठबंधन के नेतृत्वकर्ता चुने जाते हैं तो उनसे विपक्ष को बड़ा फायदा हो सकता है.

राह कितना आसान! 

उत्तर-प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें हैं और बिहार में 40. इस तरह दोनों यूपी और बिहार को मिलाकर कुल 120 लोकसभा की सीटें है. 2019 में UP में भाजपा ने 62 और सहयोगी दल अपना दल ने 2 सीटें जीती थी. इस प्रकार NDA ने 64 सीटें जीती थी। जबकि बिहार NDA ने 39 सीटें. दोनों राज्यों में 120 में से NDA को 103 सीटें मिली थीं. लेकिन इन सीटों को जीतने के पीछे मोदी और योगी की भी भूमिका थी, जिसे नजरंदाज नहीं किया जा सकता. ऐसे में नीतीश और अखिलेश की सियासी जोड़ी के लिए राह उतना भी आसान नहीं है, जितना विपक्ष अभी से अनुमान लगा रहा है.

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