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Gandhi Jayanti: आइये जानें, ‘क्या खाकर’ महात्मा गांधी ने लड़ी अंग्रेजों से लड़ाई?

आइये जानें, ‘क्या खाकर’ महात्मा गांधी ने लड़ी अंग्रेजों से लड़ाई?

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का स्वाधीनता संग्राम में उपवास बहुत बड़ा हथियार था। उन्होंने अनेकों बार बिना कुछ खाये देश की स्वाधीनता के लिए संग्राम किया था। महात्मा गांधी ने 17 बार बिना खाना खाये अंग्रेजों से लोहा लिया था। यह सही है कि बिना खाये (उपवास) उन्होंने अंग्रेजों के छक्के तो छुड़ाये ही, भोजन में उन्हें जो पसंद था, उससे उन्हें जो शारीरिक और मानसिक ऊर्जा मिलती थी, उनका भी उन्हें दृढ़संकल्पित बनाने में बड़ा योगदान है।

गांधी जी सीमित मात्रा में पौष्टिक भोजन को सेहत के लिए अच्छा मानते थे। सत्य और अहिंसा के लिए महात्मा गांधी ने अनेकों प्रयोग किये थे, ऐसे ही प्रयोग उन्होंने अपनी डाइट पर भी सदा किये हैं। गांधीजी भोजन में ताजे फल और नट्स को प्राथमिकता देते थे। महात्मा गांधी ने भोजन को तीन भागों में बांटा था। पहला शाकाहार, दूसरा मांसाहार और तीसरा दोनों का मिश्रण। परन्तु महात्मा गांधी शाकाहार को सर्वोत्तम मानते थे। महात्मा गांधी सात्विक खाने में विश्वास रखते थे। गुस्सा दिलाने वाले खाने से वह परहेज करते थे इसलिए हरी सब्जियों की मात्रा खाने में शामिल करते थे। उबली हुई सब्जियों को बिना नमक के साथ खाना उनकी आदत थी। आइये, जानते हैं, भोजन में गांधीजी को क्या पसंद थे-

पेड़ा

महात्मा गांधी को देशी गायों के दूध से बने गुजरात के छोटे और मुलायम मावे के पेड़े काफी प्रिय थे। मीठे में उन्हें यही व्यंजन सबसे पसंद था।

लौकी

गांधी लौकी को पोषक तत्वों से भरपूर मानते थे और इसका सेवन जरूर करते थे। गांधी जी इसका सेवन उबालकर करते थे। हरा कद्दू गांधी जी के आहार का मुख्य भाग हुआ करता था।

चुकंदर और बैंगन

गांधी जी चुकंदर को उबालकर खाते थे। गांधी जी अपने खाने में उबले हुए बैंगन भी लेते थे।

दाल और चावल

सादा खाना पसंद करने की वजह से उन्हें दाल और चावल खाना पसंद था। क्योंकि सात्विक भोजन दाल और चावल में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट भरपूर होते हैं।

दही और छाछ

महात्मा गांधी को खाने में दही और छाछ खासा पसंद थे। क्योंकि दही और छाछ पाचन तंत्र के लिए अच्छे माने जाते हैं। इसके अलावा पेट की गर्मी दूर करने में भी दही का इस्तेमाल किया जाता है।

बादाम का दूध

अपने लिए बादाम का दूध बनाकर पीना महात्मा गांधी के जीवन का हिस्सा था। गांधीजी इसे खाने के बाद पिया करते थे। आधुनिक भारत में भी इस दूध की अलग अहमियत मानी जाती है।

रोटी

महात्मा गांधी के भोजन का अहम हिस्सा रोटी भी थी। गांधी जी ने रोटी आजीवन खायी। उन्होंने रोटी खाने से परहेज कभी नहीं किया। यह उनकी डाइट का हिस्सा हमेशा रहती थी।

बादाम का हलवा

बादाम गांधी जी का पसंदीदा ड्राइ फ्रूट था। गांधीजी ने अपनी डाइट में बादाम का हलवा शामिल किया था। इसके अलावा सूखे मेवे भी उन्हें पसंद थे। इनमें किशमिश, काजू शामिल थे। हलवे में बादाम के अलावा उन्हें साबुत बादाम खाना भी बेहद पसंद था।

यह भी पढ़ें:  Gandhi Jayanti: फुटबॉल के साथ रंगभेद के खिलाफ महात्मा गांधी का ‘सत्य का प्रयोग’

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