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खेल में लेट लतीफी: अब तो ऐसा पाकिस्तान में नहीं होता, लेकिन सिमडेगा में हो गया!

Simdega Hockey

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

24 अक्टूबर को भारत-पाकिस्तान मैच के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ी मो. रिजवान ने मैदान पर नमाज पढ़ी, उस पर पूर्व पाकिस्तानी खिलाड़ी वकार यूनिस ने जो बयान दिया वह अभी विवादों में ही है कि झारखंड में 11वीं राष्ट्रीय जूनियर महिला हॉकी चैम्पियनशिप की ‘नमाज’ चर्चा में आ गयी है। दरअसल, खेलमंत्री मो. हफीजुल हसन अंसारी के जुम्मे की नमाज पढ़ने के कारण फाइनल मैच 22 मिनट देर से शुरू हुआ। नमाज का विरोध तो किसी शर्त पर नहीं किया जा सकता, लेकिन खेलों की मर्यादा को खंडित करने की इजाजत भी किसी को नहीं है। चाहे वह वकार यूनिस हों या झारखंड के खेल मंत्री। झारखंड के खेलमंत्री ने अपनी आस्था और मर्यादा तो बचा ली, लेकिन जिस आयोजन के लिए आप गये थे, अनेकों लोग, अनेकों मान्यताओं, विचारों वाले लोग वहां थे, उनकी मर्यादाओं को आहत करने का आरोप तो आप पर बनता ही है।

राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय मैचों में किन्हीं कारणों से मैच में विलम्ब होते देखा गया है। इसकी अलग-अलग वजहें हो सकती हैं। लेकिन ऐसा कह कर शुक्रवार को सिमडेगा में मैच में हुई देरी को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। जैसे कि झारखंड हॉकी संघ के खेल अधिकारी कह रहे हैं कि अपरिहार्य वजहों से मैच को रीशिड्यूड करना उनके हाथ में है। अगर खेल अधिकारियों की बात सही है तो यहां यह भी बताना जरूरी है कि खेलमंत्री का सिमडेगा स्टेडियम में लेट पहुंचना भी तय था, तो फिर मैच को पहले ही रीशिड्यूल क्यों नहीं कर दिया गया। ताकि खिलाड़ी नये खेल समय पर मैच के लिए अपने आप को तैयार कर सकें। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। खिलाड़ी, मैच के अधिकारी सभी पूर्व निर्धारित समय पर मैदान पर पहुंच चुके थे। खिलाड़ियों ने मैच के लिए वॉर्मअप तक कर लिया था। उसके बाद खेल के बदले, खेलमंत्री का इंतजार करने लगे। मैच खत्म होने के बाद जब खेल मंत्री हफीजुल हसन अंसारी से इस बाबत सवाल पूछा गया तो बड़ी बेबाकी से उन्होंने कहा कि नमाज पढ़ने चले जाने के कारण वह मैदान लेट से पहुंचे। झारखंड और हरियाणा के बीच फाइनल मुकाबला अपराह्न 3 बजे से शुरू होना था, लेकिन खेलमंत्री के लेट पहुंचने के कारण 3.22 बजे शुरू हुआ। टीमें 22 मिनट तक मैदान में बेवजह खेलमंत्री का इंतजार करती रहीं।

नमाज के बहाने खेल मर्यादा पर चोट

थोड़ा विषयान्तर होते हैं! भारत से मैच जीतने के बाद पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने मैदान पर नमाज अदा की। इस पर पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर वकार यूनिस ने इसे जायज ठहराते हुए कहा, ‘रिजवान ने जो किया वह मुझे सबसे अच्छा लगा। उसने हिंदुओं के बीच में खड़े होकर नमाज अदा की। यह मेरे लिए बहुत खास बात थी।’ देश-विदेश के दिग्गजों ने जब वकार को लताड़ लगायी तब उन्होंने अपनी टिप्पणी पर माफी मांग ली। माफी अपनी जगह, खेल से जुड़े लोग खेल की मर्यादा का खयाल नहीं रखेंगे तब तो खेलों से ‘खेल भावना’ शब्द को ही मिटा देना चाहिए।

