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झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में मगही, भोजपुरी भाषाओं को भी मिली प्राथमिकता

Jharkhand Staff Selection Commission

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा मैट्रिक तथा इंटरमीडिएट स्तर की प्रतियोगिता परीक्षाओं में झारखंड की स्थानीय भाषाओं के साथ बिहारी भाषाओं की भी प्राथमिकता मिली है। झारखंड के अभ्यर्थी मगही और भोजपुरी भाषाओं की परीक्षा दे सकेंगे। कार्मिक विभाग ने इन भाषाओं की सूची कर्मचारी आयोग को भी भेज दी है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के द्वारा “झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा (मैट्रिक/ 10वीं) संचालन (संशोधन) नियमावली, 2021”, “झारखंड कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा (इंटरमीडिएट/ 10+2 स्तर) संचालन( संशोधन) नियमावली, 2021 एवं झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा (इंटरमीडिएट/ 10+2 कंप्यूटर ज्ञान एवं कंप्यूटर में हिंदी टंकण अहर्त्ता धारा पद हेतु) संचालन (संशोधन) नियमावली 2021 का गठन किया गया था।

उक्त नियमावलियों में पत्र-2-चिह्नित क्षेत्रीय/जानजातीय भाषा में जिला स्तरीय पदों के लिए जिलावार चिह्नित क्षेत्रीय/ जनजातीय भाषाओं की सूची कार्मिक, प्रशासनिक सुधार राजभाषा विभाग द्वारा अलग से संसूचित किया जाना था। जिसके आलोक में सम्यक विषय विचारोपरांत झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा मैट्रिक तथा इंटरमीडिएट स्तर की प्रतियोगिता परीक्षा में जिला स्तरीय पदों के लिए क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को जिलावार चिह्नित किया गया है। इसके तहत जनजातीय भाषा में संथाली, कुडुख, खड़िया, मुंडारी, हो, असुर, बिरजिया, बिरहोरी, भूमिज, माल्तो एवं क्षेत्रीय भाषा में नागपुरी, पंचपरगनिया, बंगला, अंगिका, कुरमाली, मगही, उड़िया, खोरठा, भोजपुरी भाषा शामिल हैं।

जनता को मूर्ख बना रही है झारखंड सरकार – प्रतुल शाहदेव

झारखंड में जिला स्तरीय परीक्षाओं में भाषाओं में स्थानीय तथा बिहार की कुछ भाषाओं को शामिल किये जाने को लेकर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि राज्य सरकार आज भी भाषा के मुद्दों पर जनता को मूर्ख बना रही है। राज्य सरकार ने JSSC के द्वारा राज्य स्तरीय परीक्षाओं से भोजपुरी,मगही, हिंदी, अंगिका,आदि भाषाओं को हटाया था। अभी JSSC ने जो 900+ पदों के लिए विज्ञापन जारी किया है वह जिला स्तरीय नियुक्तियों के लिए है, ना कि राज्य स्तरीय नियुक्तियों के लिए। राज्य स्तरीय परीक्षाओं में ये भाषाएं आज भी मौजूद नहीं हैं। राज्य स्तरीय परीक्षाओं में आज भी मैथिली,अंगिका, भोजपुरी, मगही, मैथिली जैसी भाषाएं शामिल नहीं हैं। इन भाषाओं को बोलने वाले लोगों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों?

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