समाचार प्लस
Breaking झारखण्ड फीचर्ड न्यूज़ स्लाइडर बिहार

पलामू में लालू की तीन दिनों की जमी है चौपाल, झारखंड में फिर से लालटेन जला पायेंगे लालू और लालू के लाल?

Lalu's chaupal in Palamu, Lalu and Lalu's Lal will be able to light the lantern again in Jharkhand

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव तीन दिवसीय दौरे पर पलामू में हैं। 2009 के एक आचार संहिता उल्लंघन मामले में 8 जून को मेदिनीनगर के कोर्ट में उन्हें पेश होना है। कोर्ट में पेशी तो एक दिन की बात है, लालू झारखंड में हैं तो थोड़ी राजनीति करेंगे ही। लालू तीन दिनों तक पलामू में हैं इसके इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। झारखंड में राजद का विशेष जनाधार भले न हो, लेकिन राज्य के दो जिलों पलामू और गढ़वा भौगोलिक और राजनीतिक लिहाज से बिहार की तरह है। तात्पर्य यह कि यहां राजद अपनी दाल गला सकता है। जहां तक पलामू प्रमंडल की बात है, राजद का जनाधार पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुआ है। अपने बिखरते जनाधार को मजबूती प्रदान करना भी राजद प्रमुख का प्रमुख उद्देश्य है, इसीलिए तीन दिनों का डेरा उन्होंने पलामू में डाल रखा है। राजद के लिए संतोष की बात यह है कि जब से लालू प्रसाद पलामू के सर्किट हाउस में आए हैं, तब से पार्टी कार्यकर्ताओं का हुजूम यहां देखा जा रहा है। लालू ने राजद के झारखंड पदधारियों और कार्यकर्ताओं के साथ चौपाल भी जमायी और उनसे पलामू में राजद की स्थिति का जायजा लिया और उन्हें निर्देशित भी किया कि कैसे राजद का जनाधार यहां बढ़ सकता है।

राजद का बिहार में भले ही एक मजबूत जनाधार है, लेकिन झारखंड में उसकी स्थिति बेहद दयनीय है। झारखंड जब तक बिहार में था तब तक इस क्षेत्र में लालू की पार्टी की चलती थी। लेकिन झारखंड हाथ से निकलते ही पार्टी की यह डोर भी धीरे-धीरे खिसक गयी। इसकी कई वजहें गिनायी जा सकती हैं। इसमें सबसे प्रमुख तो यह है कि राजद परिवार के दावों के बाद भी झारखंड पर पार्टी ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। चाहे लालू प्रसाद यादव हों या तेजस्वी यादव, सबने कई बार झारखंड का दौरा किया, अपने कार्यकर्ताओं के बीच दावा किया वे झारखंड पर विशेष ध्यान देंगे और पार्टी कैसे मजबूत होगी उसकी रूपरेखा तय की जायेगी, लेकिन सारे दावे सिर्फ वादे ही साबित हुए। इसके बाद लालू प्रसाद को चारा घोटाले में जेल जाना भी झारखंड में राजद की छवि के लिए धक्का था। इसके साथ लालू परिवार में वर्चस्व की लड़ाई के कारण भी बिहार बचाने के अलावा कुछ और नहीं सोच पाया। अब चूंकि लालू परिवार में थोड़ी स्थिरता आयी है। लालू प्रसाद ने कार्यकारी अध्यक्ष रह कर निर्णय लेने की जिम्मेवारियां तेजस्वी यादव को सौंप दी हैं। इसलिए अब पलामू पर राजद ध्यान दे सकता है। लालू परिवार अच्छी तरह जानता है कि पलामू की भौगोलिक स्थिति बिहार से मिलती-जुलती है। पलामू में चूंकि बिहार के लोगों की संख्या भी ज्यादा है और जातीय समीकरण भी राजद को सूट करता है। इसलिए लालू प्रसाद चाहेंगे कि पहले पलामू, फिर उसके आसपास के जिलों में फिर से अपनी पहचान बनाकर झारखंड में पैठ बनायी जाये।

यह भी पढ़ें: Jharkhand: साहिबगंज में अवैध खनन पर लगेगी नकेल, खनन टास्क फोर्स नियमित करेगा जांच

Related posts

देशभर में कुख्यात साइबर अपराधियों के गढ़ जामताड़ा से 9 साइबर अपराधी पकड़ाये, हिमाचल प्रदेश पुलिस भी पहुंची

Manoj Singh

Jharkhand में 20 सूत्री समिति के अध्यक्षों की घोषणा, जानिए किनको मिली जिम्मेवारी

Sumeet Roy

Jharkhand: सिख श्रद्धालुओं से भरी बस हजारीबाग के टाटीझरिया में पलटी, 5 की मौत, 51 घायल

Pramod Kumar