क्रिकेट मैच के बीच थी नमाज की परम्परा, अब नहीं

खेलों के बीच नमाज कितना जरूरी है, पहले के दशकों में खेले जाने वाले टेस्ट क्रिकेट मैचों से समझा जा सकता है। यह परम्परा पहले नहीं थी, पाकिस्तान के टेस्ट क्रिकेट पदार्पण के बाद शुरू हुई थी। पांच दिनों तक चलने वाले टेस्ट मैच के बीच अगर शुक्रवार आ जाता था तो उस दिन मैच का टाइम एडजस्ट कर लंच का समय डेढ़ घंटे कर दिया जाता था। हालांकि ऐसा ज्यादातर भारत और पाकिस्तान के मैचों में ही दिखता था। पाकिस्तान के खिलाड़ी दूसरे देश मैच खेलने जाते थे तब उन्हें यह ‘सुविधा’ नहीं मिलती थी। क्या उस समय उनकी आस्था आहत नहीं होती थी? अब तो आईसीसी ने नियम कड़े कर लिये हैं। अब किसी भी देश में ऐसा नहीं होता, पाकिस्तान में भी नहीं।

सवाल फिर वही, अब यह सब जब बंद हो गया है तब क्या इससे आस्था खंडित हो रही है, या आस्था के कारण खिलाड़ियों ने मैच खेलना छोड़ दिया?

फिर धौनी पर क्यों लगाया था प्रतिबंध?

याद होगा, 2019 आईसीसी वर्ल्ड कप में जब दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध महेन्द्र सिंह धौनी ‘बलिदान’ बैज वाला ग्लब्स पहन कर मैदान पर उतरे थे, तब उस पर बहुत बवेला मचा था। आईसीसी ने धौनी के ग्लब्स को प्रतिबंधित कर दिया था। धौनी के ग्लब्स को प्रतिबंधित करते वक्त आईसीसी ने जो कहा, उसपर गौर कीजिये- ‘खिलाड़ी कोई व्यावसायिक, धार्मिक या सेना का लोगो नहीं लगा सकता है।’ तब तो मो. रिजवान का मैदान पर नमाज पढ़ा जाना गलत माना जाना चाहिए। इस पर नियमों को लेकर सबसे बड़ा सवाल आईसीसी से ही पूछा जाना चाहिए।

क्या कहते हैं झारखंड हॉकी संघ के अध्यक्ष भोला सिंह?

फिर आते हैं, सिमडेगा मुद्दे पर। झारखंड हॉकी संघ के अध्यक्ष भोला सिंह ने कहा कि मैच के देरी से शुरू होने की उन्हें जानकारी पहले ही मिल गयी थी, इसलिए उन्होंने सभी ऑफिशियल्स, टीमों, नेशनल हॉकी अथोरिटी, टीवी चैनल्स, वगैरह, वगैरह… को इसकी सूचना दे दी थी। सिमडेगा चूंकि छोटा सेन्टर है, और रांची से दूर है, इसलिए यहां किसी प्रकार की देरी सम्भव है। फिर राज्य की आयोजन समिति को यह अधिकार है कि मैच की परिस्थिति के अनुसार मैच के रीशिड्यूल कर सकते हैं। फिर यहां तो मामला राज्य के खेलमंत्री का था।

क्या कहते हैं झारखंड ओलंपिक संघ के सचिव मधुकांत पाठक?

झारखंड ओलंपिक संघ के सचिव मधुकांत पाठक ने मैचों में होने वाली देरी से सम्बंधित नियमों के बारे में बताया कि कोई भी खेल परिस्थितियों के अनुसार रीशिड्यूल किया जा सकता है। मैच को Postpone (समय आगे बढ़ाना) किया जा सकता है, Prepone (समय पहले करना) नहीं किया सकता। स्थानीय मैच में तो देरी स्वाभाविक है, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मैचों में भी देरी होते देखी गयी है। अभी हाल ही में टोक्यो ओलम्पिक 2020 में भी कई स्पर्द्धाओं के समय को खिसकाना पड़ा था। सिमडेगा मैच के नमाज के कारण देरी होने पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन इतना जरूर कहा कि ‘आज खेलों में कई बातें Beyond Control हैं। मैंने देश और विदेश में भी देखा है कि स्टेडियम में अचानक नमाज शुरू हो जाती है, इसके कारण खेल या आयोजन बाधित हो जाता है।‘

दूसरे राज्यों के खिलाड़ी झारखंड की कौन-सी छवि लेकर वापस लौटे?

सबसे अपने-अपने तरीके से अपनी बात कह दी। परन्तु एक विषय अभी छूट रहा है। वह है यहां आये दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों के मन पर झारखंड की क्या छवि बनी और राष्ट्रीय हॉकी संघ इस मामले को किस नजर से देखता है। क्या आने वाले समय में झारखंड को मिलने वाले आयोजन पर इसका कोई असर पड़ सकता है? वैसे भी राष्ट्रीय खेलों में झारखंड का ज्यादा असर नहीं है।

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