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घाटी छोड़ घर भाग रहे प्रवासी मजदूर, कश्मीर से घर जा रहे लोगों ने बयां किया वो दर्दनाक मंजर

घाटी छोड़ घर भाग रहे प्रवासी मजदूर, कश्मीर से घर जा रहे लोगों ने बयां किया वो दर्दनाक मंजर

पिछले कई दिनों से आतंकवादियों  द्वारा गैर-कश्मीरियों को मारने की दुखद घटनाएं सामने आ रही हैं। भयावह स्थिति के कारण लोग कश्मीर घाटी छोड़कर जम्मू की ओर बढ़ रहे हैं तथा कश्मीर में प्रवासी के रूप में रहने वाले भारत के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोग अब ट्रेनों  में सवार होकर अपने घर वापस जा रहे हैं, जिसके चलते जम्मू और कश्मीर रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ जमा हो गयी है। कश्मीर में रहने वाले अधिकतर प्रवासी मज़दूर उत्तर प्रदेश और बिहार से संबंध रखते हैं।

आतंकियों द्वारा  जा रही हत्याओं  के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटी में अपने सभी जिला प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वह सभी प्रवासी मजदूरों को इकट्ठा करके और उन्हें तुरंत निकटतम सुरक्षा शिविरों में लेकर जाएं।

पुलिस महानिरीक्षक (कश्मीर) विजय कुमार  ने प्रदेश के समस्त पुलिस अधिकारियों को भेजे अपने एक संदेश में कहा कि-“आपके संबंधित अधिकार क्षेत्र के सभी गैर-स्थानीय मजदूरों को अभी निकटतम पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बल या सेना शिविर में जल्द से जल्द पहुंचाया जाए।”

जल्द से जल्द अपने घर पहुंचना चाह रहे लोग 

कुछ परिवार अपना सामान छोड़कर आनन-फानन में टैक्सी वालों को ज्यादा किराया देकर जम्मू के रेलवे स्टेशन और बस अड्डे तक पहुंच चुके हैं। उनकी आंखों और बातों में हत्याओं का खौफ देखा जा सकता है। वह जल्द से जल्द अपने घर पहुंचना चाहते हैं जिससे कि सुरक्षित महसूस कर सकें।

‘आतंकी पूरे धर्म को बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं’

आतंकवादियों द्वारा नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए हालिया हमलों के बाद कश्मीर संभाग से विभिन्न राज्यों के श्रमिक अपने घरों की रवाना हो रहे हैं।  एक नागरिक ने कहा कि कश्मीर के स्थानीय लोग बहुत अच्छे हैं, लेकिन आतंकी पूरे धर्म को बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं। अनुच्छेद-370 के हटने और विकास कार्यों के चलते आतंकियों में बौखलाहट है। इसी वजह से वो लोगों पर हमला कर रहे हैं। स्थानीय लोगों को चाहिए कि धर्म और इंसानियत की रक्षा के लिए आतंकियों के खिलाफ मोर्चा खोलें।

जिंदा रहेंगे तो कहीं भी जाकर पैसा कमा लेंगे

बारामुला से वापस अपने घर जा रहे अन्य राज्यों के नागरिकों का कहना है कि रविवार को हुए आतंकी हमले से पहले हमें लग रहा था कि शायद हालात सुधरेंगे, लेकिन इस घटना के बाद अब डर सताने लगा है। अगर जिंदा रहेंगे तो कहीं भी जाकर पैसा कमा लेंगे। हालातों को देखते हुए हम लोगों ने लौटने का फैसला किया है। जम्मू जाकर ट्रेन पकड़ेंगे और अपने घर चले जाएंगे।

शांति और विकास के चलते बौखलाए आतंकी किसी भी हद तक जा सकते हैं

एक नागिरक ने कहा कि कुलगाम में जिस तरह धान कटाई के लिए मजदूर खोजने के बहाने दो लोगों की हत्या कर दी गई है, उससे डर और भी बढ़ गया है। क्या पता, कल कोई मदद करने के बहाने आए और हमें गोलियों से भून दे। खतरा तो पहले भी था पर अब मौत सिर पर मंडरा रही है। घाटी में शांति और विकास के चलते बौखलाए आतंकी किसी भी हद तक जा सकते हैं। हमें सरकार और सुरक्षाबलों पर पूरा भरोसा है, अमन के दुश्मनों का जल्द सफाया होगा।

‘भगवान हमारे मिनी बिहार को सलामत रखे’

उन्होंने कहा कि अनंतनाग जिले में तो हमारे भाइयों की तादात काफी ज्यादा है। वानपोह को मिनी बिहार कहा जाता है। भगवान हमारे मिनी बिहार को सलामत रखे। कश्मीर के स्थानीय लोगों को भी यह समझना चाहिए कि अगर हम वापस लौटे तो कामगारों की तलाश में उनको भटकना पड़ेगा। खेती-किसानी और बागवानी पर बहुत प्रभाव पड़ेगा। उधर, बारामुला में गैर-स्थानीय निवासियों को सोपोर शहर और उसके आसपास सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

अरविंद कुमार साह के घर पर भी पसरा है मातम 

इधर, बांका के बाराहाट प्रखंड के परघड़ी गांव के रहने वाले अरविंद कुमार साह के घर पर भी मातम पसरा है। आतंकियों ने शनिवार को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस गांव के करीब 150 से 200 लोग जम्मू कश्मीर में रहकर अपना और अपने परिवार को पेट पाल रहे हैं। अरविंद की मौत के खबर के दो दिन गुजर गए हैं, लेकिन गांव के अधिकांश घरों में चूल्हे नहीं जले हैं। गांव के लोग अब अपने गांव के बच्चों को जम्मू कश्मीर छोड़कर वापस आने का दबाव डाल रहे हैं।

खुशहाली की जगह मौत आई 

अररिया में खेरूगंज के योगेन्द्र ऋषिदेव की मां करनी देवी बेसुध हाल में हैं। पूछने पर सिर्फ इतना कहती हैं कि मंझला बेटा इसलिए कश्मीर गया था कि कुछ कमाएगा तो घर में खुशहाली आएगी, लेकिन खुशहाली की जगह मौत की खबर आई। कुछ ऐसा ही हाल अररिया में ही मिर्जापुर के राजा ऋषिदेव के घर का है। इन दोनों की कुलगाम में आतंकियों ने गोली मार कर हत्या कर दी। सवाल ये कि आखिर रोटी कमाना इतना महंगा क्यों है कि लोग पलायन कर सीधे मौत के मुंह में ही चले जा रहे हैं?

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